सऊदी अरब की एक गुफा में वैज्ञानिकों को ऐसी खोज मिली है, जिसने सबको चौंका दिया है। यहां प्राकृतिक रूप से ममीकृत चीते पाए गए हैं, जो करीब 2,000 साल पुराने हैं। इस खोज से यह साफ हो गया है कि चीते पहले सिर्फ खुले मैदानों में नहीं रहते थे, बल्कि रेगिस्तान की तेज़ गर्मी से बचने के लिए गुफाओं को अपना स्थायी घर बनाते थे। यह खोज साल 2022 में हुई थी। सऊदी अरब के राष्ट्रीय वन्यजीव केंद्र के साथ काम कर रहे वैज्ञानिक चमगादड़ों, कीड़ों और दूसरी जैव विविधता का अध्ययन करने के लिए गुफाओं का सर्वे कर रहे थे।
4,000 साल पुराने
एक खास गुफा तक पहुंचने के लिए टीम को करीब 50 फीट नीचे उतरना पड़ा। जब वे अंदर पहुंचे तो उन्हें वहां सात ममीकृत चीते मिले। गुफा का सूखा और ठंडा वातावरण उनकी त्वचा और दांतों को अब तक सुरक्षित रखे हुए था। इसके बाद जब और जांच की गई, तो पता चला कि वहां सिर्फ सात ही नहीं, बल्कि 50 से ज्यादा चीतों के कंकाल भी मौजूद हैं। इनमें से कुछ करीब 4,000 साल पुराने बताए गए हैं। वैज्ञानिकों को गुफा के अंदर चीते की बीट और शिकार की हड्डियां भी मिलीं। इससे यह साबित हुआ कि चीते वहां बस यूं ही नहीं आए थे, बल्कि कई पीढ़ियों तक वहीं रहते थे और शिकार भी वहीं लाते थे।
उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में करीब 400 चीते
वैज्ञानिकों ने ममीकृत चीतों से डीएनए भी निकाला। यह बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। जांच में पता चला कि पुराने अरब चीते, आज के एशियाई और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीकी चीतों से मिलते-जुलते थे। सऊदी अरब में चीते 1970 के दशक में खत्म हो चुके थे, इसलिए यह जानकारी उनके संरक्षण के लिए बहुत जरूरी है। पहले माना जाता था कि सऊदी अरब में सिर्फ एशियाई चीते पाए जाते थे, लेकिन अब नई खोज से उम्मीद बनी है कि अफ्रीकी चीते भी यहां दोबारा बसाए जा सकते हैं। आज उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में करीब 400 चीते बचे हैं, जिनमें से कुछ को सुरक्षित जगहों पर पाला जाता है।
सऊदी सरकार भी पहले से तैयारी कर रही है। वे पर्यावरण सुधार रहे हैं, ओरिक्स और हिरण जैसे जानवरों की संख्या बढ़ा रहे हैं और सुरक्षित क्षेत्र बना रहे हैं, ताकि भविष्य में चीते वापस लाए जा सकें। वैज्ञानिकों का कहना है कि चीते खुले और सूखे इलाकों में रहना पसंद करते हैं, जो सऊदी अरब में मौजूद हैं। हालांकि उन्हें दोबारा बसाना आसान नहीं होगा, लेकिन यह खोज बताती है कि अरब के रेगिस्तान कभी चीतों का घर हुआ करते थे और सही योजना से वे फिर लौट सकते हैं।
