Kailash Mansarovar Yatra: कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। 20 जून को पहला जत्था नाथू ला पास के रास्ते चीन पहुंचा। इस जत्थे में 44 तीर्थयात्री शामिल हैं। इस पवित्र यात्रा का आयोजन भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से चीन सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दो रास्ते तय किए गए हैं। पहला रास्ता उत्तराखंड के लिपुलेख पास से होकर जाता है, जबकि दूसरा रास्ता सिक्किम के नाथू ला पास से है। नाथू ला मार्ग से जाने वाले पहले जत्थे को सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस मौके पर सिक्किम के पर्यटन मंत्री त्शेरिंग थेंडुप भूटिया और सिक्किम पर्यटन विकास निगम के अधिकारी भी मौजूद रहे। इस पहले जत्थे में 32 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल हैं। ये श्रद्धालु बिहार, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे अलग-अलग राज्यों से आए हैं।
कैलाश मानसरोवर को हिंदू और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार, यह भगवान शिव का निवास स्थान है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं। इस यात्रा को सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव भी माना जाता है।
यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को ऊंचाई वाले इलाकों के लिए तैयार करने के लिए खास प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें चार दिन का हाई एल्टीट्यूड अनुकूलन कार्यक्रम शामिल होता है, ताकि यात्री पहाड़ों के मुश्किल मौसम और कम ऑक्सीजन वाले माहौल के लिए खुद को तैयार कर सकें।
कैलाश मानसरोवर यात्रा का खर्च भी अलग-अलग मार्ग के हिसाब से तय किया गया है। लिपुलेख पास वाले रास्ते के लिए प्रति यात्री करीब 2.09 लाख रुपये खर्च आता है, जबकि नाथू ला मार्ग से जाने वालों के लिए यह खर्च करीब 3.31 लाख रुपये है।
इस यात्रा की अहमियत को देखते हुए चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने भी कैलाश की परिक्रमा की और यात्रियों को जरूरी सलाह दी। उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा आसान नहीं है, क्योंकि यह इलाका बहुत ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है। ऐसे में यात्रियों को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए और ऊंचाई से जुड़ी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टरों की मदद लेनी चाहिए।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को चीन में प्रवेश के लिए जरूरी सभी नियम और औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। भारत सरकार ने नाथू ला और लिपुलेख को अस्थायी इमिग्रेशन चेक पोस्ट के तौर पर मान्यता दी है। यात्रियों को अपने साथ करीब 20 किलो तक सामान ले जाने की अनुमति होती है, जिसमें जरूरी दवाइयां और अन्य सामान शामिल हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा कई लोगों के लिए आस्था, विश्वास और आत्मिक शांति से जुड़ा अनुभव है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस यात्रा से उन्हें आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है। हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों के इस पवित्र यात्रा में शामिल होने की उम्मीद है।
