टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने हाल ही में चेन्नई स्थित साई यूनिवर्सिटी के तीसरे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने कॉलेज पूरा कर पेशेवर दुनिया में कदम रख रहे युवाओं को जीवन में सफलता हासिल करने के कई महत्वपूर्ण मंत्र दिए। चंद्रशेखरन ने स्नातकों से कहा कि वे जीवन में कभी भी असफलताओं और असफल कोशिशों से हतोत्साहित या निराश न हों। इसके बजाय, हर असफलता को अपने प्रयासों को और मजबूत करने और नया सीखने के एक बेहतर अवसर के रूप में देखें। उन्होंने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए आह्वान किया कि वे अपने जीवन में हमेशा बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करें तथा छोटी-मोटी रुकावटों से घबराने के बजाय दृढ़ता से उनका सामना करें।
भारत में आर्थिक बदलाव और तकनीक का नया दौर
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक चंद्रशेखरन ने अपने संबोधन में वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारतीय बाजार की मौजूदा स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में कृत्रिम मेधा (AI) और तेजी से हो रहे तकनीकी परिवर्तन पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को एक नया आकार दे रहे हैं। इसी दौर में भारत एक ऐसी आर्थिक वृद्धि और प्रगति के चरण में प्रवेश कर चुका है, जो आने वाले दशकों में देश के इतिहास और पूरे विश्व के लिए अद्वितीय और ऐतिहासिक साबित हो सकता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि भारत में असीमित संभावनाएं मौजूद हैं, इसलिए उन्हें इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए खुद को हमेशा मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार रखना चाहिए।
खुद में निरंतर सुधार और असफलताओं का सामना
चंद्रशेखरन ने युवाओं को सलाह दी कि वे दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय केवल अपनी व्यक्तिगत प्रगति और निरंतर सुधार पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि अपने करियर के लिए लगातार खुद को तैयार करते रहें और असफलताओं से कभी विचलित न हों। अपनी सफलता को इस बात से मापें कि आप रोज कितना सुधार कर रहे हैं, और इसी आधार पर खुद का आकलन करते हुए अपने लक्ष्यों की ओर लगातार बढ़ते रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुश्किल परिस्थितियां हर किसी के जीवन में आती हैं, लेकिन जीत उसी की होती है जो उनका डटकर और दृढ़ता से सामना करता है।
आजीवन सीखते रहने की जरूरत और अप्रासंगिकता का खतरा
दीक्षांत समारोह में बोलते हुए चंद्रशेखरन ने छात्रों को आगाह किया कि वे अपनी डिग्री या औपचारिक शिक्षा को जीवन की अंतिम उपलब्धि न समझें। आज का कार्यक्षेत्र बहुत तेजी से बदल रहा है और इस प्रतिस्पर्धी माहौल में टिके रहने के लिए जीवनभर नए कौशल (Skills) सीखते रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक इतनी तेजी से बदल रही है कि अगर कोई समय के साथ नया नहीं सीखता, तो वह बहुत जल्द उद्योग में अप्रासंगिक (Irrelevant) हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच सालों में ऐसे कई नए उद्योग और क्षेत्र सामने आएंगे, जिनके नाम या काम के बारे में आज हम जानते भी नहीं हैं।
एआई (AI) का सही इस्तेमाल और रणनीतिक सोच
आधुनिक करियर में एआई (Artificial Intelligence) की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने इसका बुद्धिमत्तापूर्वक उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि पेशेवरों को प्रशासनिक कार्यों, जटिल आंकड़ों के विश्लेषण (Data Processing) और रोजमर्रा के सामान्य कामों के लिए एआई टूल्स की मदद लेनी चाहिए। ऐसा करने से उनका समय बचेगा, जिसका उपयोग वे रणनीतिक सोच (Strategic Thinking), रचनात्मकता और अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को पूरा करने में कर सकते हैं। इसके अलावा, उन्होंने युवाओं से कार्यस्थल पर मिलने वाले दबाव को एक अवसर के रूप में देखने की अपील की।
अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों में संतुलन
चंद्रशेखरन ने स्नातकों को अपने करियर में शॉर्ट टर्म और लॉन्गटर्म लक्ष्यों के बीच एक बेहतर संतुलन बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि छोटी अवधि की उपलब्धियां व्यक्ति में उत्साह और काम करने की गति बनाए रखती हैं, लेकिन इसके साथ ही इंसान को हमेशा अपने बड़े और लंबे समय के मुख्य लक्ष्य पर नजर रखनी चाहिए।
एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति और पृष्ठभूमि
यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब हाल ही में टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को चेयरमैन के रूप में पांच साल का एक और कार्यकाल देने का निर्णय लिया है। 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में उनकी पुनर्नियुक्ति पर फैसला हुआ था। हालांकि, इस बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने उनकी पुनर्नियुक्ति के खिलाफ अपना वोट दिया था। इन सबके बावजूद, चंद्रशेखरन का यह दूसरा कार्यकाल टाटा समूह को नई तकनीकों और वैश्विक चुनौतियों के बीच आगे ले जाने में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
