उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य का दौरा करते हुए एएनआई से बातचीत करते हुए साफ कर दिया है कि इस बार का चुनाव 2014, 2017, 2019 या 2022 जैसा बिल्कुल नहीं होगा।
यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण और अलग तरह का चुनाव होने जा रहा है। ओवैसी के ताजा रुख से यह स्पष्ट है कि एआईएमआईएम इस बार यूपी के सियासी मैदान में एक निर्णायक भूमिका निभाने की तैयारी कर रही है।
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बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन का प्रस्ताव
ओवैसी ने एक स्पष्ट और बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में बीजेपी को दोबारा सत्ता में आने से रोकना चाहती है। इसके लिए वे किसी भी गैर-बीजेपी दल के साथ बातचीत और गठबंधन करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, "अकेले कोई भी दल बीजेपी को नहीं रोक सकता। जो लोग भी बीजेपी को हराना चाहते हैं, उन्हें हमारे साथ आकर बात करनी होगी।"
ओवैसी ने बिहार चुनाव का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि वहां भी उनकी पार्टी ने विपक्षी दलों से महज कुछ सीटें मांगी थीं, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने आगाह किया कि जनता सब देख रही है कि कौन सच में बीजेपी को हराना चाहता है और कौन उसकी मदद कर रहा है।
सपा-बीजेपी पर निशाना और AI विवाद
सपा और बीजेपी के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए चल रही जुबानी जंग पर ओवैसी ने करारा तंज कसा। उन्होंने कहा कि असली मुद्दों जैसे बिजली संकट, बुलडोजर कार्रवाई और कानून व्यवस्था से ध्यान भटकाने के लिए दोनों दल एआई के खेल में उलझे हुए हैं।
ओवैसी के मुताबिक सपा शासनकाल में एक तरह की गुंडागर्दी थी, तो वर्तमान बीजेपी सरकार में दूसरे तरह की मनमानी हो रही है। उन्होंने कहा कि विकास और शासन के पैमाने पर दोनों में कोई बड़ा अंतर नहीं है।
राम मंदिर SIT रिपोर्ट और जयंत चौधरी पर बयान
ओवैसी ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े कथित गबन मामले की एसआईटी रिपोर्ट को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने मांग की कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और पूछा कि इस मामले के आरोपियों को किस आधार पर आसानी से जमानत मिल रही है।
इसके साथ ही, एनडीए में शामिल हुए जयंत चौधरी का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि किसी पुराने साथी का अपमान करना गलत मानसिकता को दर्शाता है। मतभेदों के बावजूद वे व्यक्तिगत रूप से जयंत चौधरी का सम्मान करते हैं।
मायावती की तारीफ और मुस्लिम नेतृत्व का मुद्दा
ओवैसी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि बिना किसी पारिवारिक विरासत या संपत्ति के अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना भारतीय राजनीति का एक ऐतिहासिक अध्याय है, जिसे नकारा नहीं जा सकता।
इसके साथ ही, उन्होंने कानपुर में कब्रिस्तान की जमीन पर हुई कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय को केवल चुनाव के दिन वोट देने वाला नागरिक बनाकर रख दिया गया है। ओवैसी ने मांग की कि मुस्लिमों को अधिकारों से लैस नागरिक माना जाए और उन्हें उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिले।
