सोच कर देखिए कि हाथ में 1 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज हो और कोई उसे ठुकरा दे। पहली बार में यह बात किसी फिल्मी कहानी या बेवकूफी लग सकती है, लेकिन हाल ही में एक वायरल खबर ने कॉर्पोरेट जगत के होश उड़ा दिए हैं। एक Gen Z प्रोफेशनल ने सिर्फ इसलिए 1 करोड़ रुपये का शानदार जॉब ऑफर ठुकरा दिया, क्योंकि कंपनी का वर्क कल्चर 'टॉक्सिक' था।
इस फैसले ने एक बार फिर से इस बहस को छेड़ दिया है कि आज की युवा पीढ़ी के लिए पैसा ही सब कुछ है या वे अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दे रहे हैं?
क्यों ठुकराया करोड़ों का पैकेज?
वायरल खबर के मुताबिक, लड़के को इंटरव्यू और बातचीत के दौरान ही इस बात का एहसास हो गया था कि कंपनी में काम का दबाव बेहद असामान्य है। देर रात तक असाइनमेंट पूरा करना, वीकेंड पर काम की उम्मीद रखना और मैनेजमेंट का रवैया कर्मचारियों के प्रति बेहद असंवेदनशील था।
युवक का कहना था कि भारी-भरकम सैलरी पैकेज किसी भी ऐसे तनाव, बर्नआउट या मानसिक अस्वस्थता की भरपाई नहीं कर सकता, जो ऐसी जगह काम करने से मिलेगी। उसने बिना किसी झिझक के ऑफर रिजेक्ट कर दिया और कहा कि वह ऐसी जगह काम करना पसंद करेगा जहां उसकी मेंटल हेल्थ और पर्सनल लाइफ का सम्मान हो।
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आखिर कैसा वर्क कल्चर चाहते हैं आज के Gen Z?
इनसे पहले वाली पीढ़ियों जैसे बूमर्स या जेन एक्स के लिए नौकरी का मतलब फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और किसी भी तरह के 'एडजस्टमेंट' पर टिका रहता था। लेकिन Gen Z का नजरिया पूरी तरह बदल चुका है। वे काम करने के लिए जीते नहीं हैं, बल्कि जीने के लिए काम करते हैं।
आज के यूथ की वर्कप्लेस से 4 मुख्य अपेक्षाएं हैं:
वर्क-लाइफ बैलेंस: 9 से 5 के काम के बाद पर्सनल लाइफ में दखलअंदाजी आज के युवाओं को सख्त नापसंद है। वीकेंड्स पर काम की उम्मीद न रखना उनकी पहली शर्त होती है।
मेंटल हेल्थ और रिस्पेक्ट: वर्कप्लेस पर चिल्लाना, नीचा दिखाना या टारगेट के नाम पर मानसिक दबाव डालना अब स्वीकार्य नहीं है। युवा ऐसे माहौल में तुरंत 'क्विट' करने से नहीं डरते।
फ्लेक्सिबिलिटी: वर्क फ्रॉम होम, हाइब्रिड मॉडल और फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑवर्स आज के यूथ की प्राथमिकता बन चुके हैं।
एम्पैथी और पर्पज: वे ऐसी कंपनियों में काम करना चाहते हैं जहां उनके काम की कद्र हो और लीडर्स में सहानुभूति हो, न कि सिर्फ बॉसगिरी।
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कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए बड़ा मैसेज
Gen Z के इस कदम ने दुनिया भर की कंपनियों और एचआर (HR) डिपार्टमेंट्स के लिए एक वेक-अप कॉल दिया है। यह इस बात का सबूत है कि अब सिर्फ अच्छी सैलरी और लुभावने पर्क्स देकर बेहतरीन टैलेंट को रिटेन नहीं किया जा सकता।
यदि कंपनियों को आज के इनोवेटिव और काबिल युवाओं को अपने साथ जोड़कर रखना है, तो उन्हें अपने पुराने ढर्रे के टॉक्सिक वर्क कल्चर को बदलना ही होगा।
