Governor Oath: पश्चिम बंगाल में दो विधायकों की शपथ ग्रहण का मुद्दा गर्माया हुआ है। राज्यपाल सीबी आनंद बोस ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को पत्र लिखकर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों को शपथ दिलाने को संविधान का उल्लंघन करार दिया है। राज्यपाल आनंद बोस ने संविधान के अनुच्छेद 188 का हवाला दिया।
अनुच्छेद में कहा गया है कि राज्य की विधानसभा या विधान परिषद का प्रत्येक सदस्य सबसे पहले राज्यपाल या उसके द्वारा इसके नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष तीसरी अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए निर्धारित प्रारूप के अनुसार शपथ लेगा। आसान शब्दों में कहें तो राज्यपाल या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति विधायक को शपथ दिलाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि राज्यपाल को कौन शपथ दिलाते हैं।
कैसे होती है राज्यपाल की नियुक्ति?
केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक पुल की तरह राज्यपाल काम करते हैं। राज्यपाल की नियुक्ति पर भारत के महामहिम यानी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते हैं। राज्यपाल को न तो जनता चुनती है और न ही राज्यपाल की नियुक्ति के लिए किसी प्रकार का कोई चुनाव होता है।
संविधान के अनुच्छेद 153 के मुताबिक, हर एक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। हालांकि, एक व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों के राज्यपाल की जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं, संविधान का अनुच्छेद 155 कहता है कि राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा नियुक्त करेगा।
राज्यपाल को शपथ कौन दिलाता है?
राज्यपाल का कार्यकाल पांच साल का होता है और अगर राज्यपाल बीच में संवैधानिक कर्त्तव्यों को छोड़ना चाहते हैं तो वह पत्र के जरिए इसकी सूचना राष्ट्रपति को देंगे। बता दें कि राज्यपाल को राज्य के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा शपथ दिलाई जाती है। इसका संविधान के अनुच्छेद 159 में बकायदा उल्लेख किया गया है।
राज्यपाल पद के लिए योग्यता?
राज्यपाल पद के लिए योग्यता और शर्तों को उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 157 और 158 में किया गया है। राज्यपाल पद के लिए कोई भी व्यक्ति तब पात्र होगा जब उसके पास भारत की नागरिकता हो और वह 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका है। इसके अतिरिक्त राज्यपाल किसी सदन, विधानसभा या विधान मंडल का सदस्य न हो और किसी भी प्रकार के लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए।
