इसमें योग के 12 आसनों की एक सीरीज होती है, जिसे सांसों की लय के साथ किया जाता है। यह शरीर को एक्टिव करने के साथ कई मांसपेशियों पर एक साथ काम करता है। शुरुआत करने वालों के लिए इसे अपनी क्षमता के हिसाब से करना जरूरी है।
इसमें पैरों को थोड़ा अलग रखकर नीचे की ओर गहराई से बैठना होता है और फिर वापस खड़ा होना होता है। इस दौरान एड़ियां जमीन पर टिकी रहती हैं। यह खास तौर पर पैरों और ग्लूट्स की मांसपेशियों पर काम करता है।
इसे साइड लंज या लेटरल स्क्वाट भी कहा जाता है। इसके बाद साधारण दंड यानी पुशअप जैसा मूवमेंट है। दंड करते समय शरीर को नियंत्रित तरीके से नीचे ले जाकर फिर ऊपर उठाया जाता है। ये एक्सरसाइज पैरों, कंधों, छाती, हाथों और कोर जैसी मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद करती हैं।
इसमें डाउनवर्ड डॉग, लो डाइव और कोबरा पोज जैसी मूवमेंट एक फ्लो में की जाती हैं। इस तरह की एक्सरसाइज हार्ट रेट बढ़ाने, सहनशक्ति बेहतर करने और शरीर के अलग-अलग प्रमुख मसल ग्रुप्स पर काम करने में मदद कर सकती हैं।
बाबा रामदेव कहते हैं कि अगर कोई बाकायदा वर्कआउट नहीं करना चाहता तो बैडमिंटन जैसे आउटडोर गेम्स भी खेल सकता है। यानी फिट रहने के लिए जरूरी नहीं कि हर दिन जिम में घंटों बिताए जाएं।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि शुरुआत हमेशा अपनी क्षमता के मुताबिक कम इंटेंसिटी से करनी चाहिए और फिटनेस बढ़ने पर धीरे-धीरे इसे बढ़ाना चाहिए। वर्कआउट से पहले वार्मअप और बाद में कूल डाउन करना भी जरूरी है।
एक्सरसाइज के दौरान पानी पीते रहना और पर्याप्त आराम लेना भी जरूरी है। अगर शरीर में तेज या असामान्य दर्द हो तो वर्कआउट जारी रखने के बजाय रुक जाना चाहिए। किसी नई एक्सरसाइज या रूटीन को शुरू करने से पहले अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना बेहतर है।