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ग्वालियर में कार पर 3,400 'लिपस्टिक के निशान' और 5,500 का चालान! जानिए दिल्ली में आपकी गाड़ी पर कौन-कौन से बदलाव पड़ सकते हैं भारी

ग्वालियर में कार पर 3,400 लिपस्टिक के निशानों के चलते चालान कटने के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि दिल्ली में कौन-कौन से कार-बाइक मॉडिफिकेशन गैरकानूनी हैं। जानिए मोटर वाहन अधिनियम (Section 52) के नियम।

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क्या कहता है मोटर व्हीकल एक्ट का सेक्शन 52

हाल ही में मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से एक अजीबोगरीब और अनोखा मामला सामने आया। यहां एक प्रेमी ने अपनी गर्लफ्रेंड के करीब 3,400 'लिपस्टिक किस' के निशानों से पूरी कार को ढंक दिया। जब यह कार शहर की सड़कों पर घूमी तो इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। नतीजा? ग्वालियर ट्रैफिक पुलिस ने कार मालिक को ढूंढ निकाला, 5500 रुपये का चालान ठोका और सारे निशान तुरंत साफ करने की सख्त हिदायत दी। ग्वालियर का यह मामला देखने में तो थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन इसने मोटर वाहन कानून (Motor Vehicle Law) के एक ऐसे पहलू को सामने ला दिया है, जिसे ज्यादातर गाड़ी चलाने वाले नजरअंदाज कर देते हैं।

ऐसे में अगर आप दिल्ली-NCR में रहते हैं और अपनी कार या बाइक में कूल दिखने के लिए बदलाव कराने की सोच रहे हैं, तो सोच लीजिए। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के नियम काफी सख्त हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 52 (Section 52 of MV Act) के तहत कौन-कौन से बदलाव गैरकानूनी हैं और आप पर क्या कार्रवाई हो सकती है।

क्या कहता है कानून?

इस मामले में समाचार एजेंसी पीटीआई ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी से बातचीत की। पुलिस अधिकारी का कहना है कि जब कोई व्यक्ति शोरूम से गाड़ी खरीदता है, तो वह पूरी तरह से सरकारी मानकों और ट्रैफिक गाइडलाइंस के हिसाब से बनी होती है।

मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 52 (Motor Vehicle Act Section 52) के अनुसार, यदि कोई बदलाव गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) में दर्ज मूल विवरण को बदलता है, तो वह बिना RTO की अनुमति के गैरकानूनी है। अगर आप रंग, इंजन या डिजाइन में बदलाव चाहते हैं, तो पहले अथॉरिटी से परमिशन और वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य है।

दिल्ली में ये मॉडिफिकेशन्स बना सकते हैं चालान का शिकार

यदि आप दिल्ली-NCR की सड़कों पर अपनी गाड़ी लेकर उतरते हैं, तो इन बदलावों से हर हाल में बचें:

काले शीशे

कार की खिड़कियों पर बाहर से काली फिल्म लगाना पूरी तरह बैन है। नियम के मुताबिक, कंपनी फिटेड ग्लास से भी कम से कम 70% विजिबिलिटी विंडस्क्रीन और रियर विंडो से और साइड विंडोज से 50% विजिबिलिटी होनी चाहिए।

मॉडिफाइड साइलेंसर और तेज आवाज

खासकर बुलेट या स्पोर्ट्स बाइक्स में आफ्टरमार्केट साइलेंसर लगाकर पटाखे जैसी आवाज निकालना या आवाज बढ़ाना कानूनन अपराध है। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत वाहनों को निर्धारित शोर मानकों का पालन करना ही होगा।

एलईडी और एक्स्ट्रा पावरफुल हेडलाइट्स

गाड़ियों में जरूरत से ज्यादा ब्राइट, आफ्टरमार्केट LD/HID लाइट्स या अनाधिकृत अतिरिक्त लाइट्स लगाना बैन है। शहरी इलाकों में हाई-बीम का इस्तेमाल मना है क्योंकि इससे सामने से आने वाले ड्राइवर की आंखें चौंधिया जाती हैं और हादसा हो सकता है।

प्रेशर और मल्टी-टोन हॉर्न

गाड़ी में ऐसे हॉर्न लगाना जो बेहद कर्कश, चुभने वाले या अलार्म जैसी आवाज निकालते हों, पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं।

फर्जी स्टीकर और रंग में बदलाव

निजी वाहनों पर बिना अधिकार के 'PRESS', 'पुलिस' या कोई अन्य सरकारी पद से जुड़ा स्टीकर लगाना आपकी गाड़ी को पुलिस की रडार पर ला सकता है। एक स्टीकर आपको सड़क पर कोई विशेषाधिकार नहीं देता। साथ ही RC में दर्ज रंग को बदले बिना पूरी गाड़ी का रंग पेंट करा लेना या गाड़ी का ढांचा बदल देना अवैध है।

दिल्ली पुलिस का एक्शन मोड: आंकड़ों में समझिए

दिल्ली पुलिस केवल चेतावनियां ही नहीं दे रही, बल्कि सड़कों पर लगातार अभियान चला रही है। हाल ही में चलाए गए एक सप्ताह के विशेष प्रवर्तन अभियान में दिल्ली पुलिस ने गलत दिशा में ड्राइविंग के लिए 7,675 चालान, बिना हेलमेट राइडिंग के लिए 22,992 चालान, ट्रिपल राइडिंग के लिए 1,568 चालान और ई-रिक्शा उल्लंघन 7,298 चालान काटे गए और 63 ई-रिक्शा जब्त किए गए। ट्रैफिक पुलिस ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ आने वाले दिनों में पूरे शहर में एक और बड़ा चेकिंग अभियान शुरू किया जाएगा।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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