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अकेलापन बना 'साइलेंट किलर' हर साल लाखों लोगों की ले रहा जान, WHO की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता

Loneliness: स्मोकिंग से ज्यादा खतरनाक हमारे लिए अकेलापन होता जा रहा है। जी हां अकेलेपन की समस्या को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक चेतावनी जारी की है। आइए जानते हैं कैसे अकेलापन जानलेवा हो जाता है।

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अकेलापन बन रहा गंभीर समस्या

Loneliness: आज के दौर में लोग पहले से कहीं ज्यादा एक दूसरे से जुड़े हुए दिखाई देते हैं। सोशल मीडिया, वीडियो कॉल और मैसेजिंग ऐप्स ने दुनिया को मुट्ठी में समेट दिया है। लेकिन इस चमकती डिजिटल दुनिया के पीछे 'अकेलापन' नाम की एक कड़वी सच्चाई भी छिपी है। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने अकेलेपन (Loneliness) को एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य समस्या और ‘साइलेंट किलर’ का नाम दिया है।

WHO के आंकड़ों की मानें तो अकेलेपन के कारण हर साल दुनिया भर में लगभग 8.71 लाख लोगों की मौत होती है। वही हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अकेलेपन का शरीर पर असर रोजाना 15 सिगरेट पीने जितना खतरनाक हो सकता है। यह आंकड़ा बताता है कि अकेलापन केवल एक इमोशन समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम भी बन चुका है। आइए जानते हैं कैसे जानलेवा बन रहा है अकेलापन।

अकेलापन बन रहा बीमारियों की वजह

अक्सर लोग अकेलेपन को केवल मेंटल कंडीशन समझते हैं, और मानते हैं कि इससे केवल मेंटल हेल्थ पर ही असर होता है। लेकिन बीते कुछ सालों में हुई स्टडीज में इसका खुलासा हुआ है कि अकेलेपन का असर शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ता है। लंबे समय तक अकेले रहने वाले लोगों में कई तरह की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

हार्ट हेल्थ पर बुरा असर

सामाजिक अलगाव और अकेलापन हार्ट रोगों के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। WHO की रिपोर्ट के अनुसार इससे स्ट्रोक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। जब व्यक्ति इमोशनी खुद को अकेला महसूस करता है, तो शरीर लगातार तनाव की स्थिति में रहता है, जिससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसा व्यक्ति धीरे-धीरे दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाता है।

खराब मेंटल हेल्थ

अकेलापन हमारे दिमाग में कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन का लेवल बढ़ा देता है। इसका असर व्यक्ति की याददाश्त, एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है। केवल इतना ही नहीं ऐसे लोगों में डिप्रेशन और एंग्जाइटी का खतरा भी सामान्य लोगों की तुलना में दोगुना हो सकता है।

डिमेंशिया और डायबिटीज का खतरा

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार अकेले रहने वाले लोगों में डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी विकसित होने की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा, टाइप-2 डायबिटीज जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां भी अकेलेपन से प्रभावित हो सकती हैं।

क्यों बढ़ रहा है अकेलापन

आज तेजी से बदलती लाइफस्टाइल के बीच सोशल मीडिया और इंटरनेट ने लोगों के बीच दूरी को भले कम कर दिया हो, लेकिन अकेलेपन को बढ़ा दिया है। तकनीक ने सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन मानवीय रिश्तों की गर्माहट कहीं पीछे छूटती जा रही है। लोग सोशल मीडिया पर सैकड़ों दोस्तों से जुड़े होते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में अपनी भावनाएं साझा करने वाला कोई नहीं होता है।

तेज रफ्तार में चल रही लाइफस्टाइल, काम का लगातार बढ़ता दबाव, छोटे होते परिवार और घर से दूर काम-काज जैसे कई कारण कारण अकेलेपन को बढ़ावा दे रहे हैं। अकेलेपन की समस्या से खासकर युवा और बुजुर्ग वर्ग अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

WHO की खास पहल

अकेलेपन के बढ़ते खतरे को देखते हुए WHO ने साल 2023 के अंत में 'कमीशन ऑन सोशल कनेक्शन' की स्थापना की। इसका उद्देश्य दुनिया भर में सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा देना और अकेलेपन के स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोशल रिलेशन किसी दवा से कम नहीं हैं। मजबूत रिश्ते न केवल मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाते हैं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता और आपकी उम्र दोनों को बढ़ाने में मदद करते हैं।

अकेलापन एक ऐसी छुपी हुई समस्या है जो दिखती नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे व्यक्ति की मेंटल और फिजिकल हेल्थ को कमजोर कर देती है। WHO की चेतावनी इस बात का संकेत है कि अब समय आ गया है कि हम अपने रिश्तों को प्राथमिकता दें और सामाजिक जुड़ाव को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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