वायरल न्यूज़

Ajab Gajab: अलीगढ़ का लंगूर 'गोलू द गार्ड' डीएस कॉलेज से हुआ आजाद, अब नहीं करेगा सरकारी ड्यूटी, जानें पूरा मामला

Ajab Gajab: अलीगढ़ डीएस कॉलेज से लंगूर 'गोलू द गार्ड' को करीब दो साल बाद आजाद कर दिया गया। गोलू को कॉलेज में बंदरों को भगाने के लिए लाया गया था।

Image

दो साल बाद आजाद हुआ लंगूर गोलू

Ajab Gajab: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां धर्म समाज महाविद्यालय (डीएस कॉलेज) में पिछले दो साल से ड्यूटी कर रहे 'लंगूर (Langur) गोलू द गार्ड' को आजाद कर दिया गया है। अब गोलू किसी ड्यूटी या फिर सैलरी के बंधन में नहीं रहेगा और ना ही उसे सुबह 8 बजे से शाम पांच बजे तक ड्यूटी करनी पड़ेगी। ये बात सुनकर आपको भी अजीब लग रहा होगा या हो सकता है कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा होगा कि ये माजरा क्या है, तो आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है और क्यों यह लंगूर चर्चा में है...

    दरअसल, डीएस कॉलेज के अंदर काफी लंबे समय से बंदरों का आतंक मचा हुआ था। इस समस्या से छात्र,शिक्षक और कॉलेज प्रशासन काफी परेशान थे। क्योंकि, बंदर उन सबका कभी खान छीन लेता था, तो कभी लोगों पर हमला कर देता था। इतना ही नहीं क्लासरूम के अंदर घुसकर किताब-कॉपियों को भी काफी नुकसान पहुंचाता था। आलम ये था कि लोग बंदर के डर के साए में रहने लगे। लिहाजा, करीब दो साल पहले कॉलेज प्रशासन ने एक अनोखा कदम उठाया और बंदरों को भगाने के लिए कॉलेज के अंदर एक लंगूर को लाया गया। यह लंगूर पूरी तरह से प्रशिक्षित था। छात्रों ने प्यार से उस लंगूर का नाम गोलू रख दिया। परिणाम ये हुआ कि लंगूर कॉलेज के अंदर 'गोलू द गार्ड ' नाम से फेमस हो गया। आपको जानकर हैरानी होगी कि गोलू को 12 हजार रुपए मासिक वेतन पर रखा गया था और उसकी ड्यूटी सुबह 8 बजे से शाम पांच बजे तक रहती थी। परिणाम ये हुआ कि कुछ ही समय बाद बंदर वहां से भाग निकले। धीरे-धीरे कॉलेज परिसर के अंदर से बंदरों का आतंक खत्म हो गया। इस दौरान छात्र गोलू से काफी घुलमिल गए थे और उसके साथ फोटो भी खिंचवाते थे।

    ड्यूटी से आजाद हुआ 'गोलू द गार्ड'

    लेकिन, अब गोलू को ड्यूटी से आजाद कर दिया गया है। बल्कि, वह स्वाभाविक तरीके से परिसर में ही रह सकेगा। शहर वन प्रभारी पुत्तन सिंह ने बताया कि वन्यजीवों को कृत्रिम रूप से नियंत्रित या बंधन में रखना उचित नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए ‘गोलू’ को उसके प्राकृतिक परिवेश में लौटाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि कॉलेज परिसर का वातावरण उसके लिए पहले से अनुकूल है, इसलिए उसे वहीं सुरक्षित रूप से रिलीज किया गया है। फिलहाल कॉलेज प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त निगरानी में स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

    Kaushlendra Pathak
    कौशलेंद्र पाठकauthor

    कौशलेंद्र पाठक टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वायरल सेक्शन के लीड के रूप में कार्यरत हैं। मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद उनका सफर ग्राउंड रिपोर्टिंग से डिजिटल डेस्क तक फैला, जहां उन्होंने कंटेंट की विविध शैलियों को नजदीक से समझा। अजब-गजब, अनोखी, सोशल और ट्रेंडिंग कंटेंट पर उनकी गहरी पकड़ और तेज न्यूज सेंस ने उन्हें डिजिटल दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई। वायरल सेक्शन के लीड के रूप में कौशलेंद्र का ध्यान हमेशा ऐसे कंटेंट पर रहता है जो रीडर्स को नई, दिलचस्प और अनजानी कहानियों से रूबरू कराए—हर बार कुछ अलग, कुछ नया।

    और पढ़ें
    End of Article