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'गैर-मान्यता प्राप्त दलों के जरिए 10 हजार करोड़ का टैक्स घोटाला', BJP पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, उठाई JPC जांच की मांग

कांग्रेस सांसद शक्तिसिंह गोहिल और पार्टी के संचार महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि देश में लगभग 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल चल रहे हैं, जिन्हें 'भाजपा की C-टीम' और फर्जी संस्थाएं कहा जा रहा है।

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कांग्रेस का बीजेपी पर बड़ा आरोप

Congress Alleges Rs 10000 Crore Tax Scam: कांग्रेस पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए देश में गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) के जरिए ₹10,000 करोड़ रुपये के आयकर चोरी और ब्लैक मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की संसदीय संयुक्त समिति (JPC) से जांच कराने की मांग की है।

क्या हैं कांग्रेस के मुख्य आरोप?

कांग्रेस सांसद शक्तिसिंह गोहिल और पार्टी के संचार महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि देश में लगभग 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल चल रहे हैं, जिन्हें 'भाजपा की C-टीम' और फर्जी संस्थाएं कहा जा रहा है। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के करीबी सहयोगियों और पांच करोड़ रुपये से अधिक कमाने वाले लोगों के बीच सांठगांठ का भी आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा, वे काला धन कमाते हैं और उन्हें डर भी नहीं है, क्योंकि उन्हें भाजपा का संरक्षण प्राप्त है। कानून बहुत सख्त हैं। आयकर कानून कांग्रेस सरकार के दौरान लागू हुआ था और यह एक कठोर कानून है, लेकिन उन्हें कोई डर नहीं है क्योंकि उन्हें भाजपा का सुरक्षा कवच प्राप्त है। गोहिल ने कहा, भाजपा की शीर्ष टीम और धनी लोग मिलकर सिस्टम में हेराफेरी करते हैं और आयकर चोरी करते हैं।

उन्होंने आगे कहा, दूसरा प्रावधान धारा 80GGB है, जो कंपनियों पर लागू होता है। अगर कोई कंपनी आय अर्जित करती है और किसी पंजीकृत राजनीतिक दल को दान देती है, तो उसे दान की गई राशि पर कर नहीं देना पड़ता; उस राशि पर उसकी कर देयता शून्य हो जाती है। कांग्रेस ने इस बात पर जोर दिया कि RUPP को मिलने वाली राशि उनकी पार्टी को मिलने वाली राशि से कहीं अधिक है।

जयराम रमेश ने उठाए कई सवाल

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने भी भाजपा को निशाना बनाते हुए अपने पोस्ट में इसी तरह के आंकड़े साझा किए। रमेश ने सवाल किया, तो फिर इन 3,260 फर्जी राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े कर चोरी के मामलों की जांच क्यों नहीं की जा रही है? क्या इसका कारण यह है कि इन फर्जी राजनीतिक दलों को भाजपा नेतृत्व का संरक्षण प्राप्त था और वे सरकार के आशीर्वाद से यह सारा घोटाला कर रहे थे?

जयराम रमेश ने सवाल उठाया, इन 3260 फर्जी राजनीतिक दलों के पीछे 'चाणक्य' कौन है और इस घोटाले का असली मास्टरमाइंड कौन है? 2024 चुनावों से पहले कांग्रेस के बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए गए, लेकिन ₹10,000 करोड़ के इस चंदा घोटाले में शामिल दलों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या इसलिए कि इन्हें भाजपा का संरक्षण हासिल है?

'ऊपर' से आदेश न आने का दावा

शक्तिसिंह गोहिल ने दावा किया कि 2025 में एक एनजीओ की रिपोर्ट में इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ था, लेकिन अधिकारियों द्वारा सिफारिश किए जाने के बावजूद 'ऊपर' (सरकार के शीर्ष नेतृत्व) से कोई कार्रवाई का आदेश नहीं आया। कांग्रेस की मांग है कि इस ₹10,000 करोड़ के दान/टैक्स चोरी घोटाले की निष्पक्ष और गहन जांच JPC द्वारा कराई जाए। फर्जीवाड़ा करने वाली कंपनियों और दलों पर इनकम टैक्स एक्ट के तहत 200% की पेनाल्टी लगाई जाए और दोषियों को 7 साल की जेल की सजा दी जाए। इस फर्जीवाड़े में मदद करने वाले चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं और उनके लाइसेंस रद्द किए जाएं। सरकार फर्जी दलों को चंदा देने वालों की सूची सार्वजनिक करे और यह भी बताए कि इन फर्जी दलों से जुड़े कितने लोग बाद में भाजपा में शामिल हुए।

चुनाव आयोग और बीजेपी की प्रतिक्रिया का इंतजार

टाइम्स नाउ डिजिटल ने भारतीय चुनाव आयोग से संपर्क कर इन आरोपों पर कुछ सवाल पूछे हैं। जवाब का इंतजार है और इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा। वहीं, बीजेपीने भी अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। टाइम्स नाउ डिजिटल ने कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी की प्रतिक्रिया जानने के लिए पार्टी से संपर्क किया है; अभी तक जवाब का इंतजार है। बीजेपी की प्रतिक्रिया आने पर इस खबर को अपडेट किया जाएगा।

आंकड़ों से इस अंतर का क्या पता चलता है?

एडीआर के अनुसार, चुनाव आयोग में पंजीकृत सभी राजनीतिक दलों में से लगभग 97% रिपब्लिकन पार्टी (RUPP) हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि इनकी संख्या लगभग दोगुनी हो गई है — 2010 में 1,112 से बढ़कर 2021 में 2,858 हो गई है। 2022-23 के दस्तावेजों का विश्लेषण करते हुए जुलाई 2025 की अपनी रिपोर्ट में एडीआर ने पाया कि लगभग 26 प्रतिशत आरयूपीपी के दस्तावेज ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे। एडीआर का कहना है कि कई आरयूपीपी कभी चुनाव नहीं लड़ते, फिर भी उन्हें चंदा स्वीकार करने और कर छूट का दावा करने का अधिकार है। अब इस विवाद पर जो सवाल उठ रहा है, वह यह है कि हजारों पार्टियां, जो कभी चुनाव नहीं लड़तीं, वर्षों तक कर-मुक्त चंदा कैसे इकट्ठा करती रहीं और कौन उन पर नजर रख रहा था?

(इस न्यूज को चुनाव आयोग और भाजपा की प्रतिक्रियाओं के आधार पर आगे अपडेट किया जाएगा।)

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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