लाइफस्टाइल

हार-जीत में एक जैसा चेहरा- आखिर धोनी का 'कूल माइंड' सीक्रेट क्या है, सफलता के लिए कैसे जरूरी है

Dhoni Life Lessons: महेंद्र सिंह धोनी को 'कैप्टन कूल' क्यों कहा जाता है? जानिए उनके शांत स्वभाव, दबाव में फैसले लेने की क्षमता और उनसे मिलने वाले अहम लाइफ लेसन्स।

Image

कैसे इतने शांत रह पाते हैं धोनी, क्या है सीक्रेट

Dhoni Life Lessons: हम सबकी जिंदगी में एक-न-एक ऐसा पल जरूर आता है, जब लगता है कि बस अब अगर यह काम बिगड़ गया, तो सब खत्म हो जाएगा। ऑफिस में प्रेजेंटेशन हो, किसी इंटरव्यू का इंतजार हो, बच्चे का रिजल्ट हो या घर की कोई बड़ी जिम्मेदारी- ऐसे समय में दिल की धड़कनें थोड़ी तेज हो जाती हैं। हथेलियां पसीजने लगती हैं और दिमाग एक साथ सौ बातें सोचने लगता है।

अब जरा ऐसे ही किसी पल में महेंद्र सिंह धोनी का चेहरा याद कीजिए। एक बड़े मैच का आखिरी ओवर... सामने दुनिया की नजरें... एक फैसले पर मैच का भविष्य... लेकिन चेहरे पर वही ठहराव। न कोई हड़बड़ाहट, न बेवजह की जल्दबाजी, न जीत का उत्साह पहले से और न हार का डर।

शायद यही वजह है कि लोग उन्हें सिर्फ अच्छे बल्लेबाज या सफल कप्तान के तौर पर याद नहीं करते। उनके नाम के आगे अपने आप एक शब्द जुड़ जाता है- कैप्टन कूल। लेकिन कभी सोचा है कि आखिर यह 'कूल' होना आता कहां से है?

धोनी की सबसे बड़ी ताकत क्या है

धोनी ने लंबे-लंबे छक्के लगाए, ट्रॉफियां जिताईं और कई ऐसे मैच निकाले, जिन्हें लोग आज भी याद करते हैं। लेकिन अगर उनके पूरे करियर को एक शब्द में समेटना हो, तो शायद वह शब्द होगा - संयम।

कितनी ही बार विकेटकीपर के पीछे खड़े-खड़े उन्होंने पूरा मैच पढ़ लिया। कितनी बार आखिरी ओवर तक इंतजार किया। कितनी बार लोगों ने कहा कि अब मैच गया... लेकिन धोनी के चेहरे पर देखकर ऐसा कभी नहीं लगा कि उन्होंने उम्मीद छोड़ दी है।

उनके चेहरे को पढ़ना हमेशा मुश्किल रहा। शायद इसलिए विरोधी टीम भी आखिरी गेंद तक निश्चिंत नहीं होती थी। हर बात पर रिएक्ट न करना भी एक ताकत होती है

जीवन में शांत रहकर आगे बढ़ने के लिए धोनी की बातें फॉलो करें

जीवन में शांत रहकर आगे बढ़ने के लिए धोनी की बातें फॉलो करें

धोनी की आदत से सीखें

लेकिन हमारी जिंदगी में क्या है। मैसेज का जवाब देर से दो, तो लोग वजह पूछ लेते हैं। सोशल मीडिया पर किसी ने कुछ लिख दिया, तो पलटकर जवाब देने की जल्दी रहती है। ऑफिस में किसी ने कुछ कह दिया, तो पूरा दिन उसी बात में निकल जाता है।

ऐसे समय में धोनी की एक आदत सबसे अलग दिखाई देती है। उन्होंने कभी हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं समझा।न हर आलोचना पर बोले। न हर तारीफ पर बहके। उन्होंने अपने खेल को बोलने दिया।

शायद इसलिए उनका असर शब्दों से ज्यादा लंबे समय तक रहा। शायद इसी वजह से दबाव उन्हें बदल नहीं पाया मनोवैज्ञानिक अक्सर कहते हैं कि दबाव इंसान को नहीं बदलता, बल्कि उसका असली स्वभाव सामने ले आता है।

घबराहट को हावी ना होने दें

मैच कितना भी बड़ा हो, सामने कितनी भी मजबूत टीम हो या स्टेडियम में कितना भी शोर हो... उन्होंने अपने भीतर के शोर को शायद कभी बाहर नहीं आने दिया। यही वजह है कि उनके फैसले घबराहट से नहीं, समझ से लिए हुए लगते थे।

और जिंदगी में यही सबसे मुश्किल काम है। क्रिकेट की यह सीख शायद मैदान से बाहर ज्यादा काम आती है। सच कहें, तो हममें से ज्यादातर लोग क्रिकेट नहीं खेलते। लेकिन हम सब दबाव जरूर झेलते हैं। कभी नौकरी का, कभी पैसों का, कभी रिश्तों का, कभी बच्चों के भविष्य का।

हर दिन कोई न कोई ऐसा ओवर यानी पल जरूर आता है, जहां लगता है कि अब क्या होगा? ऐसे समय में शायद हमें धोनी की बल्लेबाजी नहीं, उनका चेहरा याद रखना चाहिए। वह चेहरा, जो हमें याद दिलाता है कि घबराहट से समस्या छोटी नहीं होती, लेकिन ठहराव से रास्ता जरूर दिखाई देने लगता है।

शायद यही है 'कैप्टन कूल' होने का असली मतलब

धोनी इसलिए खास नहीं हैं कि उन्होंने कभी दबाव महसूस नहीं किया। वह इसलिए खास हैं क्योंकि उन्होंने दबाव को अपने चेहरे और फैसलों का मालिक नहीं बनने दिया।

उनके जन्मदिन पर लोग उनके रिकॉर्ड गिनेंगे, ट्रॉफियों की तस्वीरें साझा करेंगे और हेलिकॉप्टर शॉट की बातें करेंगे। लेकिन अगर उनकी जिंदगी से सिर्फ एक चीज अपने साथ ले जानी हो, तो शायद वह यही होगी - हर मैच आखिरी गेंद पर नहीं जीता जाता, लेकिन हर मुश्किल में खुद को संभालना हमेशा अपने हाथ में होता है।

शायद जिंदगी का सबसे बड़ा 'कूल माइंड सीक्रेट' भी यही है।

Medha Chawla
मेधा चावला author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

End of Article