पूर्व सांसद और बाहुबली नेता अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद की 6 अगस्त को सड़क हादसे में मौत हो गई। वह प्रयागराज से झांसी, जेल में बंद अपने बड़े भाई अली से मिलने जा रहा था। मौत के बाद पुलिस और फोरेंसिक टीम को आबान की दुर्घटनाग्रस्त कार से आबान के कुछ निजी सामान के साथ ही दो किताबें भी मिलीं। दोनों बिल्कुल नई थीं। ये दोनों किताबें थीं- द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान और द इडियट। बताया जा रहा है कि ये दोनों किताबें वह अपने भाई अली के लिए ले जा रहा था।
द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान (The Stationery Shop of Tehran)
यह ईरानी-अमेरिकी लेखिका मरजान कमाली का चर्चित उपन्यास है। साल 2019 में यह पहली बार पब्लिश हुई थी। इस रोमांटिक नॉवेल में प्रेम, बिछड़ने, पुरानी यादें और इतिहास के बीच फंसी एक जिंदगी की कहानी कहती है।
कहानी 1953 के तेहरान से शुरू होती है। मुख्य किरदार रॉय और बहमन नाम के कपल की है, जिनकी मुलाकात एक स्टेशनरी की दुकान में होती है। किताबों और साहित्य से जुड़े बहमन को राजनीति और बदलाव में गहरी दिलचस्पी है, जबकि रॉय एक शांत और संवेदनशील युवती है। दोनों के बीच प्रेम पनपता है और वे साथ जिंदगी बिताने के सपने देखने लगते हैं। लेकिन ईरान में बदलते राजनीतिक हालात और 1953 के तख्तापलट की घटनाएं उनकी जिंदगी की दिशा बदल देती हैं।
इस उपन्यास के जरिए मरजान कमाली दिखाती हैं कि राजनीतिक उथल-पुथल का असर आम लोगों के निजी रिश्तों और भविष्य पर कितना गहरा पड़ सकता है। कहानी समय के साथ आगे बढ़ती है और पुराने फैसलों, अधूरे प्रेम और उन यादों को सामने लाती है जो दशकों बाद भी इंसान का पीछा नहीं छोड़तीं। इस किताब को खूब पसंद किया गया है। इसके कई संस्करण छप चुके हैं।
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द इडियट (The Idiot)
फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की के इस उपन्यास को विश्व साहित्य की चर्चित कृतियों में गिना जाता है। यह पहली बार 1869 में पब्लिश हुई थी। इसकी कहानी रूस के 19वीं सदी के सामाजिक जीवन, नैतिकता, प्रेम और इंसानी कमजोरियों के इर्दगिर्द घूमती है।
कहानी का मुख्य किरदार प्रिंस मिश्किन है, जो लंबे समय तक स्विट्जरलैंड में इलाज कराने के बाद रूस लौटता है। उसका स्वभाव बेहद सरल, ईमानदार और उदार है। वह लोगों को उनकी सामाजिक हैसियत या व्यवहार के इतर उन्हें इंसान के रूप में देखता है। जिस समाज में वह लौटता है, वहां उसकी इस मासूमियत को लोग उसकी नादानी समझते हैं। इसी वजह से लोग उसे इडियट यानी मूर्ख कहने लगते हैं।
इस उपन्यास की सबसे बड़ी खूबी यह है कि दोस्तोयेव्स्की एक बेहद भले और निष्कपट इंसान को स्वार्थी समाज के बीच रखकर यह सवाल उठाते हैं कि क्या सच्ची इंसानियत और करुणा वास्तव में इस दुनिया में टिक सकती है? यही सवाल इस उपन्यास को आज भी प्रासंगिक बनाता है।
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इन किताबों में क्या है खास
दोनों बेहद शानदार किताबें हैं। दोनों को पढ़ने वालों की संख्या भी बहुत ज्यादा है। दोनों किताबों की सबसे दिलचस्प बात ये है कि दोनों ही इंसानी रिश्तों और समाज को देखने के दो अलग आईने को सामने रखती हैं। जहां ‘द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान’ में प्रेम, बिछड़ने और इतिहास के बीच छूट गई जिंदगी है, वहीं ‘द इडियट’ में मासूमियत, करुणा और एक जटिल समाज के बीच इंसान बने रहने का सवाल है।
