Science News: अंतरिक्ष की दुनिया से एक ऐसी खोज सामने आई है जिसने खगोलशास्त्रियों को हैरत में डाल दिया है। हमारी आकाशगंगा (Milky Way) के ठीक केंद्र में स्थित दानवाकार सुपरमैसिव ब्लैक होल, Sagittarius A* के चारों ओर एक ऐसा तारा चक्कर लगा रहा है, जिसकी रफ्तार के सामने इंसान की बनाई सबसे तेज मिसाइल भी कछुए जैसी लगती है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल Nature में हाल ही छपे शोध के अनुसार, इस नए खोजे गए तारे को नाम दिया गया है S301। यह तारा 25,000 किलोमीटर प्रति सेकंड की खौफनाक रफ्तार से ब्लैक होल की परिक्रमा कर रहा है।
कितनी तेज है S301 की रफ्तार?
तारे S301 की रफ्तार को समझने के लिए किसी कमर्शियल बोइंग या एयरबस पैसेंजर प्लेन की कल्पना कीजिए। एक सामान्य कमर्शियल प्लेन लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से उड़ता है। यह तारा उस प्लेन से 1,00,000 गुना अधिक तेज भाग रहा है! भौतिकी का नियम कहता है कि ब्रह्मांड में प्रकाश की गति सबसे तेज होती है (लगभग 3 लाख किमी/सेकंड)। S301 तारे की रफ्तार प्रकाश की गति की 8% से भी ज्यादा है। अगर यह तारा पृथ्वी पर होता, तो सेकंड भर में दिल्ली से कन्याकुमारी की दूरी को लगभग 8 बार तय कर लेता।
ब्लैक होल से बचकर कैसे भागता है यह तारा?
सुपरमैसिव ब्लैक होल गुरुत्वाकर्षण का वह दानव है जिससे रोशनी जैसी नगण्य वजन वाली चीज भी बचकर नहीं निकल सकती। आमतौर पर जब कोई खगोलीय पिंड इसके पास जाता है, तो ब्लैक होल उसे खींचकर निगल लेता है। लेकिन S301 के साथ ऐसा नहीं हो रहा। यह तारा पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी से महज 12 गुना अधिक दूरी पर रहकर ब्लैक होल का चक्कर लगा रहा है। खगोल विज्ञान के इतिहास में आज तक किसी तारे को इतने करीब नहीं देखा गया।
हमारी पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 365 दिन लगते हैं। वहीं, S301 इतने विशाल ब्लैक होल का पूरा एक चक्कर महज 8.7 साल में पूरा कर लेता है। यह तारा ब्लैक होल के प्रचंड गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल एक 'गुलेल' की तरह करता है। जैसे ही यह ब्लैक होल के पास पहुंचता है, उसकी ग्रेविटी इसे खींचने के बजाय आगे की ओर फेंक देती है, जिससे इसे भारी रफ्तार मिलती है और यह अंदर गिरने से बच जाता है।
चिली के रेगिस्तान से कैसे हुई इस 'सुपरस्टार' की पहचान?
वैज्ञानिकों ने चिली के अटाकामा रेगिस्तान में स्थित यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) के वेरी लार्ज टेलीस्कोप इंटरफेरोमीटर (VLT) पर लगे GRAVITY नामक आधुनिक उपकरण की मदद से इस धुंधले तारे को पहली बार 2023 में ट्रैक किया। इसके बाद जब 2021 और 2017 के पुराने डेटा का मिलान किया गया, तो S301 का पूरा खाका साफ हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि S301 पहले अकेला नहीं था। यह शायद एक 'बाइनरी स्टार सिस्टम' (दो तारों की जोड़ी) का हिस्सा था। जब यह जोड़ा घूमते-घूमते ब्लैक होल के बहुत करीब आ गया, तो ब्लैक होल ने S301 को अपनी कक्षा में कैद कर लिया और उसके साथी तारे को बेहद तेज गति से आकाशगंगा से बाहर फेंक दिया।
आइंस्टीन के 100 साल पुराने सिद्धांत की होगी सबसे बड़ी परीक्षा
S301 की खोज केवल एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के 'जनरल रिलेटिविटी' (General Relativity) के सिद्धांत का परीक्षण करने का सबसे बड़ा जरिया बनने जा रहा है। आइंस्टीन के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई 43 लाख सूर्य के बराबर भारी सुपरमैसिव ब्लैक होल घूमता है, तो वह अपने साथ आसपास के 'स्पेसटाइम' के ताने-बाने को भी घसीटता है। इस घटना को 'फ्रेम ड्रैगिंग' या Lense-Thirring Precession कहा जाता है। चूंकि S301 ब्लैक होल के इतना करीब है, इसलिए स्पेसटाइम का यह खिंचाव धीरे-धीरे तारे की कक्षा को बदल देगा। यह तारा अल्बर्ट आइंस्टीन के जनरल रिलेटिविटी के सिद्धांत की पुष्टि करने के लिए एक "प्राकृतिक अंतरिक्ष प्रयोगशाला" की तरह काम करेगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगले 10 वर्षों में यह बदलाव टेलीस्कोप से साफ देखा जा सकेगा।
मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल फिजिक्स के खगोलशास्त्री और नेचर में छपे शोध के सह लेखक स्टीफन गिलेसेन भी इस तारे की चाल से हैरत में हैं। गिलेसेन का कहना है कि इतिहास में पहली बार, हम किसी विशालकाय ब्लैक होल के घूमने की गति (Spin) को सीधे नापने में सक्षम होंगे। यह आइंस्टीन के सिद्धांत की सबसे बड़ी और सीधी परीक्षा होगी।
"यह तो बस शुरुआत है"
ब्लैक होल के आसपास सैकड़ों तारे चक्कर लगाते हैं, जिनमें से वैज्ञानिक अब तक सिर्फ 50 तारों का सटीक नक्शा बना पाए हैं। S301 पिछले रिकॉर्ड होल्डर से 10 गुना अधिक करीब है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (UCLA) के खगोलशास्त्री टुआन दो का कहना है कि उन्नत टेलीस्कोपों की मदद से जब हम गहरे अंतरिक्ष में और धुंधले तारों को देखेंगे, तो हमें S301 से भी अधिक तेज और करीब चक्कर लगाने वाले तारे मिल सकते हैं। S301 का अगला सबसे करीबी दौरा (Close Pass) साल 2031 में होगा, जिसके बाद ब्रह्मांड के इस सबसे बड़े रहस्य से पर्दा उठने की उम्मीद जताई जा रही है।
