टेक्नोलॉजी ने हमारे डेली रूटीन लाइफ को काफी आसान बना दिया है लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं जिनसे हमें बचने की जरूरत है। साइबर क्रिमिनल्स लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए नए नए तरीके अपना रहे हैं। पिछले कुछ समय में ATM Thermal Scanning के जरिए फ्रॉड के कई सारे मामले सामने आए हैं। ऐसे में अगर आप ATM से पैसे निकालते हैं तो आपको बेहद अलर्ट और सावधान रहने की जरूरत है। डिजिटल दौर में अब ज्यादातर लोग ATM से ही पैसे निकालते हैं।
साइबर क्रिमिनल्स और चोर ATM पिन चुराने के लिए अक्सर नए नए तरीके अपनाते रहते हैं। अब क्रिमिनल्स 'थर्मल स्कैनिंग' तकनीक का सहारा ले रहे हैं। अगर आप लापरवाही बरतते हैं तो चोर इसके जरिए आसानी से आपका एटीएम पिन चोरी कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कि यह क्या तकनीक है और यह कैसे काम करती है?
क्या है थर्मल स्कैनिंग?
थर्मल स्कैनिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसका इस्तेमाल करके एटीएम पिन का अनुमान लगाने की कोशिश की जा सकती है। जब कोई व्यक्ति एटीएम मशीन के बटन दबाता है, तो उसकी उंगलियों की गर्मी कुछ समय के लिए उन बटनों पर बनी रह सकती है। इसके बाद क्रिमिनल्स थर्मल कैमरे या स्कैनिंग डिवाइस की मदद से बटनों पर बने हीट पैटर्न को देख सकता है।
इन हीट पैटर्न के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि हाल ही में किन बटनों को दबाया गया था। हालांकि इससे सीधे पिन का पता नहीं चलता, लेकिन अपराधियों को पिन का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। इसलिए एटीएम का उपयोग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना और पैसे निकालने के बाद नंबर पैड की बटनो को छूना आपके लिए फायदेमंदद हो सकता है।
मेटल और प्लास्टिक कीपैड में अंतर
आपको बात दें कि प्लास्टिक कीपैड पर उंगलियों की गर्मी और निशान कुछ समय तक बने रह सकते हैं, जिससे उन्हें विशेष डिवाइस की मदद से पहचानना आसान हो सकता है। इसी वजह से अपराधियों के लिए यह समझने की कोशिश करना आसान हो जाता है कि हाल ही में किन बटनों का इस्तेमाल किया गया था। इसके विपरीत, धातु (मेटल) के कीपैड गर्मी को तेजी से फैलाते और ठंडा कर देते हैं। इसलिए उन पर उंगलियों की गर्मी ज्यादा देर तक नहीं टिकती, जिससे थर्मल स्कैनिंग के जरिए जानकारी जुटाना अपेक्षाकृत कठिन होता है।
थर्मल कैमरे में आमतौर पर जो बटन सबसे अधिक गर्म दिखाई देता है, वह हाल ही में दबाया गया बटन हो सकता है, जबकि अपेक्षाकृत कम गर्म बटन पहले दबाए गए हो सकते हैं। इन तापीय संकेतों का विश्लेषण करके अपराधी पिन के अंकों और उनके क्रम का अनुमान लगाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि यह तरीका हमेशा सटीक नहीं होता, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ इसे संभावित जोखिमों में शामिल मानते हैं।
