किसी भी रिश्ते में मनमुटाव और बहस का होना बहुत आम है। लेकिन हर बहस का अंत अगर इस एहसास के साथ होता है कि गलती शायद आपकी ही थी, तो सोचने की जरूरत है। आपका पार्टनर आपको ये एहसास कराए या फिर आप खुद ये महसूस करें, आपको ये समझ लेना चाहिए कि आप रिलेशनशिप में मैनिपुलेशन का शिकार हो रहे हैं।
आपने अपनी बात रखी। सामने वाले से बातचीत हुई। लेकिन बातचीत खत्म होते-होते आप खुद अपनी भावनाओं, सोच या कहे पर सवाल करने लगते हैं। आपको लगने लगता है कि शायद आपने ही बात को गलत समझा या जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दी। रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हर बातचीत के बाद लगातार अपराधबोध महसूस करना एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है कि सामने वाला आपके इमोशनल एक्सपीरियंस को प्रभावित कर रहा है।
मैनिपुलेटिव बिहेवियर को लोग कई बार गुस्से या जबरदस्ती से जोड़कर देखते हैं। ऐसे लोगों को जानना चाहिए कि इसकी शुरुआत कई बार इसके बिल्कुल उलट होती है। सामने वाला बेहद अच्छा व्यवहार कर सकता है। वह आपकी बात ध्यान से सुन सकता है। आपकी पसंद को अपनी पसंद बता सकता है और आपको यह महसूस करा सकता है कि आप उसके लिए बहुत खास हैं। इसी वजह से शुरुआत में ऐसे व्यक्ति को पहचानना मुश्किल हो सकता है। मनोवैज्ञानिक लोगों को यह देखने की सलाह देते हैं कि कोई व्यक्ति तब कैसा व्यवहार करता है जब उसे लगता है कि उसे कोई देख नहीं रहा।
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आपके साथ अच्छा, दूसरों के साथ बुरा?
किसी व्यक्ति का असली व्यवहार समझने का एक तरीका यह भी है कि वह उन लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है, जिनसे उसे कोई फायदा नहीं मिलने वाला। मसलन, वह रेस्टोरेंट में आपके सामने बेहद विनम्र हो। लेकिन वेटर से बदतमीजी करे। ड्राइवर पर चिल्लाए। सिक्योरिटी गार्ड को अपमानित करे या ग्राहक सेवा कर्मचारी से बेहद रूखे तरीके से बात करे।
एक-दो बार खराब व्यवहार को देखकर किसी व्यक्ति के चरित्र का फैसला नहीं किया जा सकता। लेकिन अगर यह लगातार दिखाई देने वाला पैटर्न है, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं।
शुरुआत में ‘परफेक्ट पार्टनर’ दिखना
किसी नए रिश्ते की शुरुआत में लोग अक्सर अपना सबसे अच्छा रूप सामने रखते हैं। वे आपकी पसंद में रुचि दिखाते हैं। आपकी राय से सहमत होते हैं। आपकी पसंद-नापसंद को अपनाने की कोशिश करते हैं।
यह सामान्य भी हो सकता है। वहीं अगर समय के साथ आपको महसूस हो कि सामने वाला आपके सामने एक अलग व्यक्तित्व और बाकी लोगों के सामने बिल्कुल दूसरा व्यक्तित्व रखता है, तो इस अंतर पर ध्यान देना जरूरी है।
खासकर तब, जब उसका व्यवहार इस बात के हिसाब से बदलता हो कि उसे आपसे क्या हासिल करना है- आपका समय, पैसा, मदद या कोई और फायदा। विशेषज्ञ के अनुसार, व्यक्तित्व में ऐसा बदलाव एक बड़ा रेड फ्लैग हो सकता है।
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सबसे बड़ा सवाल खुद से पूछें
क्या इस रिश्ते में आप लगातार खुद को दोषी मान रहे हैं? क्या हर बहस के बाद आप सोचते हैं कि शायद गलती आपकी थी? क्या सामने वाला अपनी बात मनवाने के बाद आपको ही ऐसा महसूस कराता है कि आपने उसे दुख पहुंचाया?
अगर यह बार-बार हो रहा है, तो रिश्ते के पूरे पैटर्न को देखना जरूरी है। एक अकेली बातचीत या एक खराब दिन किसी व्यक्ति को मैनिपुलेटिव साबित नहीं करता, लेकिन लगातार दोहराया जाने वाला व्यवहार जरूर गंभीर संकेत हो सकता है।
किसी स्वस्थ रिश्ते में असहमति हो सकती है। बहस भी हो सकती है। फिर भी हर बातचीत के बाद एक व्यक्ति का खुद को छोटा, दोषी या भ्रमित महसूस करना स्वस्थ संवाद की निशानी नहीं है।
