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टॉक्सिक माहौल देख छोड़ दी 1 करोड़ की नौकरी, जानें आखिर कैसा वर्क कल्चर चाहती है Gen Z

जॉब ऑफर ठुकराने वाले युवक का कहना था कि भारी-भरकम सैलरी पैकेज किसी भी ऐसे तनाव, बर्नआउट या मानसिक अस्वस्थता की भरपाई नहीं कर सकता, जो ऐसी जगह काम करने से मिलेगी।

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सिर्फ पैसों के लिए काम नहीं करना चाहती Gen Z (Photo: iStock)

सोच कर देखिए कि हाथ में 1 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज हो और कोई उसे ठुकरा दे। पहली बार में यह बात किसी फिल्मी कहानी या बेवकूफी लग सकती है, लेकिन हाल ही में एक वायरल खबर ने कॉर्पोरेट जगत के होश उड़ा दिए हैं। एक Gen Z प्रोफेशनल ने सिर्फ इसलिए 1 करोड़ रुपये का शानदार जॉब ऑफर ठुकरा दिया, क्योंकि कंपनी का वर्क कल्चर 'टॉक्सिक' था।

इस फैसले ने एक बार फिर से इस बहस को छेड़ दिया है कि आज की युवा पीढ़ी के लिए पैसा ही सब कुछ है या वे अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दे रहे हैं?

क्यों ठुकराया करोड़ों का पैकेज?

वायरल खबर के मुताबिक, लड़के को इंटरव्यू और बातचीत के दौरान ही इस बात का एहसास हो गया था कि कंपनी में काम का दबाव बेहद असामान्य है। देर रात तक असाइनमेंट पूरा करना, वीकेंड पर काम की उम्मीद रखना और मैनेजमेंट का रवैया कर्मचारियों के प्रति बेहद असंवेदनशील था।

युवक का कहना था कि भारी-भरकम सैलरी पैकेज किसी भी ऐसे तनाव, बर्नआउट या मानसिक अस्वस्थता की भरपाई नहीं कर सकता, जो ऐसी जगह काम करने से मिलेगी। उसने बिना किसी झिझक के ऑफर रिजेक्ट कर दिया और कहा कि वह ऐसी जगह काम करना पसंद करेगा जहां उसकी मेंटल हेल्थ और पर्सनल लाइफ का सम्मान हो।

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आखिर कैसा वर्क कल्चर चाहते हैं आज के Gen Z?

इनसे पहले वाली पीढ़ियों जैसे बूमर्स या जेन एक्स के लिए नौकरी का मतलब फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और किसी भी तरह के 'एडजस्टमेंट' पर टिका रहता था। लेकिन Gen Z का नजरिया पूरी तरह बदल चुका है। वे काम करने के लिए जीते नहीं हैं, बल्कि जीने के लिए काम करते हैं।

आज के यूथ की वर्कप्लेस से 4 मुख्य अपेक्षाएं हैं:

वर्क-लाइफ बैलेंस: 9 से 5 के काम के बाद पर्सनल लाइफ में दखलअंदाजी आज के युवाओं को सख्त नापसंद है। वीकेंड्स पर काम की उम्मीद न रखना उनकी पहली शर्त होती है।

मेंटल हेल्थ और रिस्पेक्ट: वर्कप्लेस पर चिल्लाना, नीचा दिखाना या टारगेट के नाम पर मानसिक दबाव डालना अब स्वीकार्य नहीं है। युवा ऐसे माहौल में तुरंत 'क्विट' करने से नहीं डरते।

फ्लेक्सिबिलिटी: वर्क फ्रॉम होम, हाइब्रिड मॉडल और फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑवर्स आज के यूथ की प्राथमिकता बन चुके हैं।

एम्पैथी और पर्पज: वे ऐसी कंपनियों में काम करना चाहते हैं जहां उनके काम की कद्र हो और लीडर्स में सहानुभूति हो, न कि सिर्फ बॉसगिरी।

कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए बड़ा मैसेज

Gen Z के इस कदम ने दुनिया भर की कंपनियों और एचआर (HR) डिपार्टमेंट्स के लिए एक वेक-अप कॉल दिया है। यह इस बात का सबूत है कि अब सिर्फ अच्छी सैलरी और लुभावने पर्क्स देकर बेहतरीन टैलेंट को रिटेन नहीं किया जा सकता।

यदि कंपनियों को आज के इनोवेटिव और काबिल युवाओं को अपने साथ जोड़कर रखना है, तो उन्हें अपने पुराने ढर्रे के टॉक्सिक वर्क कल्चर को बदलना ही होगा।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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