Trending Video: भारतीय कंटेंट क्रिएटर सचिन अवस्थी ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ छुट्टियां मनाने साउथ कोरिया के जेजू आइलैंड (Jeju Island immigration issue) गए थे। वहां पहुंचने के बाद उन्हें करीब 38 घंटे तक हिरासत में रखा गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद परेशान करने वाला रहा। लंबे समय से इस ट्रिप की प्लानिंग की थी और जैसे ही वहां लैंड किया, हमें लगा कि अब एक शानदार यात्रा की शुरुआत होने वाली है। लेकिन कुछ ही घंटों में सब कुछ बदल गया। एयरपोर्ट पर हमें अचानक एंट्री देने से मना कर दिया गया। बिना कोई साफ वजह बताए हमें एक अलग कमरे में बैठा दिया गया और सिर्फ इंतजार करने को कहा गया। धीरे-धीरे समय बीतता गया, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बाद में हमें एक डिटेंशन सेंटर में ले जाया गया, जो किसी जेल (Sachin Awasthi news) जैसा था। वहां न धूप थी और न ही बाहर की दुनिया से कोई संपर्क।
कंटेंट क्रिएटर ने सोशल मीडिया पोस्ट कर बताई असली सच्चाई
हमें वही खाना दिया गया जो कैदियों को दिया जाता है। सबसे परेशान करने वाली बात यह थी कि कोई भी हमें ठीक से नहीं बता रहा था कि आगे क्या होगा। हम मानसिक रूप से थक चुके थे। इस बीच हम पर दबाव डाला गया कि हम बहुत महंगा रिटर्न टिकट बुक करें, जिसकी कीमत सामान्य टिकट से लगभग दस गुना ज्यादा थी। उस समय हमारे पास बहस करने की ताकत नहीं बची थी। हम सिर्फ सुरक्षित वापस लौटना चाहते थे। चीन से ट्रांजिट के दौरान भी स्थिति आसान नहीं रही। वहां भी लंबा इंतजार, सख्त निगरानी और सीमित बातचीत की अनुमति मिली। फोन इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं थी, खाना नहीं दिया गया और पानी भी बहुत सीमित मात्रा में मिला।
यहां तक कि वॉशरूम जाने पर भी एक पुलिस अधिकारी साथ आता था और पूरी निगरानी रखता था। सोने की व्यवस्था भी बेहद खराब थी। करीब 38 घंटे बाद हमें बताया गया कि हमें वापस भेजा जाएगा। तब तक हम पूरी तरह मानसिक रूप से टूट चुके थे। हम यह कहानी सहानुभूति पाने के लिए नहीं बता रहे हैं। किसी भी देश को इमिग्रेशन का अधिकार है, लेकिन किसी यात्री के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना सही नहीं है। सोशल मीडिया पर यात्रा हमेशा खूबसूरत और ग्लैमरस दिखती है, लेकिन कभी-कभी कुछ घंटे ही पूरी कहानी बदल देते हैं और इंसान को भावनात्मक रूप से झकझोर कर रख देते हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
