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Viral News: 150 साल बाद लाइब्रेरी लौटी किताब, जुर्माना पहुंचा करीब 19 लाख रुपये

ऑस्ट्रेलिया की कियामा लाइब्रेरी में करीब 150 साल बाद एक उधार ली गई किताब वापस लौटी। पुराने नियमों के अनुसार इस पर लगभग 19 लाख रुपये का जुर्माना बनता है।

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सांकेतिक तस्वीर (Image Credit- iStock)

Viral News: दुनिया में कई बार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। इन दिनों ऑस्ट्रेलिया से एक ऐसी ही अनोखी खबर सोशल मीडिया (Social Media) पर खूब चर्चा में है। यहां एक लाइब्रेरी की किताब करीब 150 साल बाद वापस लौटी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अगर उस पर जुर्माना वसूला जाता, तो उसकी रकम लगभग 19 लाख रुपये होती।

डेढ़ सौ साल तक गायब रही किताब

यह अनोखा मामला ऑस्ट्रेलिया के समुद्र किनारे बसे कियामा (Kiama) शहर की एक पब्लिक लाइब्रेरी का है। लाइब्रेरी से ली गई किताब का नाम "Antiquities of Athens" है, जो साल 1858 में प्रकाशित हुई थी। यह किताब लाइब्रेरी खुलने के शुरुआती वर्षों में किसी ने उधार ली थी, लेकिन फिर कभी लौटाई नहीं गई।

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चिमनी में छिपी मिली 150 साल पुरानी किताब

करीब डेढ़ सौ साल बाद एक व्यक्ति अपने पुराने घर की मरम्मत कर रहा था। इसी दौरान उसे बंद पड़ी चिमनी के अंदर एक पुराना चाय का बक्सा मिला। जब उसने बक्सा खोला, तो उसके अंदर यही ऐतिहासिक किताब रखी हुई थी। किताब काफी पुरानी हो चुकी थी और नमी की वजह से कुछ हिस्से खराब भी हो गए थे, लेकिन फिर भी उसे आसानी से पहचाना जा सकता था।

Book Returned After 150 Years in Kiama Library Australia

सांकेतिक तस्वीर (Image Credit- iStock)

150 साल बाद वापस आई किताब

जब वह व्यक्ति किताब लेकर लाइब्रेरी पहुंचा, तो वहां के कर्मचारी भी हैरान रह गए। लाइब्रेरी मैनेजमेंट ने बताया कि उनके इतिहास में पहली बार इतनी पुरानी किताब वापस आई है। आमतौर पर लोग कुछ साल या कुछ दशक बाद किताबें लौटाते हैं, लेकिन 150 साल बाद किताब लौटने का यह शायद सबसे अनोखा मामला है।

Kiama Library Book Return

सांकेतिक तस्वीर (Image Credit- iStock)

इतनी लेट लौटी किताब कि जुर्माना पहुंच गया लाखों में

लाइब्रेरी मैनेजर ने पुराने नियमों के आधार पर हिसाब लगाया तो पता चला कि किताब पर लगने वाला जुर्माना आज की कीमत के हिसाब से लगभग 19 लाख रुपये बनता है। हालांकि, यह जुर्माना किसी से नहीं लिया जाएगा क्योंकि यह पता ही नहीं चल पाया कि इतने साल पहले किताब किस व्यक्ति ने उधार ली थी। उस समय के रिकॉर्ड भी अब उपलब्ध नहीं हैं। अब इस ऐतिहासिक किताब को दोबारा उधार नहीं दिया जाएगा। लाइब्रेरी ने फैसला किया है कि इसे अपनी स्थानीय इतिहास प्रदर्शनी में रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस अनोखी कहानी को जान सकें।

Pankaj Yadav
पंकज यादवauthor

पंकज यादव टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वायरल और ट्रेंडिंग कंटेंट तैयार करते हैं। कंटेंट राइटिंग में 6 वर्षों का अनुभव रखने वाले पंकज सोशल मीडिया ट्रेंड्स, ह्यूमन इंटरेस्ट और ऑफबीट न्यूज दिलचस्प और यूजर-फ्रेंडली अंदाज में लिखने में माहिर हैं और अबतक आठ हजार से अधिक कंटेंट प्रकाशित कर चुके हैं।

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