कभी छठ महापर्व के प्रसाद के रूप में घर-घर बनने वाला ठेकुआ अब भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का नया प्रतीक बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया दौरे के दौरान संसद के स्पीकर और राष्ट्रपति को बिहार की इस पारंपरिक मिठाई को उपहार में देकर दुनिया के सामने भारतीय लोक परंपरा और स्वाद की अनूठी पहचान पेश की। इससे पहले पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को 'मेलोडी' टॉफी भेंट कर इसे सुर्खियों में ला दिया था।
हालांकि, इस बार पीएम मोदी की उपहारों की पोटली में सिर्फ ठेकुआ ही नहीं था। उन्होंने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और संसद के स्पीकर रिचर्ड राशी को भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा,हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई विशेष उपहार भी भेंट किए।
स्पीकर रिचर्ड राशी को पीएम मोदी ने दी ये भेंट
प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ वर्षों से विदेशी नेताओं को ऐसे उपहार भेंट करते रहे हैं,जिनमें भारत के अलग-अलग राज्यों की संस्कृति, कला, खानपान और पारंपरिक ज्ञान की झलक दिखाई देती है। इन उपहारों के जरिए भारत अपनी 'सॉफ्ट पावर' को दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से पेश कर रहा है। इसी क्रम में अपने स्लोवाकिया दौरे के दौरान उन्होंने संसद के स्पीकर रिचर्ड राशी को कुछ ऐसा भेंट किया है जिसकी चर्चा जोर-शोर से शुरू हो गई है। पीएम मोदी द्वारा उन्हें दिए गए उपहारों में ठेकुआ प्रमुख आकर्षण रहा। गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी, सौंफ और घी से तैयार यह पारंपरिक मिठाई बिहार और झारखंड की सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है। विशेष रूप से छठ पूजा के अवसर पर बनने वाला थेकुआ अपनी सादगी, लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता और घरेलू स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
ठेकुआ के अलावा, पीएम मोदी ने रिचर्ड राशी को सुश्रुत संहिता और चरक संहिता की प्रतियां भी भेंट कीं। सुश्रुत संहिता को विश्व की सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा (सर्जरी) संबंधी कृतियों में माना जाता है। इसमें शल्य चिकित्सा की उन्नत तकनीकों, उपकरणों, शरीर रचना, औषधीय उपचार और पुनर्निर्माण सर्जरी (राइनोप्लास्टी) जैसी प्रक्रियाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसके अलावा इसमें आंतरिक चिकित्सा, बाल रोग, विष विज्ञान, पोषण और रोगों की रोकथाम जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है।
वहीं, चरक संहिता आयुर्वेद का एक आधारभूत ग्रंथ है, जिसमें स्वास्थ्य, रोग, मानव शरीर की कार्यप्रणाली और समग्र जीवनशैली पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। दो हजार वर्ष से अधिक पुराना यह ग्रंथ भारत की वैज्ञानिक और बौद्धिक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है और आज भी वैश्विक स्तर पर चिकित्सा अध्ययन का अहम स्रोत है।
स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को दी ये भेंट
स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को प्रधानमंत्री मोदी ने हैंडक्राफ्टेड थेवा मोटिफ कफलिंक भेंट किए। राजस्थान के प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध थेवा कला से तैयार इन कफलिंक्स में रंगीन कांच पर बारीक नक्काशीदार स्वर्ण पत्र जड़ने की दुर्लभ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। प्रकृति और पारंपरिक प्रतीकों से प्रेरित इन डिजाइनों में भारतीय शिल्पकला की उत्कृष्टता और सदियों पुरानी कारीगरी की झलक दिखाई देती है।
