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Explainer: दो दशक बाद इराक से अमेरिका की विदाई, क्या बदलेगा मिडिल ईस्ट का पावर बैलेंस?

दो दशक से अधिक चले इस पूरे सैन्य अभियान में करीब 4,500 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई। इस साल ईरान के साथ जारी युद्ध में भी इराक में तैनात अमेरिकी सैनिकों को नुकसान उठाना पड़ा। जुलाई में एरबिल के पास एक सैन्य अड्डे पर ड्रोन को नियंत्रित तरीके से नष्ट करने के दौरान एक अमेरिकी सेना सार्जेंट की मौत हुई थी।

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ईराक में बदलने जा रहा पावर गेम। (फोटो- AI)
Authored by: शिव शुक्ला
Updated Sep 29, 2026, 23:42 IST
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इराक में दो दशक से ज्यादा समय तक सैन्य मौजूदगी के बाद अमेरिका अपने आखिरी सैन्य ठिकानों से भी सैनिकों की वापसी पूरी करने जा रहा है। 30 सितंबर तक अमेरिकी बलों की इराक से वापसी के साथ उस देश में अमेरिकी सैन्य अभियान का एक बड़ा अध्याय खत्म हो जाएगा। यह वापसी ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच क्षेत्रीय तनाव जारी है। इराक में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी खत्म होने को ईरान और उसके समर्थक गुट अपनी जीत के तौर पर देख रहे हैं।

हालांकि, इराक के कुछ सुरक्षा अधिकारियों और विशेषज्ञों को आशंका है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी से देश में ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों का प्रभाव बढ़ सकता है। साथ ही अमेरिकी खुफिया, ड्रोन और लॉजिस्टिक मदद कम होने से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के स्लीपर सेल को फिर सक्रिय होने का मौका मिलने की चिंता भी जताई जा रही है।

इराक में मारे गए 4500 से ज्यादा अमेरिकी

अमेरिका ने 2003 में इराक पर हमला कर तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सरकार को सत्ता से हटाया था। इसके बाद अमेरिकी सेना ने लंबे समय तक इराक में सैन्य अभियान चलाया और 2011 में अपनी सेना वापस बुला ली थी। लेकिन 2014 में ISIS के तेजी से उभरने के बाद अमेरिकी नेतृत्व वाला गठबंधन दोबारा इराक लौटा। 2014 से 2017 के बीच इराकी सेना को ISIS के खिलाफ लड़ाई में मदद दी गई।

दो दशक से अधिक चले इस पूरे सैन्य अभियान में करीब 4,500 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई। इस साल ईरान के साथ जारी युद्ध में भी इराक में तैनात अमेरिकी सैनिकों को नुकसान उठाना पड़ा। जुलाई में एरबिल के पास एक सैन्य अड्डे पर ड्रोन को नियंत्रित तरीके से नष्ट करने के दौरान एक अमेरिकी सेना सार्जेंट की मौत हुई थी।

ईरान और उसके सहयोगियों के लिए क्यों अहम है वापसी?

इराक लंबे समय से अमेरिका और ईरान दोनों के साथ करीबी राजनीतिक और सैन्य संबंध रखने वाला देश रहा है। इसी वजह से वह कई बार दोनों शक्तियों के बीच तनाव का केंद्र भी बना। इराकी सुरक्षा विश्लेषक जसीम अल-बहादली के मुताबिक, अमेरिकी गठबंधन की विदाई से ईरान को रणनीतिक फायदा मिल सकता है क्योंकि इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी लंबे समय से तेहरान के प्रभाव के लिए एक संतुलन का काम करती थी। ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों ने भी अमेरिकी वापसी को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया है। 'इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक' के कमांडर अबू मुजतबा अल-यासिरी ने इसे इराकी प्रतिरोध समूहों की ऐतिहासिक जीत बताया।

इराक में सुरक्षा को लेकर चिंता

अमेरिकी सैनिकों की वापसी को लेकर इराक में एक राय नहीं है। जहां बड़ी संख्या में लोग इसे देश की संप्रभुता से जोड़कर देखते हैं, वहीं कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों को लगता है कि इराक अभी पूरी तरह अपनी सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए तैयार नहीं है। फल्लूजा के सुन्नी आदिवासी नेता अब्दुलरहमान अल-जुबाई ने कहा कि सभी इराकी पूरी संप्रभुता चाहते हैं, लेकिन इस तरह अमेरिकी गठबंधन के जाने से पैदा होने वाला सुरक्षा खालीपन चिंता का विषय है।

क्या ISIS को फिर मिल सकता है मौका?

अमेरिकी वापसी के साथ सबसे बड़ी सुरक्षा चिंताओं में से एक इस्लामिक स्टेट के स्लीपर सेल को लेकर है। इराक में ISIS का तथाकथित खिलाफत लगभग एक दशक पहले खत्म हो चुका है, लेकिन संगठन के स्लीपर सेल अब भी मौजूद हैं। कुर्द कमांडर सिरवान बरजानी के मुताबिक, अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की वापसी की घोषणा के बाद पिछले दो सप्ताह में ISIS के स्लीपर सेल की गतिविधियों में हलचल देखी गई है। उनके अनुसार अमेरिकी खुफिया जानकारी, ड्रोन और लॉजिस्टिक सपोर्ट की कमी से ISIS को दोबारा संगठित होने का अवसर मिल सकता है।

इराकी सुरक्षा बलों ने यह भी बताया कि एक संदिग्ध ISIS सेल अमेरिकी सैनिकों की वापसी के दौरान आत्मघाती हमले की तैयारी कर रहा था। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, ऐसे हमलों के जरिए संगठन यह संदेश देना चाहता है कि वह अब भी हमले करने की क्षमता रखता है।

2003 से 2026 तक बदलता रहा इराक

अमेरिका ने 2003 में सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाने के लिए इराक में सैन्य हस्तक्षेप किया था। 2011 में अमेरिकी सेना की पहली बड़ी वापसी हुई, लेकिन ISIS के उभार के बाद 2014 में अमेरिकी नेतृत्व वाला गठबंधन फिर इराक पहुंचा। अब सितंबर 2026 के अंत तक आखिरी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से भी वापसी के साथ इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का यह चरण समाप्त हो रहा है। इसके बाद देश की सुरक्षा व्यवस्था, ईरान समर्थित गुटों का प्रभाव और ISIS के स्लीपर सेल से निपटना इराक के लिए प्रमुख चुनौतियों में शामिल रहेगा।
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