फ्रांस में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां एक जोड़े पर अपनी 15 साल की बेटी को वर्जिनिटी टेस्ट (कुंवारी होने की जांच) कराने के लिए मजबूर करने की कोशिश करने का मुकदमा चला।मार्च 2025 में, जब माता-पिता को पता चला कि उनकी बेटी का एक बॉयफ्रेंड है, तो पिता बहुत गुस्सा हुए। उन्होंने लड़की को कई बार थप्पड़ मारे। फिर दोनों माता-पिता ने फैसला किया कि वे उसे एक स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) के पास ले जाएंगे ताकि यह पता चल सके कि क्या वह यौन रूप से सक्रिय है।
वे कहते रहे कि वे सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि सब ठीक है और कोई समस्या तो नहीं है। मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक लड़की ने अदालत में बताया कि जब उसे यह बात पता चली, तो उसे इतना डर लगा कि वह पैनिक अटैक में बेहोश हो गई। फ्रांस में वर्जिनिटी टेस्ट पूरी तरह से अवैध है। यह न सिर्फ अवैज्ञानिक है, बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन भी माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और फ्रांसीसी सरकार दोनों इसे गलत और हानिकारक बताते हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी 2020 में इसे सख्ती से निंदा की थी।
माता-पिता दोनों को मिली सजा
डॉक्टर ने भी इस टेस्ट को करने से इनकार कर दिया। ला रोश-सुर-योन शहर की अदालत में सुनवाई हुई। पब्लिक प्रॉसीक्यूटर सारा हुएट ने कहा कि सिर्फ इरादा ही काफी है अपराध साबित करने के लिए भले ही टेस्ट हुआ ही न हो। मां को नाबालिग को वर्जिनिटी साबित करने के लिए जांच में शामिल होने के लिए उकसाने के आरोप में 3 महीने की निलंबित जेल (सस्पेंडेड सेंटेंस) हुई। पिता (जो पेशे से बॉक्सर हैं) पर वही आरोप के अलावा माता-पिता के कर्तव्य न निभाने और बिना चोट पहुंचाए हिंसा का भी आरोप लगा। उन्हें 6 महीने की निलंबित जेल और 2 साल की परिवीक्षा (प्रोबेशन) हुई।
मां ने अदालत में कहा कि वे आपा खो बैठे थे क्योंकि बेटी चीजें छिपा रही थी और वे उस पर भरोसा करते थे। पिता ने भी कहा कि यह सिर्फ सामान्य चेकअप था।यह मामला दिखाता है कि फ्रांस में लड़कियों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा के लिए कानून कितने सख्त हैं। वर्जिनिटी टेस्ट जैसी पुरानी और गलत प्रथा अब बर्दाश्त नहीं की जाती। यह घटना समाज में लड़कियों के साथ होने वाले दबाव और हिंसा के खिलाफ एक बड़ा संदेश है।
