Sawan Somwar 2026: 30 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो गया है, जो 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु न सिर्फ भगवान शिव की पूजा करते हैं, बल्कि शिवलिंग पर जलाभिषेक भी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाने से मन को शांति मिलती है और पापों का नाश होता है। साथ ही भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, धन और वैभव का वास होता है। हालांकि, जलाभिषेक से जुड़े कुछ विशेष नियम भी हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है।
यहां पर आप जानेंगे कि शिवलिंग पर किस प्रकार के लोटे से जल चढ़ाना चाहिए, जलाभिषेक की सही विधि क्या है और किन नियमों का ध्यान इस दौरान रखना चाहिए।
शिवलिंग पर किस लोटे से चढ़ाएं जल?
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए तांबे (Copper), पीतल (Brass), चांदी (Silver) या सोने (Gold) का लोटा शुभ रहता है। इन्हें पवित्र और शुद्ध ऊर्जा से युक्त माना जाता है, जिससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
शिवलिंग पर किस लोटे से जल न चढ़ाएं?
यदि आप शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं तो इसके लिए स्टील, लोहे या एल्युमिनियम के लोटे का इस्तेमाल भूलकर भी न करें। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको पाप लग सकता है। दरअसल, इन धातुओं को अशुद्ध व पूजा के लिए वर्जित माना गया है।
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शिवलिंग पर किस दिशा में जल चढ़ाना चाहिए?
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय भक्त का मुख उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा की तरफ होना चाहिए। इसके अलावा शिवलिंग के दक्षिण दिशा की तरफ से जल अर्पित करना चाहिए क्योंकि जलाधारी का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम
- शिवलिंग के पास खड़े होने की जगह बैठकर जल अर्पित करना चाहिए।
- जल की धारा (जिस तरफ से जल बहता है) को लांघना नहीं चाहिए और न ही उस तरफ खड़ा होना चाहिए।
- जल अर्पण के समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का निरंतर जाप करते रहें।
- जल की धार बहुत तेज नहीं होनी चाहिए, बल्कि पतली और धीमी गति ज्यादा शुभ मानी जाती है।
- शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
- शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते, हल्दी और सिंदूर अर्पित न करें।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका
जलाधारी के दाईं ओर भगवान गणेश का स्थान होता है, जहां पर सबसे पहले जल चढ़ाया जाता है। इसके बाद बाईं ओर कार्तिकेय जी के स्थान पर जल अर्पित करने का विधान है। फिर शिवलिंग के मध्य भाग में अशोक सुंदरी के स्थान पर जल चढ़ाया जाता है। अंत में शिवलिंग के गोल चक्कर यानी पार्वती जी के हस्तकमल पर जल घुमाते हुए मुख्य शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है।
