अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और नाइजीरिया की सेनाओं ने शुक्रवार को एक अभियान में इस्लामिक स्टेट समूह के एक कुख्यात आतंकी को मार गिराया। ट्रंप ने देर रात एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस संयुक्त अभियान की घोषणा की।
ट्रंप ने जानकारी दी कि इस्लामिक स्टेट का सेकंड-इन-कमांड अबू-बिलाल अल-मिनुकी मारा गया। उसकी मौत अमेरिकी और नाइजीरियाई सेनाओं के नाइजीरिया में एक जॉइंट ऑपरेशन में हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस ऐतिहासिक और जटिल मिशन की आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे पूरी तरह सफल बताया। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, अल-मीनुकी इस समय दुनिया का सबसे सक्रिय और खतरनाक आतंकवादी था, जो अफ्रीका को अपना सुरक्षित ठिकाना मानकर वहां छुपा हुआ था, लेकिन अमेरिकी खुफिया स्रोतों के पास उसकी पल-पल की जानकारी मौजूद थी।
इस मोस्ट वांटेड कमांडर को जून 2023 में अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा 'विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी' घोषित किया गया था, जो 'अबू बकर मैनॉक' जैसे कई फर्जी नामों का इस्तेमाल कर रहा था और इसी साल अप्रैल में नाइजीरिया के अडामावा राज्य में हुए उस भीषण आतंकी हमले के पीछे भी इसी नेटवर्क का हाथ माना जा रहा है जिसमें 29 मासूम लोगों की जान चली गई थी।
ट्रंप ने नाइजीरियाई सरकार का जताया आभार
इस बड़े सफाए से पूरी दुनिया में ISIS के वैश्विक ऑपरेशन्स की रीढ़ टूट गई है और वे अब अमेरिकी नागरिकों या ठिकानों को निशाना बनाने की योजना नहीं बना पाएंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस आतंकवाद-विरोधी अभियान में बेहतरीन समन्वय दिखाने के लिए नाइजीरियाई सरकार और वहां की सेना के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि अबू बक्र अल-मैनुकी वैश्विक स्तर पर इस्लामिक स्टेट समूह का दूसरा सबसे बड़ा आतंकी था और ’उसे लगा कि वह अफ्रीका में छिप सकता है लेकिन उसे यह नहीं पता था कि हमारे पास ऐसे सूत्र हैं, जो हमें उसकी गतिविधियों की जानकारी देते रहते थे।'
कौन था अल-मैनुकी?
नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका अल-मैनुकी को आईएस के संगठन और वित्तपोषण में प्रमुख व्यक्ति मानता था और वह अमेरिका और उसके हितों के खिलाफ हमले की साजिश रच रहा था। आतंकी समूहों पर नजर रखने वाली संस्था ’काउंटर एक्सट्रीमिज्म प्रोजेक्ट’ के अनुसार, 1982 में नाइजीरिया के बोर्नो प्रांत में जन्मे अल-मैनुकी ने 2018 में मम्मन नूर के मारे जाने के बाद पश्चिम अफ्रीका में आईएस शाखा की बागडोर संभाली थी।
