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International Day of Older Persons: बढ़ती उम्र में बुजुर्गों की बदल जाती हैं जरूरतें, परिवार को समझनी चाहिए ये बातें

1 अक्टूबर को International Day for Older Persons मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि बुजुर्गों को दवा और मदद के साथ प्यार, सम्मान और अपनापन भी चाहिए।

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अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस

हर साल 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस (International Day for Older Persons) मनाया जाता है। इस दिन का मकसद सिर्फ बुजुर्गों की समस्याओं पर बात करना नहीं, बल्कि यह समझना भी है कि बढ़ती उम्र में उन्हें वास्तव में किन चीजों की जरूरत होती है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन इसके साथ उनकी भावनात्मक और सामाजिक जरूरतें भी बदलती हैं। कई बार परिवार के लोग बुजुर्गों की जरूरत को सिर्फ दवा, डॉक्टर और रोजमर्रा के कामों में मदद तक सीमित समझ लेते हैं। जबकि हकीकत यह है कि उन्हें अपने परिवार का साथ, बातचीत, सम्मान और यह एहसास भी चाहिए कि वे आज भी परिवार के लिए उतने ही जरूरी हैं।

बुजुर्गों के लिए भावनात्मक सहारा बहुत जरूरी

उम्र बढ़ने के साथ कई बुजुर्गों का सामाजिक दायरा छोटा होने लगता है। नौकरी से रिटायरमेंट, दोस्तों से कम मिलना-जुलना और बच्चों का अपने काम में व्यस्त रहना उनके अकेलेपन को बढ़ा सकता है। ऐसे में उनके लिए किसी से बात करना और अपनी बात खुलकर कहना काफी मायने रखता है।

अकेलापन सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि कोई व्यक्ति घर में अकेला रहता है या नहीं। कई बार परिवार के बीच रहते हुए भी बुजुर्ग खुद को अकेला और उपेक्षित महसूस कर सकते हैं। इसलिए परिवार के लोगों का रोज कुछ समय उनके साथ बैठना, उनकी बातें सुनना और उनकी भावनाओं को समझना जरूरी है।

सिर्फ मदद नहीं, सम्मान भी चाहते हैं बुजुर्ग

बढ़ती उम्र में बुजुर्गों को कई कामों के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ सकती है। चलने-फिरने में परेशानी, कमजोरी या किसी बीमारी के कारण उन्हें छड़ी, वॉकर या व्हीलचेयर की जरूरत हो सकती है। कुछ लोगों को रोजमर्रा के कामों में परिवार या देखभाल करने वाले व्यक्ति की मदद भी चाहिए होती है।

लेकिन मदद करते समय उनके आत्मसम्मान का ध्यान रखना भी जरूरी है। हर छोटी बात में उन्हें कमजोर समझना या उनकी जगह खुद फैसला लेना उन्हें बुरा लग सकता है। जहां वे खुद काम कर सकते हैं, वहां उन्हें अपनी क्षमता के मुताबिक काम करने देना चाहिए।

बातचीत और अपनापन है सबसे बड़ी जरूरत

बुजुर्गों के साथ बातचीत करना देखने में छोटी बात लग सकती है, लेकिन उनके लिए इसका महत्व काफी ज्यादा होता है। उनसे उनके पुराने अनुभवों के बारे में पूछना, परिवार की बातें साझा करना या बस कुछ देर उनके पास बैठना उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत महसूस करा सकता है।

कई बुजुर्ग चाहते हैं कि परिवार के लोग उनकी बातें सिर्फ सुनें नहीं, बल्कि उन्हें महत्व भी दें। इसलिए उनके अनुभवों और सलाह को सम्मान देना परिवार के रिश्तों को और मजबूत कर सकता है।

परिवार के फैसलों में उन्हें शामिल करें

उम्र बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति की राय की अहमियत खत्म हो गई। परिवार में होने वाले छोटे-बड़े फैसलों में बुजुर्गों से उनकी राय पूछना उन्हें यह महसूस कराता है कि वे अभी भी परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

चाहे घर में किसी कार्यक्रम की तैयारी हो, यात्रा की योजना बनानी हो या परिवार से जुड़ा कोई दूसरा फैसला लेना हो, उनकी राय पूछी जा सकती है। जरूरी नहीं कि हर बार उनकी सलाह ही मानी जाए, लेकिन उनकी बात सुनना अपने आप में सम्मान का संकेत है।

स्वास्थ्य के साथ मानसिक सेहत पर भी दें ध्यान

बढ़ती उम्र में शारीरिक स्वास्थ्य पर तो परिवार ध्यान देता है, लेकिन मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को कई बार नजरअंदाज कर दिया जाता है। उम्र के साथ याददाश्त में बदलाव, चिंता, उदासी या डिमेंशिया जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

ऐसे में परिवार को उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। अगर वे बार-बार एक ही बात भूल रहे हैं, रोजमर्रा के कामों में असामान्य परेशानी हो रही है या लगातार उदास दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।

साथ बैठकर खाना और समय देना भी है जरूरी

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में परिवार के लोगों के पास एक-दूसरे के लिए समय कम हो गया है। इसका असर बुजुर्गों पर भी पड़ता है। उनके साथ दिन में कुछ समय बैठना, साथ खाना खाना या टहलने जाना उनके लिए खुशी का कारण बन सकता है। जरूरी नहीं कि उनके लिए हमेशा कोई महंगा तोहफा या बड़ी सुविधा ही जुटाई जाए। कई बार परिवार का थोड़ा सा समय और प्यार उनके लिए ज्यादा मायने रखता है।

बुजुर्गों की चाहत है कि उन्हें बोझ न समझा जाए

बढ़ती उम्र में सबसे जरूरी बातों में से एक है सम्मान के साथ जीने का अधिकार। बुजुर्ग यह महसूस नहीं करना चाहते कि वे परिवार पर बोझ हैं। उन्हें यह भरोसा चाहिए कि जरूरत पड़ने पर परिवार उनके साथ खड़ा है और उनकी मौजूदगी परिवार के लिए मायने रखती है।

इसलिए अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस सिर्फ एक दिन बुजुर्गों के बारे में सोचने का मौका नहीं है। यह हमें अपने आसपास मौजूद बुजुर्गों की जरूरतों को समझने और उनके साथ थोड़ा ज्यादा समय बिताने की याद दिलाता है। उनकी जिंदगी में प्यार, सम्मान, बातचीत और अपनापन बनाए रखना परिवार की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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