Power Corridor: इंडियन पुलिस सेवा (IPS) अमित सिंह ने टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के खास कार्यक्रम 'पावर कॉरिडोर' के साथ बातचीत में प्रारंभिक जीवन, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) तक की राह और पुलिस सेवा के अनुभवों को साझा किया। हिंदी मीडियम से परीक्षा पास करने वाले अमित सिंह ने अभ्यर्थियों को सफलता का चार-स्तंभ वाला फॉर्मूला भी बताया और इंटरव्यू से जुड़ी अहम गलतियों से बचने की सलाह दी।
2009 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अमित सिंह जीवन का सबसे बड़ी प्रेरक मंत्र 'चरैवेति चरैवेति' को बताते हैं, जो ऋग्वेद का सूक्त वाक्य है जिसका अर्थ बिना थके, बिना हारे चलते रहना है।
टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की डॉ. रमा सोलंकी के साथ बातचीत में अमित सिंह ने बताया कि मैं इलाहाबाद में पढ़ा लिया और वहां का माहौल स्वतः ही यूपीएससी के प्रति आकर्षण पैदा करता है... माता-पिता हमेशा प्रेरित करते रहे और साथ में तैयारी कर सफल होने वाले लोग भी उत्प्रेरक बने।
'5 साल तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाया'
आईपीएस अमित सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 5 साल तक पढ़ाया, जिसे वे अपना "पहला प्यार" मानते हैं। उनका चयन हायर एजुकेशन (उच्च शिक्षा) में भी हो गया था। इस दौरान, अमित सिंह को एक चुनौती मिली कि तुम सिर्फ पढ़ते और पढ़ाते ही रहोगे, तुमसे यूपीएससी क्रैक नहीं हो पाएगा। तुम्हारे भीतर वो क्षमता नहीं है। इस बात ने उन्हें अंदर तक झगझोर कर रख दिया और उन्हें यूपीएससी निकालने के लिए भी प्रेरित किया। उनका आत्मविश्वास एकदम सातवें आसमान पर पहुंच गया।
उन्होंने आगे बताया कि यूपीएससी क्रैक करने की चुनौती के बाद उन्होंने पूरी तरह खुद को सिविल सर्विसेज के लिए केंद्रिया किया और परीक्षा पास की।
'हिंदी मीडियम से दी थी परीक्षा'
उन्होंने बताया कि मैंने हिंदी मीडियम से परीक्षा दी थी। शुरुआत में मेरे सीनियर्स कहते थे कि हिंदी मीडियम से यूपीएससी पास करना असंभव है और यदि कोई कर ले तो उसे जीते-जी मोक्ष मिल जाएगा तो मैंने हिंदी मीडियम से तैयारी की। उन्होंने कहा कि 2009 में इलाहाबाद से हिंदी मीडियम के अधिकांश लोग सफल हुए और हमने इस नकारात्मकता को दूर किया। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी भाषा में आपकी पकड़ है और आप अच्छा लिखते-पढ़ते हैं तो यूपीएससी आपको जरूर सलेक्ट करेगी।
यहां देखें पूरा इंटरव्यू:
भाषा रुकावट नहीं
बकौल अमित सिंह, अगर आपकी अभिव्यक्ति, लेखन और बोलने की कला अच्छी है, तो भाषा कभी सफलता में बाधा नहीं बनती है। उन्होंने कहा कि हिंदी के साहित्य, समाचार पत्रों का संपादकीय रोजाना पढ़ें। इससे आपको नए शब्द मिलेंगे जिसका आप इस्तेमाल कर सकेंगे।
IPS अधिकारी ने छात्रों को दिया अहम सुझाव
शब्दावली और व्याकरण: शब्दों की अच्छी पकड़, समृद्ध शब्दावली और सही व्याकरण (कहां कॉमा, पूर्णविराम या अर्धविराम लगाना है) का ज्ञान होना चाहिए।
साहित्य और संपादकीय पढ़ना: हिंदी के अच्छे साहित्य और समाचार पत्रों के 'संपादकीय' को रोजाना पढ़ें और नए शब्दों को अपने रोजमर्रा के शब्दकोश में शामिल करें।
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चार स्तंभों वाला फार्मूला
अमित सिंह ने आगे अभ्यर्थियों को चार स्तंभों वाला फार्मूला सुझाया। उन्होंने कहा कि यूपीएससी पास करने के लिए इन चारों को एक साथ अपनाना जरूरी है जिनमें पढ़ना, लिखना, रिवीजन और डिस्कसन करना शामिल है।
IPS Amit Singh
इंटरव्यू में काफी डरे हुए थे अमित सिंह
आईपीएस अमित सिंह ने कहा कि मेरा इंटरव्यू 13 अप्रैल 2009 को आई.एम.जी. खान साहब के बोर्ड में था। उस वक्त मैं बहुत हरा हुआ था। वह मेरा पहला इंटरव्यू था। उन्होंने कहा, ''उस वक्त जितने प्रश्न पूछे जा रहे थे। मैं उन्हें तैयार करके रखा था कि यह सवाल मुझसे पूछे जा सकते हैं।''
इस दौरान, उन्होंने इंटरव्यू में पूछे गए सवाल का भी जिक्र किया। उस वक्त उनसे पूछा गया था कि ये बताइये आपके इलाके में खेलकूद का विकास क्यों नहीं हो रहा है? इस पर उन्होंने कहा कि उनके इलाके में बचपन से सिखाया जाता है- 'खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब, पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब।' इस पर बोर्ड मुस्कुराया और पूछा- 'अच्छा, तो आप नवाब बनना चाहते हैं?'
इंटरव्यू में किन चीजों का रखें ख्याल
उन्होंने कहा कि इंटरव्यू के डूज और डोंट्स बहुत स्पष्ट है। जो आपको नहीं आता है आप सॉरी बोल दीजिए। हम जब इंटरव्यू बोर्ड के सामने यह सोच कर जाते हैं कि सब बताना है और सब बताने की साइकोलॉजी ब्लंडर कराती है। इंटरव्यू बोर्ड यह देखना चाहता है कि अपनी कमियों या अज्ञानता के प्रति आपका रवैया कैसा है।
