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पति कमाता है, फिर भी कई महिलाएं नौकरी क्यों नहीं छोड़ना चाहतीं? विकास दिव्यकीर्ति ने बताई सोच बदलने वाली वजह

Women Career After Marriage: भारतीय समाज में शादी के बाद अक्सर कामकाजी महिलाओं को नौकरी छोड़ने के लिए कहा जाता है। लेकिन इसके बाद भी महिलाएं नौकरी छोड़ना नहीं चाहती हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

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शादी के बाद नौकरी क्यों नहीं छोड़ती महिलाएं

Women Career After Marriage: शादी के बाद महिलाओं के अक्सर एक सवाल सुनने को मिलता है- "जब पति अच्छी कमाई करता है, तो पत्नी को नौकरी करने की क्या जरूरत है?" भारतीय समाज में आज भी कई परिवारों में यह धारणा मौजूद है कि शादी के बाद महिला की प्राथमिक जिम्मेदारी घर और परिवार है। हालांकि बदलते समय के साथ महिलाओं की सोच भी बदली है। आज कई महिलाएं आर्थिक मजबूरी नहीं, बल्कि अपनी पहचान, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान के लिए काम करना चाहती हैं। जाने-माने शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर विकास दिव्यकीर्ति (Vikas Divyakirti) ने अपने एक लेक्चर में इसी विषय पर बेहद दिलचस्प नजरिया साझा किया है। आइए विस्तार से जानते हैं शादी के बाद महिलाओं के नौकरी करने पर क्या है उनकी राय...

नौकरी को बताया पहचान

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का कहना है कि लोग अक्सर नौकरी को केवल पैसों से जोड़कर देखते हैं, जबकि कई महिलाओं के लिए यह उनकी व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा होती है। सालों की पढ़ाई, मेहनत और संघर्ष के बाद जब कोई महिला अपने दम पर एक मुकाम हासिल करती है, तो उससे जुड़ा आत्मसम्मान भी उसके जीवन का अहम हिस्सा बन जाता है।

ऐसे में शादी के बाद नौकरी छोड़ देना कई महिलाओं को ऐसा महसूस करा सकता है कि उन्होंने अपनी मेहनत से बनाई हुई पहचान खो दी है। यही वजह है कि वे अपने करियर को जारी रखना चाहती हैं।

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बाहर की दुनिया के मायने

हालांकि घर संभालना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन हर दिन सिर्फ घरेलू कामों तक सीमित रहना किसी के लिए भी मानसिक रूप से थकाने वाला हो सकता है। इसलिए नौकरी महिलाओं को घर से बाहर निकलने, नए लोगों से मिलने और अलग माहौल में काम करने का अवसर देती है। नौकरी के दौरान ऑफिस का माहौल, सहकर्मियों के साथ बातचीत, टीमवर्क और नई-नई चीजें सीखने का मौका आपको मानसिक ताजगी देता है। यह अनुभव केवल प्रोफेशनल ग्रोथ ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के मानसिक और सामाजिक विकास में भी मदद करता है।

आत्मनिर्भरता से बढ़ता है आत्मविश्वास

विकास दिव्यकीर्ति के अनुसार नौकरी महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता ही नहीं देती है, बल्कि इसके साथ-साथ आत्मविश्वास भी देती है। जब कोई महिला अपने पैरों पर खड़ी होती है, तो वह अपने जीवन से जुड़े फैसले अधिक आत्मविश्वास के साथ ले पाती है। यह आत्मनिर्भरता केवल बैंक खाते तक सीमित नहीं होती, बल्कि सोच, निर्णय लेने की क्षमता और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को भी मजबूत बनाती है। यही आत्मविश्वास उन्हें शादी के बाद भी अपने करियर को जारी रखने के लिए प्रेरित करता है।

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परिस्थिति के अनुसार फैसला

यह भी समझना जरूरी है कि हर महिला की परिस्थितियां और प्राथमिकताएं अलग होती हैं। कुछ महिलाएं परिवार और बच्चों की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ना पसंद करती हैं, जबकि कई महिलाएं घर और करियर के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहती हैं। ये दोनों ही फैसले व्यक्तिगत हैं और उनका एक जैसा ही सम्मान किया जाना चाहिए।

महिलाओं और उनकी नौकरी से जुड़े विषय पर डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का संदेश यही है कि नौकरी को केवल कमाई का जरिया मानना सही नहीं है। बल्कि यह उनकी पहचान, आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का आधार होती है। इसलिए महिलाओं के नौकरी करने या छोड़ने दोनों ही फैसलों का स्वागत होना चाहिए।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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