Ram Mandir: राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी केस की सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में 25 सितंबर को चार्जशीट दाखिल होगी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपपत्र की प्रति मांगी। अब अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी। एसआईटी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्राप्त चढ़ावे और दान को कथित तौर पर अनधिकृत रूप से निकालने और गबन करने के आरोपों की जांच की है। इस मामले में 25 जून 2026 को थाना राम जन्मभूमि, अयोध्या में FIR दर्ज की गई थी। FIR में 8 आरोपियों को नामजद किया गया।
शुरुआत में जांच अयोध्या के सर्किल ऑफिसर ने की थी। जांच में CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, तलाशी और बरामदगी, बैंक/वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति संबंधी दस्तावेज, मोबाइल डेटा, CDR और फॉरेंसिक जांच समेत कई तरह के साक्ष्य जुटाए गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित SIT अब जांच की निगरानी कर रही है।
फॉरेंसिक ऑडिट में क्या सामने आया?
ASA & Associates LLP को फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया गया है और वह SIT के साथ मिलकर वित्तीय एवं अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रही है। फॉरेंसिक ऑडिट का दायरा बढ़ाकर इसमें संबंधित लोगों के बैंक खातों की जांच, कीमती वस्तुओं का फिजिकल वेरिफिकेशन, CCTV फुटेज की जांच, आरोपियों के मोबाइल डेटा का फॉरेंसिक विश्लेषण, दान प्राप्त करने और जमा करने की SOP की जांच, ट्रस्ट के बैंक खातों में ऑनलाइन जमा की जांच, और ऑडिटेड वित्तीय स्टेटमेंट के साथ रिकॉर्ड का मिलान शामिल किया गया।
CCTV जांच में 105 मामले सामने आए
SIT के मुताबिक PFC बिल्डिंग के काउंटिंग रूम की CCTV फुटेज की विस्तृत जांच की गई। CCTV जांच में 105 ऐसे मामले सामने आए जिनमें काउंटिंग रूम से नकदी को कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से निकालने या छिपाने की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक इन घटनाओं में काउंटिंग प्रक्रिया में शामिल अन्य व्यक्तियों से सहायता मिलने की बात भी सामने आई। SIT ने 8 आरोपियों की पहचान से संबंधित CCTV और अन्य सामग्री का विश्लेषण किया है। आरोपियों के खातों में अस्पष्ट जमा राशि और कथित तौर पर चोरी के पैसे से खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों का भी विवरण रिपोर्ट में है।
803 कीमती वस्तुओं का रिकॉर्ड सही मिला
TCS सॉफ्टवेयर से तैयार 803 कीमती वस्तुओं की रसीदों का सत्यापन किया गया। इन वस्तुओं के रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास पाए गए और वस्तुएं SBI लॉकर में रखी हुई थीं। इन 803 वस्तुओं के सत्यापन में कोई विसंगति नहीं मिली। 86 कीमती वस्तुओं की रसीद नहीं क्योंकि इन 86 कीमती वस्तुओं के संबंध में रसीद जारी नहीं की गई थी। इन 86 वस्तुओं की अलग से पहचान और फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया।
करीब 944 किलो सफेद धातु
ट्रस्ट ने लगभग 944.411 किलोग्राम सफेद धातु, जिसे चांदी माना गया है, को पिघलाने के लिए सेक्युरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को भेजा था। SIT ने इससे संबंधित रिपोर्ट और रिकॉर्ड की भी जांच की।
सोशल मीडिया/मीडिया में सामने आए चढ़ावे के आरोपों की जांच
SIT ने मीडिया और सोशल मीडिया में सामने आए कई आरोपों की भी जांच की, जिनमें 200 किलो चांदी की ईंटें, चांदी का हार, चरण पादुका, रामचरितमानस से संबंधित दान शामिल थे। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक इन मामलों में सत्यापन के दौरान कोई विसंगति नहीं मिली। संबंधित लोगों से पूछताछ और उपलब्ध सामग्री की जांच की गई।
173 गवाहों के बयान हुए दर्ज
14 सितंबर 2026 तक 173 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके थे। इनमें ट्रस्ट के पदाधिकारी, अकाउंटिंग स्टाफ, बैंक अधिकारी, सुरक्षा कर्मी, CCTV ऑपरेटर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वेंडर और संपत्ति लेनदेन से जुड़े लोग शामिल हैं।
SIT जांच लगभग पूरी हुई, चार्जशीट दो दिन में
SIT ने CCTV, बैंक और वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति एवं वाहन रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, CDR, गवाहों के बयान, फॉरेंसिक जांच और फॉरेंसिक ऑडिट सहित कई स्रोतों से साक्ष्य जुटाए हैं। कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है। BNSS की धारा 193 के तहत पुलिस रिपोर्ट/चार्जशीट सक्षम अदालत में दाखिल की जाएगी। यूपी की ओर से पेश महाधिवक्ता तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जांच पूरी हो चुकी है। SIT 25 सितंबर 2026 या उससे पहले चार्जशीट दाखिल करने की इच्छुक है।यह तारीख पहली गिरफ्तारी से 90 दिन पूरे होने से पहले की है।
सुप्रीम कोर्ट खुद चार्जशीट देखेगा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह चार्जशीट की कॉपी मंगाकर उसके कंटेंट की जांच करना चाहता है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके किसी आदेश से जूरिस्डिक्शनल/ट्रायल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से असर नहीं पड़ेगा। याचिकाकर्ता या अन्य जनहित से जुड़े लोग SIT के सामने अन्य मुद्दे उठा सकते हैं, ताकि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश/स्पेशल जज, BNSS की धारा 193(9) को ध्यान में रखते हुए, उचित निर्देश जारी कर सके।
