Chess Village Kerala: घूमने-फिरने के लिए अगर आप किसी यूनीक ट्रैवल डेस्टिनेशन की तलाश में हैं तो केरल का मारोट्टीचाल गांव (Marottichal Village) आपकी ट्रैवल बकेटलिस्ट में शामिल हो सकता है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि किसी गांव की पहचान सिर्फ खूबसूरत नजारों, मंदिरों या झरनों से ही होती है लेकिन, केरल का ये अनोखा गांव आपकी सोच पूरी तरह से बदल देगा। मारोट्टीचाल गांव प्राकृतिक खूबसूरती से ज्यादा उस बदलाव के लिए मशहूर है जिसने तमाम लोगों की जिंदगी बदल दी। एक समय ऐसा भी था जब शराब और जुए की लत ने यहां कई परिवारों को बर्बाद कर दिया था। लेकिन आज वही गांव शतरंज की बिसात पर नई पीढ़ी का भविष्य संवार रहा है।
इस बदलाव की शुरुआत एक साधारण चाय की दुकान और वहां रखे एक शतरंज के बोर्ड से हुई जिसके बारे में बेहद कम लोग जानते हैं। धीरे-धीरे यह खेल पूरे गांव की पहचान बन गई और आज मारोट्टीचाल को लोग 'Chess Village of Kerala' के नाम से जानते हैं।
जब शराब और जुए ने गांव की खुशियां छीन ली थीं
आज जब आप यहां घूमने जाएंगे तो यह गांव आपको बेहद शांत और प्रेरणादायक नजर आएगा। लेकिन, करीब 60 साल पहले इस गांव की तस्वीर बिल्कुल अलग थी। इस गांव के कई लोग शराब और जुए की लत के शिकार थे। हालात ऐसे थे कि परिवार तो टूटने लगे ही थे साथ में घरों की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ने लगी थी। कई लोग अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शराब और जुए में गंवा देते थे जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। महिलाओं को भी इसके चलते सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
ऐसा नहीं है कि गांव के लोग इस लत से बाहर नहीं आना चाहते थे। वह इस समस्या से बाहर निकलना तो चाहते थे, लेकिन किसी को समझ नहीं आ रहा था कि इसकी शुरुआत कैसे की जाए। तभी एक व्यक्ति ने ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे गांव की दिशा ही बदल दी।
शतरंज वाला गांव जिसने इतिहास रचा (फोटो: Pinterset)
एक चाय वाले ने शुरू किया बदलाव
इस कहानी के असली हीरो उन्नी कृष्णन हैं जिनके द्वारा किए गए छोटे से बदलाव ने इतिहास रच दिया। गांव वाले प्यार से उन्नी कृष्णन को मामा कहकर बुलाते हैं। उन्नी कृष्णन जिनकी गांव में एक छोटी-सी चाय की दुकान है उन्होंने देखा कि लोग खाली समय में शराब पीने या जुआ खेलने चले जाते हैं। तब उन्होंने सोचा कि क्यों न लोगों को ऐसा विकल्प दिया जाए, जिसमें मनोरंजन भी हो और दिमाग भी चले।
फिर उन्होंने अपनी चाय की दुकान पर एक शतरंज का बोर्ड रख दिया और लोगों को खेलने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में कुछ ही लोग इससे प्रभावित हुए लेकिन, धीरे-धीरे यह खेल पूरे गांव में फेमस हो गया। अब लोग शाम को शराब की दुकान जाने की बजाय चाय की दुकान पर शतरंज खेलने आने लगे। देखते ही देखते एक बोर्ड कई बोर्डों में बदल गया। फिर घरों, गलियों, सार्वजनिक चौपालों और दुकानों तक शतरंज पहुंच गया।
कैसे शतरंज ने बदल दी पूरे गांव की सोच
मारोट्टीचाल गांव में जो हुआ वो अपने आप में एक मिसाल है। शतरंज सिर्फ एक खेल नहीं है बल्कि यह धैर्य, रणनीति, सोचने की क्षमता और सही समय पर सही फैसला लेने की कला भी सिखाता है। ऐसे में जब लोग रोज शतरंज खेलने लगे तो उनका समय शराब और जुए की जगह इस खेल में बीतने लगा। शराब और जुए की आदत कम होते ही गांव में झगड़े घटने लगे और लोगों के बीच आपसी बातचीत बढ़ने लगी। जब आप यहां घूमने जाएंगे तो देखेंगे कि यहां का नजारा बिल्कुल अलग है।
यहां शतरंज लोगों को जोड़ने का जरिया बन चुका है। अब यहां बच्चे स्कूल के बाद शतरंज खेलते हैं। बुजुर्ग खाली समय में साथी लोगों के साथ मिलकर शतरंज की बाजियां लगाते हैं। दुकानदार ग्राहक कम होने पर शतरंज खेलते दिखाई देते हैं। इसके अलावा शिक्षक और नौकरीपेशा लोग भी मनोरंजन के लिए इस खेल का हिस्सा बनते हैं।
हैरान कर देगी मारोट्टीचाल गांव की कहानी (फोटो: Pinterset)
एशिया रिकॉर्ड से लेकर दुनियाभर में मिली पहचान
ऐसा नहीं है कि इस गांव की खासियत सिर्फ गांव तक ही सीमित है। इस पहल की चर्चा पूरे देश और विदेश तक भी पहुंची है। इस गांव ने तब सुर्खियां बटोरीं जब यहां एक साथ 1,000 से ज्यादा लोगों ने शतरंज खेलकर एशिया स्तर का रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद कई ट्रैवल ब्लॉगर, यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर इस गांव तक पहुंचे। सोशल मीडिया पर भी इसकी कहानी खूब वायरल हुई थी। ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर आकांक्षा मोंगा ने भी अपने दौरे के दौरान इस गांव की कहानी लोगों तक पहुंचाई। उन्होंने बताया कि यहां हर उम्र के लोग शतरंज खेलते दिखाई देते हैं।
क्यों घूमने जाएं मारोट्टीचाल
अगर आप यहां घूमने का प्लान कर रहे हैं तो जान लें कि सिर्फ यहां नजारे ही आपको नहीं मिलेंगे बल्कि प्रेरणा भी मिलेगी। मारोट्टीचाल आपको एक अलग अनुभव देगा जो किसी बीच, हिल स्टेशन या फेमस टूरिस्ट स्पॉट से कहीं ज्यादा बढ़कर है। ऐसा गांव शायद ही कहीं देखने को मिले, जिसने शराब और जुए जैसी बुराइयों को शतरंज से मात दी हो। इसके अलावा असली केरल को करीब से जानने का आपको मौका मिलेगा। यहां के लोग बेहद मिलनसार हैं। अगर आपको शतरंज खेलना आता है तो शायद आप भी किसी स्थानीय खिलाड़ी के साथ एक बाजी खेल सकें।
एक खेल ने बदल दी पूरी बस्ती (फोटो: Pinterset)
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मारोट्टीचाल जाने का प्लान बना रहे हैं तो ये बातें जान लें
केरल के त्रिशूर (Thrissur) जिले में मारोट्टीचाल गांव बसा हुआ है। Thrissur Railway Station इसके निकटतम रेलवे स्टेशन है वहीं Cochin International Airport इसके निकटतम एयरपोर्ट है। सड़क मार्ग से अगर आप यात्रा कर रहे हैं तो जान लें कि त्रिशूर से टैक्सी या बस के जरिए आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। अक्टूबर से फरवरी के बीच यहां घूमने का बेस्ट टाइम है क्योंकि इस समय मौसम सबसे सुहावना और सुखद रहता है। मानसून में भी यह इलाका बेहद खूबसूरत दिखाई देता है ऐसे में बारिश में भी आप यहां घूमने का प्लान कर सकते हैं।
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आसपास क्या-क्या देख सकते हैं
त्रिशूर जिले में कई खूबसूरत झरने हैं जो आपकी ट्रैवल बकेटलिस्ट में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा मंदिरों और प्राकृतिक स्थलों को भी अपनी ट्रिप में शामिल कर सकते हैं। यहां आपको सिर्फ घूमने का अनुभव नहीं मिलेगा, बल्कि एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी भी मिलेगी जो आपको हमेशा याद रहेगी।
