भारत और बांग्लादेश के रिश्ते केवल भौगोलिक सीमाओं या कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह दो जीवंत लोकतंत्रों की साझा आकांक्षाओं और सपनों पर आधारित हैं। यह बात बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने मंगलवार को ढाका में आयोजित एक व्यापारिक स्वागत समारोह के दौरान कही। यह कार्यक्रम 'भारतीय उद्योग परिसंघ' (Confederation of Indian Industry - CII) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के स्वागत में आयोजित किया गया था।
भूगोल और इतिहास से परे साझा सपने
समारोह को संबोधित करते हुए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जन-सांख्यिकी संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा- यहां मेरे काम का एक ही मुख्य उद्देश्य है: हमारे पास दो जीवंत लोकतंत्र हैं। ये जीवंत लोकतंत्र केवल भूगोल, इतिहास या संस्कृति के बारे में नहीं हैं, यह आकांक्षाओं के बारे में हैं। दोनों देशों में बड़ी संख्या में युवा प्रतिभाएं हैं। सौभाग्य से, दोनों देशों के लोग और यहाँ के युवा बेहद प्रतिभाशाली हैं। इसीलिए मैं हमेशा कहता हूं कि हम सिर्फ सीमाएं साझा नहीं करते; हम सपने, आकांक्षाएं और समानता भी साझा करते हैं।
'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
भारत की 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) नीति का जिक्र करते हुए त्रिवेदी ने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को कितना अधिक प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा, पड़ोस सबसे महत्वपूर्ण है, और यही एक कारण है कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मुझे यहां भेजने का विचार किया। मैं कोई पेशेवर कूटनीतिज्ञ नहीं हूं। वे बेहद प्रतिभाशाली लोग होते हैं, लेकिन हम अलग-अलग क्षेत्रों से हैं। मैं सार्वजनिक जीवन में रहा हूं और मुझे यहां आने के लिए चुना गया।
शीर्ष नेतृत्व से सीधा संपर्क
अपने अनुभव और भूमिका को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया जानती है कि उनका प्रधानमंत्री मोदी के साथ सीधा संपर्क है। वे किसी भी समय उन्हें सीधे फोन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें बांग्लादेश भेजे जाने का एकमात्र कारण यह है कि भारत अपने पड़ोसी देश के प्रति अत्यधिक सम्मान, स्नेह और उसके साथ मजबूत संबंधों की आवश्यकता महसूस करता है।
'मतभेद स्वाभाविक, लेकिन संबंध अटूट'
पड़ोसियों के बीच कभी-कभी उत्पन्न होने वाले तनाव या राजनीतिक उतार-चढ़ाव पर खुलकर बात करते हुए उच्चायुक्त ने कहा कि एक परिवार की तरह दो देशों के बीच भी कभी-कभी छोटी-मोटी असहमतियां होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थितियों का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि दोनों देश एक-दूसरे से दूर हो जाएं, क्योंकि दोनों का इतिहास और संस्कृति एक ही है और वे हमेशा साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।
व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की पहल
बांग्लादेशी समाचार पत्र प्रथम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी के नेतृत्व में 18 सदस्यीय उच्च स्तरीय भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को दो दिवसीय दौरे पर ढाका पहुंचा। इस दौरे का मुख्य लक्ष्य दोनों पड़ोसी देशों के बीच नए व्यापार और निवेश के अवसरों की तलाश करना है।
