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गुफा के भीतर विराजमान हैं भगवान शिव, जानिए क्यों खास है श्री केशवनाथेश्वर मंदिर की यात्रा

Hidden Shiva Temples: श्री केशवनाथेश्वर मंदिर किसी स्वर्ग से कम नहीं है। अगर आप शांति, प्रकृति और आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में हैं तो ये जगह आपके लिए परफेक्ट है।

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गुफा के भीतर विराजमान हैं भगवान शिव (फोटो: localguidesconnect)

Hidden Shiva Temples: कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित श्री केशवनाथेश्वर मंदिर बेहद अद्भुत स्थान है जो आपकी ट्रैवल बकेटलिस्ट में शामिल हो सकता है। घने जंगलों के बीच प्राकृतिक गुफा में बना यह मंदिर एक यूनीक ट्रैवल डेस्टिनेशन है। सावन के महीने में अगर आप एक अलग आध्यात्मिक अनुभव चाहते हैं तो यहां घूमने जाने का प्लान कर सकते हैं। इस मंदिर की खासियत ये है कि यहां भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को गुफा के अंदर घुटनों तक भरे ठंडे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जहां छोटी-छोटी मछलियां पैरों को छूकर एक अलग तरह की शांति का एहसास कराती हैं।

अनोखा मंदिर

प्रकृति की गोद में छिपा कर्नाटक के मूडुगल्लू (Moodugallu) इलाके में स्थित यह मंदिर बेहद खूबसूरत धार्मिक स्थल है। अगर आपको एडवेंचर पसंद है तो जान लें कि यह मंदिर घने जंगलों के बीच मूकांबिका रिजर्व फॉरेस्ट के अंदर स्थित है। चारों तरफ हरियाली, शांत वातावरण और बहते हुए झरने आपकी यात्रा को बेहद रोमांचक बना देंगे। यह किसी सामान्य मंदिर की तरह नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक गुफा के अंदर बना हुआ है जो इसे अलग पहचान देता है। यहां पहुंचकर आपको ऐसा लगेगा कि आप सीधे प्रकृति के बीच भगवान शिव के करीब पहुंच गए हों।

गुफा के अंदर हैं भगवान शिव के दो शिवलिंग

इस मंदिर में भगवान शिव के दो शिवलिंग मौजूद हैं। इनमें से एक शिवलिंग भक्तों द्वारा स्थापित किया गया है, जबकि दूसरा शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बना हुआ माना जाता है, जिसे स्वयंभू शिवलिंग कहा जाता है। यह स्वयंभू शिवलिंग साफ पानी के बीच स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यह स्थान भगवान शिव की विशेष कृपा से बना है और यहां दर्शन करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। मुख्य गर्भगृह तक जाने के लिए आपको ठंडे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। यह अनुभव डराने वाला नहीं बल्कि बेहद शांत और सुखद माना जाता है।

कैसे पहुंचें

उडुपी से कुंदापुर होते हुए केराडी पहुंचा जा सकता है। यहां से मंदिर की दूरी करीब 75 किलोमीटर है। केराडी से लगभग 4-5 किलोमीटर जंगल के रास्ते से जाना पड़ता है। इसके बाद करीब 1 किलोमीटर ऊपर की तरफ कच्चे रास्ते से मंदिर पहुंचा जाता है। मानसून के दौरान अगर आप जाने का प्लान कर रहे हैं तो जान लें कि बारिश के टाइम यहां पैदल जाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। नजदीकी शहर- उडुपी (करीब 74 किलोमीटर), सिद्धापुर (करीब 21 किलोमीटर) है।

मंदिर जाने का सही समय और रास्ता

यह मंदिर रोजाना सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में रोजाना सुबह करीब 9 बजे पूजा होती है। अगर आप यहां घूमने का प्लान बना रहे हैं तो बारिश के मौसम को ध्यान में रखें, क्योंकि जंगल का रास्ता फिसलन भरा हो सकता है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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