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Kumar Vishwas Birthday: जन्मदिन पर पढ़ें कुमार विश्वास की प्रेमभरी हिंदी कविताएं, युवाओं के लिए हैं लव एंथम

  • Authored by: कुलदीप राघव
  • Updated Feb 10, 2023, 06:58 AM IST

Kumar Vishwas Poems: देश के जाने माने कवि डॉ. कुमार विश्वास का आज जन्मदिन है। कुमार विश्वास जब मंच पर होते हैं तो उनकी एक झलक पाने को लोग बेताब नजर आते हैं। कुमार विश्वास की प्रेमभरी कविताएं युवाओं के लिए लव एंथम हैं।

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Kumar Vishwas Birthday: जन्मदिन पर पढ़ें कुमार विश्वास की प्रेमभरी हिंदी कविताएं, युवाओं के लिए हैं लव एंथम

Kumar Vishwas Poems: देश के जाने माने कवि डॉ. कुमार विश्वास का आज जन्मदिन है। उनका मूल नाम विश्वास कुमार शर्मा है। वे युवाओं के अत्यन्त प्रिय कवि हैं। कुमार विश्वास जब मंच पर होते हैं तो उनकी एक झलक पाने को लोग बेताब नजर आते हैं। कुमार विश्वास की प्रेमभरी कविताएं युवाओं के लिए लव एंथम हैं। उनका जन्मदिन प्रेम के सप्ताह यानी वैलेंटाइन वीक के बीच आता है और इजहार-ए-मोहब्बत के लिए युवा उनकी कविताओं का इस्तेमाल करते हैं। आज कुमार विश्वास के जन्मदिन के मौके पर पढ़ें कुमार विश्वास की प्रेमभरी हिंदी कविताएं-

Kumar Vishwas Hindi Poems

जब भी मुँह ढंक लेता हूँ

तेरे जुल्फों की छाँव में

कितने गीत उतर आते हैं

मेरे मन के गाँव में

एक गीत पलकों पर लिखना

एक गीत होंठों पर लिखना

यानि सारी गीत हृदय की

मीठी-सी चोटों पर लिखना

जैसे चुभ जाता है कोई काँटा नंगे पांव में

ऐसे गीत उतर आते हैं, मेरे मन के गाँव में

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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है

मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!

मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है

ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!

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जो धरती से अम्बर जोड़े , उसका नाम मोहब्बत है,

जो शीशे से पत्थर तोड़े, उसका नाम मोहब्बत है,

कतरा कतरा सागर तक तो, जाती है हर उम्र मगर,

बहता दरिया वापस मोड़े, उसका नाम मोहब्बत है

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नेह के सन्दर्भ बौने हो गए होंगे मगर,

फिर भी तुम्हारे साथ मेरी भावनायें हैं,

शक्ति के संकल्प बोझिल हो गये होंगे मगर,

फिर भी तुम्हारे चरण मेरी कामनायें हैं,

हर तरफ है भीड़ ध्वनियाँ और चेहरे हैं अनेकों,

तुम अकेले भी नहीं हो, मैं अकेला भी नहीं हूँ

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प्यार जब जिस्म की चीखों में दफ़न हो जाए,

ओढ़नी इस तरह उलझे कि कफ़न हो जाए,

घर के एहसास जब बाजार की शर्तो में ढले,

अजनबी लोग जब हमराह बन के साथ चले,

लबों से आसमां तक सबकी दुआ चुक जाए,

भीड़ का शोर जब कानो के पास रुक जाए,

सितम की मारी हुई वक्त की इन आँखों में,

नमी हो लाख मगर फिर भी मुस्कुराएंगे,

अँधेरे वक्त में भी गीत गाये जायेंगे...

कुलदीप राघव
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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