Night Safari Lucknow: घूमने-फिरने के दौरान अगर आपको रोमांच की चाह है और जंगल और वन्यजीव आपको आकर्षित करते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है। लखनऊ से आई यह खबर आपके लिए बेहद खास हो सकती है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल्द ही भारत का पहला नाइट सफारी बनने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिल चुकी है। यानी अब यह योजना कागजों से निकलकर जमीन पर उतरने की ओर बढ़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने साफ कहा है कि पर्यावरण से जुड़ी सभी शर्तों का पूरी तरह पालन करना होगा। केंद्रीय सशक्त समिति, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और पर्यावरण मंत्रालय की ओर से तय किए गए नियमों का पालन करना जरूरी होगा। कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस पूरे प्रोजेक्ट की समय-समय पर निगरानी होगी।
कहां बनेगा यह नाइट सफारी
यह नाइट सफारी लखनऊ के कुकरैल रिजर्व वन में बनाया जाएगा। पूरा रिजर्व वन करीब 2,027 हेक्टेयर में फैला है, जिसमें से लगभग 855 हेक्टेयर क्षेत्र में नाइट सफारी और प्राणी उद्यान विकसित किया जाएगा। करीब 1,500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को दो चरणों में पूरा करने की योजना है। कुकरैल पहले से ही मगरमच्छ संरक्षण केंद्र के लिए जाना जाता है और यहां कई तरह के पक्षी और वन्यजीव भी पाए जाते हैं।
नाइट सफारी में क्या होगा खास
कई वन्यजीव ऐसे होते हैं जो रात में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। सामान्य चिड़ियाघर में ज्यादातर जानवर दिन के समय दिखाई देते हैं, लेकिन नाइट सफारी का मकसद लोगों को रात में दिखने वाले जानवरों को उनके प्राकृतिक व्यवहार के साथ देखने का मौका देना है। यानी यहां आने वाले पर्यटक रात के समय जंगल का अलग ही रोमांच महसूस कर सकेंगे और जानवरों को उनकी स्वाभाविक गतिविधियों के दौरान देख पाएंगे।
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पर्यावरण का भी रखा जाएगा पूरा ध्यान
इस प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरण सुरक्षा पर खास जोर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि केवल जरूरत पड़ने पर ही पेड़ काटे जाएंगे। साथ ही, एक पेड़ काटने पर 10 नए पेड़ लगाने होंगे। पहले इस प्रोजेक्ट में ट्राम सेवा जैसी कुछ अतिरिक्त योजनाएं भी थीं, लेकिन पर्यावरण पर असर कम करने के लिए उन्हें हटा दिया गया है।
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पर्यटकों को कैसा मिलेगा अनुभव?
नाइट सफारी को इस तरह तैयार किया जाएगा कि जानवरों को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए कम रोशनी वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि वन्यजीवों पर कम से कम तनाव पड़े। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट की योजना बनाते समय बेंगलुरु के बैनरघट्टा नाइट सफारी जैसे मॉडल से भी प्रेरणा ली गई है।
