यात्रा

गया ही नहीं, देश के इन 7 प्रसिद्ध तीर्थों पर पिंडदान करने से भी पूर्वजों को मिलता है मोक्ष, जानिए जाने का सही समय व ट्रैवल गाइड

Pitru Paksha Pind Daan Places In India: पितृपक्ष के 15 दिनों में लोग पिंडदान करने के लिए गया जाते हैं, लेकिन भारत में गया के अलावा भी कई ऐसे स्थान हैं। जहां पिंडदान से मोक्ष प्राप्त होने की मान्यता है।

Image

किन जगहों पर कर सकते हैं पिंडदान

Pitru Paksha Pind Daan Places In India: साल 2026 में 27 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो गई है। पितृपक्ष में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। बिहार का गया इस कर्म के लिए देश के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में शामिल है, लेकिन ऐसा नहीं है कि पिंडदान के लिए केवल गया ही जाना जरूरी है। देश के कई दूसरे तीर्थ भी पितृकर्म के लिए प्रसिद्ध हैं, जहां नदियों, संगम, सरोवर और प्राचीन तीर्थों के किनारे श्राद्ध-तर्पण की परंपरा रही है।

अगर इस पितृपक्ष आप पिंडदान के साथ तीर्थ यात्रा की भी योजना बना रहे हैं, तो काशी, प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन, कुरुक्षेत्र, बदरीनाथ और पुष्कर जैसे स्थान विकल्प बन सकते हैं। हर जगह का धार्मिक माहौल अलग है और साथ ही यहां घूमने के लिए भी कई प्लेस हैं। इसके साथ ही मान्यता है कि इन जगहों पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है।

काशी, उत्तर प्रदेश

गया के बाद पितृकर्म के लिए काशी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। वाराणसी में पिशाच मोचन कुंड पितृकर्म के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां पिंडदान के साथ त्रिपिंडी श्राद्ध और दूसरे पूर्वज संबंधी अनुष्ठान भी कराए जाते हैं। पिशाच मोचन कुंड काशी के चेतगंज इलाके में है और मुख्य शहर से ऑटो या कैब के जरिए पहुंचा जा सकता है। स्थानीय यात्रा गाइड के अनुसार यह कुंड लहुराबीर इलाके के पास स्थित है।

पिंडदान के बाद काशी की यात्रा को केवल कर्म तक सीमित न रखें। काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा के घाट, दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और गंगा आरती आपकी ट्रिप का हिस्सा हो सकते हैं। वाराणसी में 88 घाट हैं और गंगा किनारे सुबह की नाव यात्रा भी शहर के प्रमुख अनुभवों में शामिल है।

कैसे पहुंचें

वाराणसी हवाई और रेल दोनों मार्गों से देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा है। वाराणसी एयरपोर्ट से शहर पहुंचा जा सकता है। वाराणसी रेलवे स्टेशन से पिशाच मोचन और दूसरे तीर्थस्थलों तक टैक्सी या ऑटो उपलब्ध रहते हैं। पिशाच मोचन में यदि कोई विशेष श्राद्ध या त्रिपिंडी कर्म कराना है तो पहले से स्थानीय आचार्य से विधि और समय तय कर लें। पिंडदान वाले दिन की जल्दबाजी से बचने के लिए कम से कम एक दिन काशी में रुकने की योजना बेहतर रहेगी।

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के कारण प्रयागराज का त्रिवेणी संगम देश के प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है। यहां संगम क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठान और तर्पण किए जाते हैं और पितृकर्म के लिए भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। संगम तक नाव के जरिए जाने की सुविधा उपलब्ध है। प्रयागराज जिला प्रशासन के अनुसार संगम के मध्य तक नाव से जाया जा सकता है, जहां श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

पिंडदान के बाद प्रयागराज घूमने के लिए इलाहाबाद किला, आनंद भवन, बड़े हनुमान मंदिर, अलोपी देवी मंदिर और खुसरो बाग जैसे स्थान शामिल किए जा सकते हैं। धार्मिक यात्रा के साथ शहर का इतिहास और संस्कृति भी इस ट्रिप को खास बनाते हैं।

कैसे पहुंचें

प्रयागराज एयरपोर्ट यानी बमरौली एयरपोर्ट शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर है। रेल से आने वालों के लिए प्रयागराज जंक्शन, प्रयाग स्टेशन और प्रयागराज रामबाग महत्वपूर्ण स्टेशन हैं। संगम क्षेत्र तक स्थानीय टैक्सी, ऑटो और दूसरी स्थानीय परिवहन सेवाओं से पहुंचा जा सकता है। संगम पर पिंडदान का कार्यक्रम बनाते समय नाव की उपलब्धता और नदी के मौसम को ध्यान में रखें। बरसात या नदी का जलस्तर अधिक होने पर घाट और नाव संचालन की स्थानीय स्थिति पहले जांचना ठीक रहेगा।

हरिद्वार, उत्तराखंड

हरिद्वार में गंगा के किनारे नारायणी शिला मंदिर पितृकर्म और पिंडदान के लिए प्रसिद्ध स्थानों में शामिल है। यहां पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण किया जाता है। नारायणी शिला देवपुरा क्षेत्र में, गणेश घाट के आसपास स्थित है और हरिद्वार रेलवे स्टेशन से स्थानीय वाहन के जरिए पहुंचा जा सकता है। अगस्त 2026 में सत्यापित एक स्थानीय यात्रा गाइड के अनुसार यह स्थान रेलवे स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर है।

हरिद्वार पहुंचने के बाद हर की पौड़ी, मनसा देवी मंदिर, चंडी देवी मंदिर और गंगा आरती भी यात्रा में शामिल किए जा सकते हैं। हर की पौड़ी गंगा तट का प्रमुख धार्मिक स्थल है और रेल, सड़क तथा हवाई कनेक्टिविटी के लिहाज से हरिद्वार आसानी से पहुंचा जा सकता है। जॉली ग्रांट एयरपोर्ट करीब 72 किलोमीटर दूर है।

कैसे पहुंचें

हरिद्वार रेलवे स्टेशन देश के कई बड़े शहरों से रेल मार्ग से जुड़ा है। दिल्ली और उत्तर भारत के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग भी सुविधाजनक है। एयर से आने पर देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट सबसे नजदीकी प्रमुख हवाई अड्डा है। पिंडदान और गंगा स्नान दोनों की योजना हो तो सुबह जल्दी निकलना सुविधाजनक रहता है। घाट पर पूजा सामग्री और पुरोहित सेवा लेने से पहले शुल्क और पूजा में शामिल सामग्री की जानकारी स्पष्ट कर लें।

उज्जैन, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश का उज्जैन केवल महाकाल की नगरी ही नहीं, बल्कि पितृकर्म की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान है। शहर में सिद्धवट पिंडदान और तर्पण के लिए प्रसिद्ध है। उज्जैन जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार सिद्धवट को पापमोचन तीर्थ माना जाता है और यहां श्राद्ध, पिंड, तर्पण, पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध जैसे कर्म किए जाते हैं। यह शहर से करीब 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। इसके अलावा रामघाट और क्षिप्रा नदी भी उज्जैन की धार्मिक यात्रा का प्रमुख हिस्सा हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार स्थानीय परंपरा में रामघाट को भगवान राम द्वारा अपने माता-पिता के लिए पिंडदान किए जाने से जोड़ा जाता है। पिंडदान के बाद महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, हरसिद्धि मंदिर, काल भैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर और रामघाट घूम सकते हैं।

कैसे पहुंचें

उज्जैन का अपना रेलवे स्टेशन है और यह कई बड़े शहरों से रेल मार्ग से जुड़ा है। हवाई यात्रा करने वालों के लिए इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट लगभग 53 किलोमीटर दूर है। सड़क मार्ग से भी उज्जैन की कनेक्टिविटी अच्छी है। उज्जैन में पितृकर्म के लिए सिद्धवट और शहर के बाकी धार्मिक स्थलों का कार्यक्रम एक ही दिन में बनाया जा सकता है, लेकिन महाकाल दर्शन की भी योजना है तो ट्रिप में अतिरिक्त समय रखना बेहतर रहेगा।

कुरुक्षेत्र, हरियाणा

महाभारत की भूमि के रूप में प्रसिद्ध कुरुक्षेत्र भी धार्मिक यात्राओं के लिए खास स्थान रखता है। यहां ब्रह्म सरोवर, सन्निहित सरोवर और 48 कोस कुरुक्षेत्र के अनेक तीर्थ धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान रखते हैं। कुरुक्षेत्र जिला प्रशासन की सूची में कई प्राचीन तीर्थों के साथ सरस्वती तीर्थ, विष्णुपद तीर्थ, पृथुदक तीर्थ और दूसरे तीर्थ शामिल हैं।

पितृकर्म की यात्रा में ब्रह्म सरोवर और सन्निहित सरोवर को शामिल किया जा सकता है। ब्रह्म सरोवर को कुरुक्षेत्र का प्रमुख धार्मिक जलाशय माना जाता है। इसके आसपास ज्योतिसर, श्रीकृष्ण संग्रहालय, गीता भवन और विभिन्न मंदिर भी देखे जा सकते हैं।

कैसे पहुंचें

कुरुक्षेत्र जंक्शन से ब्रह्म सरोवर करीब 3.4 किलोमीटर दूर है। बस स्टैंड और आसपास के शहरों से सड़क मार्ग भी उपलब्ध है। ज्योतिसर कुरुक्षेत्र जंक्शन से करीब 8.6 किलोमीटर की दूरी पर है। कुरुक्षेत्र में एक दिन को केवल पिंडदान के लिए और दूसरा दिन धार्मिक पर्यटन के लिए रखने पर यात्रा ज्यादा आराम से पूरी की जा सकती है। ब्रह्म सरोवर और ज्योतिसर को एक ही सर्किट में देखा जा सकता है।

बदरीनाथ, उत्तराखंड

अगर आप पिंडदान के साथ हिमालय की तीर्थ यात्रा करना चाहते हैं तो बदरीनाथ का ब्रह्म कपाल एक महत्वपूर्ण विकल्प है। अलकनंदा नदी के किनारे स्थित ब्रह्म कपाल में पूर्वजों के लिए श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अनुसार ब्रह्म कपाल बदरीनाथ मंदिर के पास स्थित घाट है, जहां दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धांजलि और श्राद्ध कर्म किया जाता है।

पिंडदान के बाद बदरीनाथ मंदिर, ताप्तकुंड, नारद कुंड, माणा गांव, व्यास गुफा और भीम पुल की यात्रा की जा सकती है। बदरीनाथ करीब 3,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और अलकनंदा नदी के किनारे बसा है।

कैसे पहुंचें

बदरीनाथ सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार ऋषिकेश रेलवे स्टेशन और देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट प्रमुख कनेक्टिंग पॉइंट हैं। राज्य पर्यटन पोर्टल बदरीनाथ के लिए यात्रा पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध कराता है। बदरीनाथ की यात्रा साधारण शहरों की यात्रा से अलग है। मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए गर्म कपड़े और जरूरी सामान साथ रखें। उत्तराखंड के आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण और यात्रा संबंधी अपडेट देखकर ही निकलें।

पुष्कर, राजस्थान

राजस्थान के अजमेर जिले के पास बसा पुष्कर धार्मिक पर्यटन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। पुष्कर सरोवर के चारों ओर बने घाट और ब्रह्मा मंदिर इस शहर की पहचान हैं। यहां पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान की परंपरा है।

राजस्थान पर्यटन के अनुसार पुष्कर सरोवर के चारों ओर 52 घाट हैं और इसके किनारे बड़ी संख्या में मंदिर मौजूद हैं। ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर सरोवर और आसपास के घाट आपकी यात्रा के प्रमुख पड़ाव हो सकते हैं।

पिंडदान के साथ पुष्कर घूमने की खासियत यह है कि छोटी दूरी में कई धार्मिक स्थल कवर हो जाते हैं। सावित्री मंदिर, ब्रह्मा मंदिर, वराह मंदिर और पुष्कर बाजार को यात्रा कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।

कैसे पहुंचें

पुष्कर का सबसे नजदीकी बड़ा रेल कनेक्शन अजमेर है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार अजमेर स्टेशन से पुष्कर के लिए नियमित बसें चलती हैं और टैक्सी या स्थानीय वाहन भी लिए जा सकते हैं। अजमेर और पुष्कर के बीच की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। पुष्कर सरोवर के घाटों पर धार्मिक गतिविधियां सुबह और शाम दोनों समय देखने को मिलती हैं। पूजा के लिए किसी स्थानीय पुरोहित की सेवा लेते समय पहले से पूजा की विधि और दक्षिणा तय कर लेना बेहतर रहेगा।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article