NDA सरकार में दो केंद्रीय मंत्रियों का किसी मुद्दे पर आमने-सामने आना कम ही देखने को मिलता है। शनिवार को, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपने साथी जीतन राम मांझी से इस्तीफ़े की मांग की। यह मांग HAM (सेक्युलर) द्वारा आरक्षण नीति की समीक्षा की बात कहने के बाद की गई, जिससे NDA में दरार की चर्चा शुरू हो गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण-विरोधी प्रदर्शनों के बीच आरक्षण पर बहस फिर से राजनीति के केंद्र में आ गई है।
बिहार के दो नेताओं के बीच यह टकराव इस हफ्ते की शुरुआत में तब शुरू हुआ जब मांझी की पार्टी HAM ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के अंदर SC और ST के लिए सब-कोटा (उप-कोटा) का समर्थन किया। मांझी के बेटे और बिहार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि यह पक्का करने के लिए समीक्षा की जरूरत है कि आरक्षण का फायदा सबसे कमजोर और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे समुदायों तक पहुंचे।
सुमन ने कहा, 'हम आरक्षण खत्म करने की बात नहीं कर रहे हैं। हम आरक्षण को ज़्यादा न्यायपूर्ण और असरदार बनाने की बात कर रहे हैं और यह पक्का करना चाहते हैं कि यह असल में उन लोगों तक पहुंचे जो वंचित हैं।'
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विवाद किस बारे में है?
पासवान की LJP (राम विलास) और HAM(S) दोनों ही बिहार और केंद्र में NDA की सहयोगी पार्टियां हैं। मांझी मुसहर समुदाय से आते हैं, जो सबसे पिछड़े दलित समुदायों में से एक है। HAM का दावा है कि दलित आरक्षण का फायदा कुछ ही समुदायों (जैसे पासवान और रविदास) तक सीमित रहा है, जबकि कई अन्य समुदायों को इसका पर्याप्त लाभ नहीं मिला है।
इस विवाद की जड़ें 2024 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में हैं। उस साल एक अहम फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को SC और ST के भीतर उप-वर्गीकरण (sub-classification) करने की इजाजत दी, ताकि इन समूहों में ज़्यादा पिछड़ी जातियों को भी आरक्षण का फायदा मिल सके। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें आरक्षण के फायदों से सामाजिक और आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को बाहर करने की मांग की गई। इसमें तर्क दिया गया कि SC और ST श्रेणियों के अमीर परिवार आरक्षण के फ़ायदों पर कब्ज़ा कर रहे हैं।
2024 के फैसले का ज़िक्र करते हुए याचिका में कहा गया कि संविधान पीठ के सात जजों में से चार ने इन समूहों पर भी 'क्रीमी लेयर' का सिद्धांत लागू करने का सुझाव दिया था।
'जीतन राम मांझी को पहले इस्तीफ़ा देना चाहिए'
HAM के रुख का जवाब देते हुए चिराग पासवान ने कहा कि अगर पार्टी SC आरक्षण के अंदर सब-कोटा और क्रीमी लेयर चाहती है, तो मांझी और सुमन, जो दोनों मंत्री हैं, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। पासवान ने पत्रकारों से कहा, 'जो लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्रीमी लेयर क्यों नहीं होनी चाहिए, उन्हें पहले आरक्षण का फ़ायदा लेना छोड़ देना चाहिए। अगर जीतन राम मांझी क्रीमी लेयर के कॉन्सेप्ट में यकीन रखते हैं, तो उन्हें पहले इस्तीफा देना चाहिए। उनके बेटे को भी इस्तीफा देना चाहिए।'
पासवान, जिनकी पार्टी ने हमेशा सब-कोटा का विरोध किया है, ने इस बात पर ज़ोर दिया कि SCs के सभी समुदाय एकजुट रहे हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में SC आरक्षण को आर्थिक आधार पर तय करने का कोई प्रावधान नहीं है। अपने विरोध का कारण बताते हुए पासवान ने कहा कि SC आरक्षण के अंदर सब-कोटा या 'क्रीमी लेयर' लागू करने से सामाजिक न्याय का मूल उद्देश्य ही कमजोर हो सकता है।
पासवान ने कहा, 'नहीं तो, जिस तरह से समाज बंटेगा, उससे सामाजिक न्याय की लड़ाई का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। दलितों के साथ भेदभाव जारी रहेगा।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर वे अब भी आर्थिक आधार पर 'क्रीमी लेयर' चाहते हैं, तो उन्हें (मांझी को) सबसे पहले खुद पीछे हटना चाहिए।'
