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Explained: iPhone 17 Pro से भी महंगा है BSNL का सैटेलाइट फोन, न कैमरा, न इंटरनेट फिर भी 1.34 लाख रुपये क्यों है कीमत?

BSNL का सैटेलाइट फोन महंगा जरूर है, लेकिन इसकी तुलना किसी प्रीमियम स्मार्टफोन से नहीं की जा सकती। यह उन लोगों और संस्थाओं के लिए बनाया गया है, जिन्हें ऐसे क्षेत्रों में भी भरोसेमंद संचार की जरूरत होती है जहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह नदारद हो।

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BSNL का सैटेलाइट फोन इतना महंगा क्यों है, खरीदना चाहिए या नहीं
Authored by: Pradeep Pandey
Updated Jul 13, 2026, 08:56 IST

भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने हाल ही में एक ऐसा फोन पेश किया है, जिसकी कीमत सुनकर कई लोग हैरान रह गए। इस सैटेलाइट फोन की कीमत 1,34,166 रुपये है, जो Apple के iPhone 17 Pro से भी अधिक है। पहली नजर में यह फोन एक साधारण फीचर फोन जैसा दिखाई देता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर एक पुराने डिजाइन वाला फोन इतने महंगे स्मार्टफोन से भी ज्यादा कीमत पर क्यों बेचा जा रहा है?

दरअसल, BSNL का यह फोन आम स्मार्टफोन नहीं है। इसे मनोरंजन, कैमरा या ऐप्स चलाने के लिए नहीं बनाया गया है, बल्कि यह उन परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया है जहां मोबाइल टावरों का नेटवर्क बिल्कुल नहीं होता। यही वजह है कि इसकी तकनीक, उपयोग और कीमत सामान्य स्मार्टफोन से पूरी तरह अलग है।

क्या है BSNL का सैटेलाइट फोन?

BSNL का यह डिवाइस उसकी ग्लोबल सैटेलाइट फोन सर्विस (GSPS) का हिस्सा है। सामान्य मोबाइल फोन की तरह यह किसी मोबाइल टावर से कनेक्ट नहीं होता, बल्कि सीधे सैटेलाइट से जुड़कर काम करता है। इसकी मदद से ऐसे इलाकों में भी वॉयस कॉल और SMS किए जा सकते हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह गायब हो।

कंपनी के अनुसार, यह फोन रक्षा बलों, समुद्री संचालन, आपदा राहत एजेंसियों, खनन कंपनियों, दूरदराज के औद्योगिक क्षेत्रों, तीर्थ यात्रियों और एडवेंचर ट्रैवलर्स के लिए तैयार किया गया है। प्राकृतिक आपदा या किसी अन्य आपात स्थिति में, जब सामान्य टेलीकॉम नेटवर्क ठप हो जाए, तब भी यह फोन संचार बनाए रखने में सक्षम रहता है।

आखिर इतनी ज्यादा क्यों है इसकी कीमत?

BSNL के सैटेलाइट फोन की ऊंची कीमत का सबसे बड़ा कारण इसकी तकनीक है। जहां एक सामान्य स्मार्टफोन नजदीकी मोबाइल टावर से कनेक्ट होता है, वहीं यह फोन सीधे Inmarsat जैसे वैश्विक सैटेलाइट नेटवर्क से संपर्क स्थापित करता है।

इसके लिए फोन में विशेष प्रकार का हार्डवेयर, हाई-गेन एंटीना और सैटेलाइट कम्युनिकेशन मॉड्यूल लगाए जाते हैं, जिनकी लागत सामान्य स्मार्टफोन के मुकाबले काफी अधिक होती है। इसके अलावा, सैटेलाइट फोन का उत्पादन भी बहुत सीमित संख्या में किया जाता है। कम उत्पादन होने के कारण इसकी निर्माण लागत भी बढ़ जाती है, जिसका असर सीधे इसकी कीमत पर दिखाई देता है।

फोन खरीदने के बाद भी देना होगा भारी खर्च

सिर्फ फोन खरीद लेना ही काफी नहीं है। इस डिवाइस का इस्तेमाल करने के लिए सैटेलाइट कम्युनिकेशन प्लान लेना भी जरूरी होता है, जिसकी कीमत सामान्य मोबाइल रिचार्ज से कई गुना ज्यादा है। सरकार द्वारा जारी टैरिफ के अनुसार, व्यावसायिक ग्राहकों के लिए मासिक प्लान की शुरुआत 5,835 रुपये से होती है, जबकि सरकारी एजेंसियों के लिए शुरुआती प्लान 3,500 रुपये प्रति माह का है।

इन प्लान्स में सीमित फ्री टॉक टाइम मिलता है, जिसके बाद कॉल और SMS के लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। कुल मिलाकर देखें तो यह फोन अपने आप में महंगा है और इसके प्लान भी सेलुलर फोन के प्लान के मुकाबले काफी महंगे हैं। जितने में सेलुलर फोन के एक साल के प्लान आते हैं, उतने में इस सैटेलाइट फोन का एक महीने का प्लान आता है।

Apple के सैटेलाइट फीचर से कितना अलग है BSNL का फोन?

Apple के नए iPhone मॉडल में भी सैटेलाइट आधारित Emergency SOS फीचर मिलता है, लेकिन उसका उद्देश्य पूरी तरह अलग है। यह सुविधा केवल आपातकालीन परिस्थितियों में इस्तेमाल के लिए बनाई गई है, जब मोबाइल नेटवर्क और Wi-Fi दोनों उपलब्ध न हों। इसके जरिए यूजर इमरजेंसी सर्विस से संपर्क कर सकता है या अपनी लोकेशन साझा कर सकता है।

सैटेलाइट फोन कैसे काम करते हैं

सैटेलाइट फोन कैसे काम करते हैं

वहीं BSNL का सैटेलाइट फोन एक समर्पित सैटेलाइट कम्युनिकेशन डिवाइस है। इसमें नियमित रूप से वॉयस कॉल और SMS की सुविधा मिलती है और यह बिना किसी मोबाइल टावर के लगातार काम कर सकता है। यानी जहां iPhone का सैटेलाइट फीचर केवल इमरजेंसी के लिए है, वहीं BSNL का फोन रोजमर्रा के प्रोफेशनल सैटेलाइट संचार के लिए बनाया गया है।

मजबूत डिजाइन और इमरजेंसी फीचर्स

यह फोन कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें मजबूत और टिकाऊ बॉडी, लंबी बैटरी लाइफ, वॉयस कॉलिंग और SOS इमरजेंसी बटन जैसी सुविधाएं दी गई हैं। यही कारण है कि इसे ऊंचे पहाड़ों, समुद्र, जंगलों और दूरदराज के इलाकों में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या कोई भी खरीद सकता है यह फोन?

इस सवाल का जवाब 'नहीं' है। भारत में सैटेलाइट फोन का उपयोग कड़े नियमों के तहत किया जाता है। इसे खरीदने या इस्तेमाल करने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) से पहले अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना सरकारी मंजूरी के सैटेलाइट फोन रखना या उसका उपयोग करना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है, हालांकि BSNL के इस फोन को कोई भी खरीद सकता है लेकिन सरकार खुद इसे बेच रही है।

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