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हॉकी विश्व कप से बाहर होने के बाद भारतीय महिला टीम की खिलाड़ी हुईं भावुक, आंसू छलके, चेहरे पर दिखी पदक चूकने की कसक

Indian women hockey team upset after crashing out of Hockey World Cup: भारतीय महिला हॉकी टीम महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के अहम मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेल रही थीं, इस मैच में कोई गोल नहीं हुआ लेकिन जैसे ही मैच खत्म होने का हूटर बजा, सब समझ गए कि अंक बराबर होने के बावजूद गोल की गणना के चलते वे बाहर हो गई हैं। इसके बाद भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

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हॉकी वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद भावुक हुईं भारतीय महिला हॉकी टीम (X/HockeyIndia)

हूटर बजते ही डगआउट में बैठी भारत की सबसे अनुभवी खिलाड़ी सविता पूनिया और उनकी साथी गोलकीपर बिछू देवी अपने आंसू नहीं रोक सकी और ठीक पीछे बैठी इशिका चौधरी को यकीन ही नहीं हुआ कि अपने पहले ही विश्व कप में वह पदक के इतने करीब पहुंचकर चूक गई। आस्ट्रेलिया से दूसरे चरण का मैच गोलरहित ड्रॉ रहने के बाद भारतीय टीम समान अंक के बावजूद गोल की गणना के आधार पर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई।

मैच के बाद खिलाड़ियों के चेहरे बयां कर रहे थे कि उन पर क्या बीत रही है । मैदान से निकलकर अपनी टीम बस का इंतजार कर रही खिलाड़ियों की आंखें लाल थी । मुख्य कोच शोर्ड मारिन मीडिया से बात कर रहे थे लेकिन अपनी उदासी नहीं छिपा सके । टीम के वैज्ञानिक सलाहकार और एथलीट परफार्मेस प्रमुख वेन लोम्बार्ड और सीनियर खिलाड़ी पहली बार विश्व कप खेल रही खिलाड़ियों का हौसला बंधा रहे थे।

भारतीय टीम में 11 खिलाडियों का यह पहला विश्व कप है और उन्हें यकीन की नहीं हो रहा था कि वे सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हैं। सीढ़ियों पर बैठकर फोन पर अपनी मां से बात कर रही एक खिलाड़ी ने कहा ,’’यह सबसे अच्छा मौका था । हम इतने करीब पहुंच गए थे और अब पता नहीं कब ये मौका मिलेगा।’’ तीसरा विश्व कप खेल रही सविता चुपचाप खड़ी थी और इतना ही बोल सकी कि यह सर्वश्रेष्ठ मौका था । अनुभवी मिडफील्डर नेहा गोयल के आंसू नहीं थम रहे थे । उनसे कहा गया कि आगे एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है तो उन्होंने सिर्फ हां में सिर हिलाया और कुछ बोल नहीं सकी।

भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप में कभी पदक नहीं जीती है और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1974 में फ्रांस में खेले गए पहले ही विश्व कप में था जब टीम चौथे स्थान पर रही थी । अब भारत को पांचवें छठे स्थान का मुकाबला 27 अगस्त को खेलना है और वह भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा। उन्हें ढांढस देने के लिये यह बताने पर भी एक खिलाड़ी का जवाब था,’’ पदक तो पदक ही होता है ना।’’

टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने कहा, "हम खुश नहीं है क्योंकि पदक के इतने करीब आने के बाद चूकना नहीं था । हमने इसके लिये इतनी मेहनत की थी । अच्छा भी खेले लेकिन फिनिश नहीं कर पाये। हम हार में भी साथ हैं और जीत में भी । हमें इससे सीख मिली है कि कोई मौका नहीं गंवाना है । अब पांचवें स्थान के लिये खेलना है और दोबारा वापसी करेंगे । हमने अभी तक जुझारूपन नहीं छोड़ा है और इस आखिरी मैच में भी नहीं छोड़ेंगे।"

सलीमा ने कहा कि यह दिन उनकी टीम का नहीं था जबकि इससे पहले हर मैच में खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा, "इतने बड़े मंच पर आप खेल रहे हैं तो यहां आकर खाली हाथ जाना अच्छा नहीं लग रहा । लेकिन हम टीम का मनोबल बढायेंगे और पांचवां स्थान लेकर ही जायेंगे।"

Shivam Awasthi
शिवम अवस्थीauthor

शिवम् अवस्थी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क के इंचार्ज हैं। इनको खेल पत्रकारिता में तकरीबन 17 सालों का अनुभव है। इनको क्रिकेट, फुटबॉल और टेनिस में खास रुचि है। उन्हें खेलना भी पसंद है और वो देहरादून में फुटबॉल व क्रिकेट इंटर डिस्ट्रिक्ट चैंपियनशिप में विजेता टीम के कप्तान भी रहे। पत्रकारिता में कदम रखने के कुछ समय बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का संपूर्ण फील्ड कवरेज किया और कई ब्रेकिंग न्यूज दी। कई चर्चित भारतीय एथलीटों के इंटरव्यू लिए हैं। 2011 वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का ऑनफील्ड रहकर शहर-शहर घूमते हुए पूरा टीवी कवरेज किया। विश्व कप से पहले युवा विराट कोहली का इंटरव्यू किया। डिजिटल जैसे-जैसे आगे बढ़ा उन्हें ब्रेट ली, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़, जैसे तमाम धुरंधरों के साक्षात्कार किए और 16 वर्षीय ऋषभ पंत का पहला डिजिटल इंटरव्यू किया जिसे इंग्लिश और हिंदी वेबसाइट पर काफी रीडरशिप मिली। उन्होंने स्पोर्ट्स मल्टी पॉडकास्ट भी किया। आईपीएल के 18 सीजन से ऑनफील्ड जुड़े रहे। अब तक तकरीबन 6000 से ज्यादा एक्सक्लूसिव स्टोरीज लिख चुके हैं। साल 2025 में खेल जगत के तमाम बड़े रिकॉर्ड्स व आंकड़ों को ट्रैक किया है और उन पर आर्टिकल तैयार किए हैं।

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