White Chandan: चंदन का वृक्ष अपने आप में ही परम पवित्र माना जाता है। सनातन धर्म में चंदन देव पूजा का प्रमुख भाग होता है। चंदन के तिलक से लेकर चंदन की माला पर जप तक का प्रयोग पूजा पाठ में बहुत ज्यादा शुभ माना जाता है। चंदन की सुगंध से सकारात्मक उर्जा मिलती है। सुख सौभाग्य, आयु और स्वास्थ्य का प्रतीक चंदन काे माना जाता है। रक्त और श्वेत दो तरह के चंदन होते हैं। दोनों का ही अलग− अलग महत्व है। श्वेत चंदन को मल्यागिरी चंदन भी कहा जाता है।
सफेद चंदन की माला का प्रयोग भगवान श्रीराम, विष्णु, श्रीकृष्ण, दत्तात्रेय आदि की पूजा और जप में किया जाता है जबकि रक्त चंदन यानी लाल चंदन की माला का प्रयोग श्रीगणेश, दुर्गा माता, लक्ष्मी देव, त्रिपुर सुंदरी आदि के मंत्र मप के लिए किया जाता है। चंदन की माला को सुख शांति और संपन्नता प्रदाता कहा जाता है।
मल्यागिरि या श्वेत चंदन के हार के फायदे
मल्यागिरी चंदन को अंग्रेजी में संदल वुड और हिंदी में सफेद चंदन या खुशबू वाला चंदन कहा जाता है। सफेद चंदन में जहां अनेक गुण हैं। वहां इससे निर्मित मालाओं में यह गुण है कि यह हमेशा अपनी भीनी भीनी खुशबू बिखेरती रहती है। सफेद चंदन हार चंदन की लकड़ी को छीलकर उसके उपर से छिलके को प्राप्त कर उसे पुष्प का आकार प्रदान करके बनाया जाता है, क्योंकि मल्यागिरि चंदन लकड़ी से भीनी खुशबू इसलिए यही गुण इससे निर्मित मालाओं में विद्यमान रहता है।
स्वर्गीय पूर्वजों की तस्वीरों के लिए उपयुक्त है चंदनहार
आज के भाैतिक और तेज रफ्तार युग में यह संभव नहीं है कि अपने घर, दुकान, आफिस में लगे भगवान और पूज्य स्वर्गीय पूर्वजों की छवियों पर रोज ताजे खुशबूदार पुष्पों की माला अर्पण कर सकें, इसलिए इस चंदनहार का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि यह हार एक बार चित्र पर पहना देने से साल भर तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराता रहता है, क्योंकि इसमें से सदैव खुशबू आती रहती है। इसके धारण करने से भगवान तो प्रसन्न होते ही हैं साथ ही स्वर्गीय पूर्वजों की आत्मा को भी शांति मिलती है। इसको आकर्षक बनाने के लिए कारीगर इसको तरह− तरह के खूबसूरत रूप भी प्रदान करते हैं।
मानसिक शांति देती है सफेद चंदन की माला
जो लोग अक्सर तनाव में रहते हैं या विद्यार्थी हैं उन्हें सफेद चंदन की माला अवश्य ही धारण करनी चाहिए। गले में धारण करने से सफेद चंदन मन को शांति देता है और एकाग्रता भी बढ़ाता है।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
