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BGP Hijacking क्या होता है? जानें ये किसी वेबसाइट और ऐप में कैसे डालता है असर

BGP Hijacking के कारण इंटरनेट ट्रैफिक गलत दिशा में मुड़ सकता है। इसकी वजह से यूजर्स को वेबसाइट या ऐप तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है और कभी-कभी सेवा पूरी तरह बाधित भी हो सकती है।

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BGP को बेहद आसानी से हाइजैक किया जा सकता है। (फोटो क्रेडिट-iStock)

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Telegram एक बार फिर चर्चा में है। इसकी बड़ी वजह है भारत सरकार की तरफ से इस पर 22 जून तक लगाया बैन। सरकार के इस कदम के बाद से टेलीग्राम के फाउंडर और सीईओ Pavel Durov काफी नाराज हैं और उन्होंने इसको लेकर बड़ा दावा किया है। सीईओ के मुताबिक टेलीग्राम पर रोक लगाने के लिए BGP Hijacking नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया गया. Durov के अनुसार इसका असर सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है बल्कि UAE जैसे देशों के कुछ यूजर्स पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

Pavel Durov की तरफ से दिए गए बयान के बाद से BGP Hijacking शब्द तेजी से चर्चा में बना हुआ है। आइए आपको बताते हैं कि आखिर ये कौन की तकनीक है और किसी वेबसाइट या फिर मोबाइल ऐप्स पर इसका क्या असर पड़ता है?

BGP क्या है?

BGP यानी Border Gateway Protocol इंटरनेट की एक अहम तकनीक है, जो यह तय करती है कि डेटा को एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क तक पहुंचने के लिए कौन-सा रास्ता अपनाना चाहिए। सरल शब्दों में कहें तो यह इंटरनेट के लिए ट्रैफिक मैनेजर की तरह काम करता है। जब आप किसी वेबसाइट को खोलते हैं या किसी ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो बीजीपी तकनीक ही यह सुनिश्चित करता है कि आपकी जानकारी सही और सबसे उपयुक्त मार्ग से अपनी मंजिल तक पहुंचे।

क्या होती है BGP Hijacking?

जब कोई नेटवर्क गलत या भ्रामक जानकारी देकर यह दावा करता है कि किसी वेबसाइट या ऑनलाइन सेवा तक पहुंचने का सबसे सही रास्ता उसके जरिए है, तो इस स्थिति को बीजीपी हाइजैकिंग (BGP Hijacking) कहा जाता है। इसके कारण इंटरनेट ट्रैफिक गलत दिशा में मुड़ सकता है। नतीजतन, यूजर्स को वेबसाइट या ऐप तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है और कभी-कभी सेवा पूरी तरह बाधित भी हो सकती है।

इसे एक आसान उदाहरण से समझें। मान लीजिए किसी शहर में एक सड़क पर गलत दिशा बताने वाला बोर्ड लगा दिया जाए। ऐसे में लोग सही मार्ग छोड़कर गलत रास्ते पर चले जाएंगे, जिससे उन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचने में देरी होगी या वे वहां पहुंच ही नहीं पाएंगे। बीजीपी हाइजैकिंग भी इंटरनेट पर कुछ इसी तरह की समस्या पैदा करती है।

क्या BGP हाइजैक हो सकता है?

बीजीपी (BGP) का डिजाइन इस तरह से है कि उसे आसानी से हाइजैक किया जा सकता है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि इसमें रूट संबंधी जानकारी खुद से देने की कोई सुविधा नहीं होती है। आसान शब्दों में कहें तो यदि कोई नेटवर्क यह दावा करता है कि वह किसी खास डेस्टिनेशन तक डेटा पहुंचा सकता है, तो दूसरे नेटवर्क आमतौर पर उस जानकारी पर भरोसा कर लेते हैं और उसी के अनुसार ट्रैफिक भेजना शुरू कर देते हैं।

यानी बीजीपी का काफी हद तक संचालन आपसी भरोसे पर आधारित होता है। इसी कारण यदि कोई नेटवर्क गलत या भ्रामक जानकारी प्रसारित कर दे, तो इंटरनेट ट्रैफिक गलत दिशा में भेजा जा सकता है। इस स्थिति को बीजीपी हाइजैकिंग (BGP Hijacking) कहा जाता है।

साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट लंबे समय से इस चुनौती की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं। हालांकि सुरक्षा उपायों में लगातार सुधार किए गए हैं, फिर भी समय-समय पर बीजीपी हाइजैकिंग के मामले सामने आते रहते हैं, जिससे इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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