बिहार के बक्सर में भारतीय जनता पार्टी के विधायक विनय बिहारी ने अपनी ही सरकार और पार्टी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने भोजपुरी अंदाज में सरकार की कर्ज नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, “केतना कर्जा खइबअ ऐ राजा, केतना कर्जा खइब। कर्जा खा के विकास कइसे करबअ ऐ राजा।” विनय बिहारी ने कहा कि वह यह बात मीडिया के सामने कह रहे हैं और उन्हें नहीं पता कि इसका क्या नतीजा होगा।
विधायक ने अपने बयान में कहा, “कम बोलने से वोट कटता है, ज्यादा बोलने से टिकट कटता है और बहुत ज्यादा बोलने से गर्दन कटती है। पता नहीं मेरे साथ क्या होगा।” उनके इस बयान को लेकर बिहार की सियासत में चर्चा शुरू हो गई है।
'विकास के लिए कर्ज का सहारा लिया जा रहा'
विनय बिहारी ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान लोगों के बीच पैसे बांटकर वोट हासिल किए गए और अब विकास के लिए कर्ज का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड है, तो कर्ज लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब पहले से विकास के काम हो रहे थे और उनका असर लोगों को दिखाई दे रहा था, तो चुनाव के समय लोगों के खातों में दस-दस हजार रुपये क्यों भेजे गए। विधायक ने इशारों में सरकार की वित्तीय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर कर्ज लेकर विकास किस तरह किया जाएगा।
विनय बिहारी ने कहा कि वह अपनी बात सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने रख रहे हैं। साथ ही उन्होंने अपने ही अंदाज में यह भी संकेत दिया कि सरकार या पार्टी के खिलाफ बोलने का राजनीतिक नुकसान उन्हें उठाना पड़ सकता है।
बांकीपुर की हार पर उठाया सवाल
विनय बिहारी ने बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा की हार और मतदान प्रतिशत को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सभी विधायक और मंत्री चुनाव में लगे थे, फिर भी बांकीपुर सीट हार गई। हालांकि उन्होंने कहा कि हार का उन्हें अफसोस नहीं है, बल्कि चिंता इस बात की है कि जब केवल 34 प्रतिशत मतदान होता है तो स्थिति पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी को इससे सीख लेनी चाहिए।
