क्रिकेट की 22 गज की पिच पर कई रिकॉर्ड बनाए गए हैं और इन रिकॉर्ड्स को बनाने वाले तमाम खिलाड़ी भी खेल के इतिहास में सदा के लिए अमर हो गए। कुछ आज भी हैं, और कुछ हमारे बीच नहीं हैं। ऐसे ही एक क्रिकेटर थे इंग्लैंड के वॉल्टर रीड जिन्होंने आक्रामक रुख क्या होता है, उसका प्रमाण अपनी एक पारी से दे दिया था। आज उनका जन्मदिन है। इसी मौके पर हम आपको इस पूर्व इंग्लिश खिलाड़ी के बारे में दिलचस्प किस्सा बताते हैं।
इंग्लैंड के सर्री में 23 नवंबर 1855 को जन्मे वॉल्टर रीड इंग्लैंड के नामी क्रिकेटर्स में से एक थे। वो एक शानदार बल्लेबाज थे जो शीर्ष क्रम में चौथे स्थान पर बल्लेबाजी किया करते थे। उन्होंने इंग्लैंड के लिए कई मददगार पारियां भी खेली थीं। लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टीम के इंग्लैंड दौरे पर 1884 में ओवल टेस्ट मैच के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसने इस खिलाड़ी का नाम रिकॉर्ड्स बुक में एक खास जगह पर हमेशा के लिए दर्ज करा दिया।
कप्तान का अनोखा फैसला, और वो लाजवाब पारी
उस मैच में टीम के कप्तान लॉर्ड हैरिस ने फैसला किया कि वॉल्टर रीड को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी नहीं कराई जाएगी क्योंकि उस टीम में कई अन्य धुरंधर भी मौजूद थे। उनको काफी देर तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा और अंत में उनको 10वें नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए भेजा गया। वॉल्टर रीड इस बात से नाराज और निराश थे लेकिन इस गुस्से को उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से प्रदर्शित करके सबको जवाब दिया। रीड ने 10वें नंबर पर कुल 2 घंटे में अपना पहला व एकमात्र टेस्ट शतक जड़ दिया। उन्होंने 117 रनों की पारी खेली और साथ ही विलियम स्कॉटन के साथ नौवें विकेट के लिए 151 रनों की ऐतिहासिक पार्टनरशिप को भी अंजाम दे दिया।
बन गए दो बड़े रिकॉर्ड
उस शानदार शतकीय पारी के बाद वॉल्टर रीड के नाम 10वें नंबर पर सबसे बड़ी टेस्ट पारी खेलने का रिकॉर्ड दर्ज हो गया। एक ऐसा रिकॉर्ड जो 1884 से लेकर आज तक कायम है। कोई भी बल्लेबाज उस रिकॉर्ड को तोड़ नहीं सका। इसके अलावा नौवें विकेट के लिए स्कॉटन के साथ की गई 151 रनों की साझेदारी आज भी एशेज टेस्ट सीरीज के इतिहास में नौवें विकेट के लिए सबसे बड़ी पार्टनरशिप के रूप में दर्ज है।
