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भारतीय रेलवे की बड़ी कामयाबी: दौड़ी देश की पहली 1.3 किमी लंबी डबल-स्टैक फ्रेट ट्रेन, एक साथ ढोई 360 कंटेनर!

Double Stack Container Train: भारतीय रेलवे ने मुंबई (जेएनपीटी) से गुजरात तक 1.3 किमी लंबी पहली डबल-स्टैक मालगाड़ी चलाकर इतिहास रचा। 360 कंटेनर ले जाने वाली यह इलेक्ट्रिक ट्रेन पर्यावरण-अनुकूल और तेज माल ढुलाई सुनिश्चित करेगी।

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पर्यावरण और रफ्तार की नई क्रांति: 360 कंटेनर लेकर पटरियों पर उतरी देश की सबसे शक्तिशाली मालगाड़ी! (तस्वीर-X)

Double Stack Container Train : भारतीय रेलवे ने पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ माल ढुलाई के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रेलवे ने मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) से गुजरात के वडोदरा मंडल में स्थित वर्नामा तक पहली लंबी दूरी की डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन का सफलतापूर्वक परिचालन किया है। इस विशेष मालगाड़ी की कुल लंबाई करीब 1.3 किलोमीटर थी, जो आधुनिक रेल परिवहन के क्षेत्र में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यह मालगाड़ी 21 अगस्त की शाम करीब 7 बजे जेएनपीटी बंदरगाह से रवाना हुई थी। कुल 360 कंटेनरों को एक साथ लादकर यह ट्रेन करीब 422 किलोमीटर का सफर तय करके अपने गंतव्य वर्नामा पहुंची।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर इस ट्रेन की यात्रा का एक वीडियो साझा करते हुए इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने लिखा कि पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे (वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) पर मुंबई के जेएनपीटी से गुजरात के बड़ोदरा तक जाने वाली यह पहली लंबी दूरी की डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन है।

क्या होती है डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन और कैसे काम करती है?

डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन माल ढुलाई के लिए तैयार की गई एक विशेष प्रकार की मालगाड़ी होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रेल के एक डिब्बे यानी वैगन के ऊपर दूसरे कंटेनर को रखा जाता है। इस तरह दो परतों (लेयर्स) में माल लोड करने से एक ही ट्रेन में सामान्य मालगाड़ी की तुलना में दोगुना सामान आसानी से ले जाया जा सकता है। कम समय और सीमित संसाधनों में अधिक से अधिक सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है। 1.3 किलोमीटर लंबी इस ट्रेन में 360 कंटेनर लादे गए थे, जो आमतौर पर दो अलग-अलग मालगाड़ियों में आते हैं।

बंदरगाहों पर भीड़ से राहत और माल ढुलाई में तेजी

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, एक ही ट्रेन के जरिए अधिक संख्या में कंटेनरों को गंतव्य तक भेजने से बंदरगाहों (पोर्ट्स) और रेलवे टर्मिनलों का कामकाज काफी आसान हो जाएगा। आमतौर पर बंदरगाहों पर कंटेनरों को आगे भेजने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे वहां माल का भारी जमावड़ा हो जाता है। अब इतनी बड़ी क्षमता वाली मालगाड़ी के चलने से बंदरगाहों पर कंटेनरों के रुके रहने का समय (ड्वेल टाइम) काफी घट जाएगा। इससे टर्मिनलों पर लगने वाली भीड़ कम होगी और विदेशों से आने वाले या बाहर भेजे जाने वाले सामान को जल्दी से जल्दी रवाना किया जा सकेगा।

रेल नेटवर्क की क्षमता का बेहतर उपयोग

रेलवे का कहना है कि इस नई व्यवस्था से भारतीय रेल के ट्रैक नेटवर्क की कार्यक्षमता में बड़ा सुधार होगा। पहले जितने सामान को ले जाने के लिए दो या तीन अलग-अलग मालगाड़ियों को चलाने की आवश्यकता पड़ती थी, उतना माल अब एक ही डबल-स्टैक ट्रेन से भेजा जा सकेगा। कम संख्या में ट्रेनें चलाने से रेल मार्गों पर दबाव कम होगा और ट्रैक की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा। इससे अन्य यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के समयबद्ध परिचालन के लिए भी पटरियों पर पर्याप्त जगह उपलब्ध हो सकेगी।

हरित परिवहन और कम कार्बन उत्सर्जन की दिशा में बड़ा कदम

इस लंबी मालगाड़ी का परिचालन केवल व्यापारिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी एक बड़ी क्रांति है। यह ट्रेन पूरी तरह से बिजली (इलेक्ट्रिक) से चलती है। भारतीय रेलवे का यह प्रयास हरित और टिकाऊ माल परिवहन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को साफ तौर पर दर्शाता है। सड़क मार्ग की तुलना में यह प्रणाली बहुत अधिक पर्यावरण-अनुकूल है। एक लंबी डबल-स्टैक ट्रेन जितना सामान ले जाती है, उसे सड़कों के जरिए भेजने के लिए सैकड़ों डीजल चालित ट्रकों की जरुरत पड़ती है।

सड़क हादसों और प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति

जब माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा रेल मार्ग पर स्थानांतरित होगा, तो सड़कों पर चलने वाले भारी ट्रकों की संख्या में भारी कमी आएगी। इससे सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत मिलेगी और सड़क दुर्घटनाओं के खतरे में भी कमी आएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डीजल ट्रकों पर निर्भरता कम होने से ईंधन की बड़ी बचत होगी। इससे वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएं और कार्बन उत्सर्जन में भारी गिरावट आएगी, जो देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में बेहद मददगार साबित होगा।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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