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अजब: बर्फ में जमने के बाद भी जिंदा रहता है यह मेंढक, तापमान बढ़ते ही हो जाता है पहले की तरह नॉर्मल

Ajab Gajab News: अंटार्कटिका के अलावा मेंढक दुनिया के हर महाद्वीप पर पाए जाते हैं। मेंढक की 7000 प्रजातियों में से एक मेंढक ऐसा पाया जाता है, जो बर्फ में जमने के बाद भी जीवित रहता है। इस मेंढक का नाम वुड फ्रॉग है। वुड फ्रॉग की अनोखी क्षमता जानकर दुनिया हैरान रह जाती है।

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वुड फ्रॉग (फोटो साभार- iStock)

Ajab Gajab News: बरसात के दिनों में आपने भी मेंढक को टर्र-टर्र करते देखा होगा। आपको मेंढक यहां से वहां उछल-कूद करते दिखते होंगे।अगर हम आपको बताएं कि धरती पर एक बेहद ही अनोखा मेंढक पाया जाता है, जो बर्फ में जमने के बाद भी जिंदा रहता है। सबसे हैरान करने वाली बात है कि बर्फ में जमने के दौरान इस मेंढक की दिल की धड़कन रुक जाती है। इसके अलावा यह मेंढक सांस लेना भी बंद कर देता है। इसके बाद भी वह तापमान बढ़ते ही पहले की तरह नॉर्मल हो जाता है।

धरती पर पाया जाता है बर्फ में जमने वाला मेंढक

वैसे तो धरती पर मेंढक की 7000 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। अंटार्कटिका के अलावा मेंढक दुनिया के हर महाद्वीप पर पाए जाते हैं। इन 7000 प्रजातियों में से एक मेंढक ऐसा पाया जाता है, जो बर्फ में जमने के बाद भी जीवित रहता है। इस मेंढक का नाम वुड फ्रॉग है। वुड फ्रॉग की अनोखी क्षमता जानकर दुनिया हैरान रह जाती है। बता दें कि उत्तरी ध्रुव के पास जब सर्दियां बेहद कठोर होती हैं और पारा -0°C से काफी नीचे चला जाता है। तब वुड फ्रॉग ऐसी कोई सुरक्षित जगह नहीं ढूंढ पाता, जहां बर्फ न जमी हो। इस वजह से वुड फ्रॉग का शरीर भी पूरी तरह जम जाता है।

जिंदा रहने के लिए खास तैयारी करता है वुड फ्रॉग

अब आप सोच रहे होंगे कि कोई जानवर अगर सीधे बर्फ में जमता है तो यकीनन उसकी मौत हो जाएगी। हालांकि, इसके लिए वुड फ्रॉग एक खास तैयारी करता है। दरअसल, जैसे ही तापमान गिरना शुरू होता है, वुड फ्रॉग का लीवर बड़ी मात्रा में ग्लूकोज बनाने लगता है। यही ग्लूकोज वुड फ्रॉग के खून के जरिए उसकी कोशिकाओं में पहुंचता है। जिस कारण उसकी कोशिकाएं जमने से बच जाती हैं। भले ही बर्फ में जमने के कारण उसके दिल की धड़कन और सांस दोनों रुक जाती हैं और मस्तिष्क की गतिविधियां बंद हो जाती है। लेकिन इस स्थिति में भी यह मेंढक हफ्तों जिंदा रहता है। फिर जब बर्फ पिघलती है तो मेंढक का शरीर भी बाहर से पिघलने लगता है। सबसे पहले उसका दिल धड़कना शुरू होता है और तापमान बढ़ने से ग्लूकोज वापस उसकी कोशिकाओं में चले जाते हैं।

Aditya Sahu
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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