Travel Trends: घूमने का प्लान है लेकिन, हर बार छुट्टी का प्लान हमेशा दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, गोवा या जयपुर के आसपास ही रहता है, तो अब तस्वीर बदल रही है। 2026 में लोग मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स से हटकर उन जगहों का रुख कर रहे हैं जो भीड़-भाड़ से दूर छिपे हुए रत्न हों। इसी वजह से अब ओरछा, गोकर्ण, जीरो वैली और तवांग जैसी जगहें सिर्फ विकल्प नहीं रहीं, बल्कि कई यात्रियों की पहली पसंद बन चुकी हैं। ज्यादातर ट्रैवलर्स आगरा, गोवा, हिमाचल और जयपुर जैसी जगहों पर कई बार घूम चुके होते हैं ऐसे में रोमांच की तलाश में वह अब कुछ नया तलाश रहे हैं। कोई ओरछा की ऐतिहासिक गलियों में इतिहास खोज रहा है, तो कोई गोकर्ण के शांत समुद्र तटों पर सुकून ढूंढ रहा है। ऐसे में भारत में Second-City Tourism का ट्रेंड तेजी से पॉपुलर हो रहा है।
क्या है Second-City Tourism?
Second-City Tourism का मतलब है कि लोग फेमस ट्रैवल डेस्टिनेशन के बजाय कम चर्चित शहरों, कस्बों या इलाकों को घूमने के लिए चुन रहे हैं। ये जगहें पूरी तरह अनजान नहीं होतीं, लेकिन अभी भी बड़े टूरिस्ट हब्स जैसी भीड़ और भागदौड़ से दूर होती हैं। उदाहरण के लिए, लोग अब बेंगलुरु की बजाय कूर्ग, सियोल की बजाय बुसान और लिस्बन की बजाय पोर्टो जैसे शहरों को पसंद कर रहे हैं। ऐसे स्थानों पर यात्रा अधिक शांत, सस्ती और स्थानीय संस्कृति से जुड़ी हुई महसूस होती है।
ट्रैवल का नया ट्रेंड (फोटो: canva)
आखिर क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड
भारतीय टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन (IATO) के अध्यक्ष रवि गोसाईं के अनुसार, जो ट्रेंड पहले कुछ अनुभवी यात्रियों तक सीमित था, अब वह बड़े स्तर पर फैल चुका है। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बेहतर कनेक्टिविटी है। आज छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों तक फ्लाइट और सड़क से पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। सोशल मीडिया ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज या तवांग के खूबसूरत नजारों की एक वायरल रील लाखों लोगों को वहां जाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड (फोटो: canva)
लोग अब अनुभव चाहते हैं, सिर्फ टिक मार्क नहीं
मौजूदा समय में यात्रियों की सोच पूरी तरह से बदल चुकी है। अब वे सिर्फ मशहूर जगहों की लिस्ट पूरी नहीं करना चाहते, बल्कि स्थानीय संस्कृति, खानपान, इतिहास और लोगों के साथ जुड़ना चाहते हैं। गोवा, मनाली और अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में बढ़ती भीड़, महंगे होटल और लंबी कतारों ने भी लोगों को नए विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है।
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लोग अब चाहते हैं अनुभव (फोटो: canva)
कौन-कौन सी जगहें बन रही हैं नई पसंद?
मेघालय और अरुणाचल प्रदेश इस ट्रेंड के बड़े उदाहरण हैं। तवांग अपने बौद्ध मठों और शानदार पहाड़ी दृश्यों के लिए मशहूर हो रहा है। वहीं जीरो वैली अपने सीढ़ीनुमा खेतों, अपातानी जनजाति की संस्कृति और प्रसिद्ध म्यूजिक फेस्टिवल के लिए लोगों को आकर्षित कर रही है।
इसके अलावा ओरछा, हम्पी और मांडू जैसे ऐतिहासिक शहर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। यहां इतिहास और वास्तुकला का शानदार मेल देखने को मिलता है, लेकिन जयपुर और आगरा जैसी भारी भीड़ नहीं होती। समुद्र तटों की बात करें तो गोकर्ण को अब गोवा का शांत विकल्प माना जा रहा है। वहीं कूर्ग, ऊटी और मुन्नार की भीड़ से बचना चाहने वालों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बन चुका है।
लोगों की नई पसंद बन रही हैं ये जगहें (फोटो: canva)
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बदल रहा है ट्रैवल का नक्शा
ट्रैवल का नक्शा पूरी तरह से बदल रहा है। मिलेनियल्स और Gen Z इस बदलाव के सबसे बड़े चेहरे हैं। यही पीढ़ी स्पीति में कैंपिंग कर रही है, माजुली जैसे अनोखे द्वीपों तक पहुंच रही है और सोशल मीडिया पर नई जगहों की खोज कर उन्हें शेयर भी कर रही है।
