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महंगी चीज खरीदने के लिए EMI का ऑप्शन चुनें या Full Payment? किसमें होगी समझदारी

EMI vs Full Payment Options: जब भी घर में किसी महंगी चीज को खरीदने की बात आती है तो कई बार एक बार में ही सारी कीमत चुकाने की व्यवस्था नहीं होती है।

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महंगा सामान ईएमआई में खरीदें या नहीं (Photo: iStock)

EMI vs Full Payment Options: महंगी चीज खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इसे EMI पर खरीदें या पूरा पैसा एक साथ चुका दें?दोनों विकल्पों के अपने फायदे और नुकसान हैं। सही विकल्प आपकी बचत, आय, ब्याज दर और आने वाले खर्चों पर निर्भर करता है। इसलिए खरीदारी से पहले सिर्फ मंथली EMI देखकर फैसला नहीं करना चाहिए।

EMI का विकल्प कब ठीक है?

अगर किसी महंगी चीज को खरीदने के लिए पूरी रकम खर्च करने से आपकी बचत लगभग खत्म हो रही हो तो EMI एक अच्छा विकल्प हो सकता है। उदाहरण के लिए आपके पास 5 लाख रुपये की बचत है और 3 लाख रुपये का लैपटॉप, कार या दूसरा सामान खरीदना है। अगर पूरा भुगतान करने के बाद आपके पास इमरजेंसी के लिए पैसा नहीं बच रहा है तो EMI के जरिए भुगतान करना ज्यादा सही होगा।

EMI का एक फायदा यह भी है कि पूरी रकम एक साथ निकालने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, EMI चुनते समय ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, प्री-क्लोजर चार्ज और कुल भुगतान जरूर देखे जाने चाहिए। कम EMI का मतलब हमेशा सस्ता सौदा नहीं होता। आपको समझना होगा कि लंबी अवधि चुनने पर कुल ब्याज काफी बढ़ सकता है।

Full Payment कब बेहतर हो सकता है?

अगर आपके पास खरीदारी के बाद भी इमरजेंसी फंड और जरूरी बचत मौजूद रहती है, तो बिना ब्याज के या कम लागत पर पूरा भुगतान करना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है। Full Payment में ब्याज नहीं देना पड़ता और भविष्य की मासिक आय पर EMI का बोझ भी नहीं रहता।

मान लीजिए किसी सामान की कीमत 2 लाख रुपये है। अगर EMI पर लेने पर ब्याज और दूसरे शुल्क मिलाकर आपको 2.25 लाख रुपये चुकाने पड़ते हैं, जबकि Full Payment पर कीमत 2 लाख रुपये ही है, तो दोनों विकल्पों की कुल लागत की तुलना करना जरूरी है। अगर आप चाहें तो 25 हजार रुपये की बचत का विकल्प चुन सकते हैं।

कौन-सा विकल्प ज्यादा बेहतर

अगर Full Payment करने के बाद आपकी बचत सुरक्षित रहती है और EMI पर ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है, तो फुल पेमेंट एक अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर पूरा भुगतान करने से आपकी बचत बहुत कम हो जाएगी, तो कम लागत वाली EMI आपके कैश फ्लो को बनाए रखने में मदद कर सकती है।

फैसला लेने से पहले जरूरी बातें

  • खरीदारी के बाद कम से कम कुछ महीनों के जरूरी खर्च के लिए पैसा यानी इमरजेंसी फंड बचा रहना चाहिए।
  • सिर्फ EMI नहीं, बल्कि ब्याज और सभी शुल्क जोड़कर कुल भुगतान देखें।
  • अगर आपकी आय में उतार-चढ़ाव रहता है, तो लंबी अवधि की EMI सावधानी से चुनें।
  • महंगी चीज केवल इसलिए EMI पर न खरीदें क्योंकि मासिक किस्त छोटी दिखाई दे रही है।
Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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