Pradosh Vrat Puja Time Today: आज के प्रदोष व्रत की पूजा का समय, जानें कितने बजे तक होगी शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा
- Authored by: Srishti
- Updated Jan 30, 2026, 10:32 AM IST
Pradosh Vrat Puja Time Today: आज 30 जनवरी 2026 को शुक्र प्रदोष व्रत है। यहां से जानें कि आज प्रदोष व्रत की पूजा कितने बजे होने वाली है। आज की प्रदोष व्रत की पूजा का सही समय और पूजा का तरीका यहां बताया गया है।
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 पूजा मुहूर्त (pc: canva)
Pradosh Vrat Puja Time Today 2026: पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 30 जनवरी, शुक्रवार के दिन सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर हुई। वहीं, इसका समापन 31 जनवरी, शनिवार को सुबह 8 बजकर 26 मिनट पर होगा। ऐसे में आज यानी 30 जनवरी को शुक्र प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। आज शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा कितने बजे से कितने बजे तक होगी, ये आप यहां से जान सकते हैं। यहां प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त और साथ ही पूजा के मंत्र और विधि बताई गई है।
शुक्र प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त 2026-
सूर्यास्त से करीब 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक का समय प्रदोष काल कहलाता है। शुक्र प्रदोष की पूजा प्रदोष काल में ही होती है। ऐसे में आज शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा का समय शाम 05:59 बजे से लेकर रात 08:37 बजे तक है। यानी आज पूजा करने के लिए 2 घंटे 38 मिनट का समय मिल रहा है।
शुक्र प्रदोष व्रत पूजा मंत्र-
- ॐ नमः शिवाय
- ॐ ह्रीं शुं शुक्राय नमः
- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
शुक्र प्रदोष व्रत और पूजा विधि-
प्रदोष व्रत की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह की शुरुआत में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (पीले या सफेद रंग के) पहनें। हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। संकल्प में कहें कि आप वैवाहिक सुख, मनोकामना पूर्ति और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत कर रहे हैं। दिनभर फलाहार, दूध, दही या सात्विक भोजन लें। दोपहर में सोना वर्जित है। पूरे दिन भगवान शिव का नाम जपते रहें और मन को शांत रखें। प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं या घर में शिवलिंग/शिव परिवार की मूर्ति के सामने आसन लगाएं। पवित्र जल में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। फिर शिवजी को बेलपत्र (11 या 21 पत्ते), चंदन, सफेद या नीले फूल, फल, भांग, धतूरा, शमी पत्ते, शहद, दूध, दही और नैवेद्य यानी खीर या हलवा चढ़ाएं। इस दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप भी करते रहें। घी का दीपक जलाएं और माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी तथा नंदी जी की भी पूजा करें। पूजा के दौरान शुक्र प्रदोष व्रत कथा जरूर पढ़ें या सुनें। इसके बाद शिव चालीसा या शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें। फिर घी के दीपक या कपूर से शिव आरती करें और आरती के अंत में क्षमा प्रार्थना करें।