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World Tourism Day 2026: घूमने की हमारी चाहत कहीं स्थानीय लोगों पर भारी तो नहीं पड़ रही?

World Tourism Day 2026: हर साल लाखों लोग घूमने निकलते हैं, लेकिन बढ़ती भीड़ का असर उन जगहों पर रहने वाले लोगों की जिंदगी पर भी पड़ता है। विश्व पर्यटन दिवस पर इसी बदलती तस्वीर को यहां समझाया गया है।

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विश्व पर्यटन दिवस (फोटो: AI)

World Tourism Day 2026: हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस (World Tourism Day) मनाया जाता है। इस दिन दुनिया में पर्यटन के आर्थिक और सामाजिक महत्व पर बात होती है। घूमना आज सिर्फ छुट्टी बिताने का तरीका नहीं रह गया है। इससे करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है, होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय कारोबार चलते हैं और कई शहरों की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर टिकी होती है।

लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। किसी जगह पर पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ने लगे तो वहां रहने वाले लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो सकती है। घरों का किराया बढ़ना, ट्रैफिक, पानी की कमी, कचरा और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं। इसी को आम तौर पर ओवरटूरिज्म यानी जरूरत से ज्यादा पर्यटन की समस्या कहा जाता है।

भारत के पहाड़ी शहर भी इसी दबाव से गुजर रहे हैं

यह समस्या सिर्फ विदेश तक सीमित नहीं है। भारत में भी कई लोकप्रिय पहाड़ी शहरों में पर्यटन बढ़ने के साथ स्थानीय समस्याएं दिखाई देती हैं। मसूरी इसका एक उदाहरण है। छुट्टियों और गर्मियों के सीजन में यहां पर्यटकों की भारी भीड़ पहुंचती है। नतीजा यह होता है कि सड़कों पर ट्रैफिक बढ़ जाता है, पार्किंग की समस्या सामने आती है और पानी व कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

स्थानीय लोगों के लिए परेशानी सिर्फ भीड़ तक सीमित नहीं रहती। जिस सड़क पर रोजमर्रा के काम के लिए जाना हो, वहां घंटों ट्रैफिक में फंसना या पानी की सप्लाई प्रभावित होना सीधे उनकी जिंदगी को प्रभावित करता है।

पर्यटन से कमाई और परेशानी, दोनों साथ क्यों बढ़ते हैं?

पर्यटन किसी इलाके की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सहारा बन सकता है। होटल, होमस्टे, टैक्सी, रेस्टोरेंट, दुकानदार, गाइड और स्थानीय कारीगरों को इससे कमाई होती है। समस्या तब शुरू होती है जब पर्यटकों की संख्या बढ़ने की रफ्तार बुनियादी सुविधाओं से कहीं आगे निकल जाती है।

मान लीजिए किसी पहाड़ी शहर में सामान्य दिनों में जितने लोगों के लिए पानी, सड़क और सीवेज सिस्टम बनाया गया है, उससे कई गुना ज्यादा लोग कुछ महीनों के दौरान वहां पहुंच जाएं। ऐसे में सिस्टम पर दबाव आना स्वाभाविक है। यही वजह है कि पर्यटन बढ़ाने के साथ-साथ Infrastructure Development पर भी ध्यान देना जरूरी है।

क्या पर्यटन का मतलब सिर्फ ज्यादा पर्यटक होना है?

यह सवाल आज पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। किसी जगह पर हर साल पर्यटकों की संख्या बढ़ना अपने आप में सफलता का पैमाना नहीं माना जा सकता। अगर पर्यटक बढ़ रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को रहने के लिए घर महंगे मिल रहे हैं, पानी की समस्या बढ़ रही है या प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव पड़ रहा है, तो पर्यटन के मॉडल पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

इसके उलट, अगर स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है, छोटे कारोबार बढ़ते हैं और पर्यटन से मिलने वाली कमाई का हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था में वापस जाता है, तो इसका फायदा ज्यादा व्यापक हो सकता है।

पर्यटकों की भी है कुछ जिम्मेदारी

ओवरटूरिज्म की चर्चा में अक्सर सरकार और प्रशासन की भूमिका की बात होती है, लेकिन पर्यटकों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। जहां जाएं वहां कचरा न फैलाना, पानी बर्बाद न करना, स्थानीय नियमों का पालन करना और स्थानीय कारोबारियों से खरीदारी करना छोटी बातें लग सकती हैं, लेकिन इनका असर पड़ता है। साथ ही, हर लोकप्रिय जगह पर एक ही समय पहुंचने के बजाय कम लोकप्रिय और आसपास के छोटे पर्यटन स्थलों को चुनना भी भीड़ को कम करने में मदद कर सकता है।

विश्व पर्यटन दिवस पर सोचने की जरूरत

विश्व पर्यटन दिवस पर्यटन की उपलब्धियों का जश्न मनाने का अवसर है, लेकिन यह सोचने का मौका भी है कि आने वाले वर्षों में पर्यटन किस दिशा में जाएगा। जरूरत ऐसे मॉडल की है जिसमें पर्यटक घूमने का आनंद ले सकें, स्थानीय लोगों को रोजगार और कारोबार का फायदा मिले और प्राकृतिक संसाधनों पर जरूरत से ज्यादा दबाव न पड़े।

आखिर किसी खूबसूरत जगह की असली खूबसूरती तभी कायम रह सकती है, जब वहां रहने वाले लोगों के लिए भी वह जगह रहने लायक बनी रहे। पर्यटन बढ़ना अच्छी बात हो सकती है, लेकिन उसका फायदा पर्यटक, स्थानीय समुदाय और पर्यावरण तीनों तक पहुंचना ज्यादा जरूरी है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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