पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर वहां की सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया। इमरान खान की बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने अडियाला जेल पहुंचकर उनसे मुलाकात की है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और स्पष्ट आदेश के बाद ही यह मुलाकात मुमकिन हो सकी। हालांकि, जेल के रास्ते में पुलिस ने इमरान की तीनों बहनों को रोक लिया था, लेकिन बाद में केवल नोरीन नियाजी को ही अंदर जाने की इजाजत दी गई।
दोनों के बीच करीब 14 से 15 मिनट बातचीत हुई, जिसके बाद नोरीन ने मुलाकात की पुष्टि तो की, लेकिन कोर्ट के दिए आश्वासन के मुताबिक मीडिया से दूरी बनाए रखी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी कैदी का अपने परिवार से मिलना कोई राजनीतिक एहसान नहीं, बल्कि उसका मौलिक अधिकार है। अदालत ने प्रशासन को इमरान खान के परिवार से हर हफ्ते मुलाकात कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, बीते तीन सालों में इमरान की उनकी बहनों और बेटों से हुई बातचीत तथा फोन कॉल्स का पूरा रिकॉर्ड भी तलब किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने हेल्थ पर जताई चिंता
इमरान खान की सेहत को लेकर भी एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अडियाला जेल की मेडिकल रिपोर्ट में उनके लगातार बढ़ते ब्लड प्रेशर और मानसिक तनाव पर गहरी चिंता जताई गई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को तुरंत जांच और बेहतर इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने का आदेश दिया है। कोर्ट ने एक विशेष मेडिकल बोर्ड बनाने को कहा है, जिसमें इमरान के निजी डॉक्टरों के साथ उनकी बहन डॉ. उजमा खान को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
कानून मंत्री आजम नजीर तरार क्या बोले?
दूसरी तरफ, पाकिस्तान सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से असहज नजर आ रही है। पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने साफ कर दिया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की समीक्षा की मांग करेगी। शहबाज सरकार इमरान खान को जेल से बाहर अस्पताल शिफ्ट करने के फैसले के खिलाफ जल्द ही एक रिव्यू पिटीशन दायर करने की तैयारी में है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत का अगला कदम क्या होता है।
