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समुद्र बढ़ रहा या जमीन धंस रही? क्यों डूबने की कगार पर हैं दुनिया के कई तटीय शहर

दुनिया के कई तटीय शहरों में समुद्र का जलस्तर बढ़ने के साथ जमीन भी तेजी से धंस रही है। TUM और Tulane University की स्टडी के मुताबिक, घनी आबादी वाले तटीय इलाकों में समुद्र का सापेक्ष जलस्तर औसतन 6 मिमी प्रति वर्ष बढ़ रहा है, जो वैश्विक औसत से करीब तीन गुना है।

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समुद्र बढ़ने के साथ जमीन क्यों धंस रही है? जानें वजह (सांकेतिक फोटो)
Edited by: Pooja Kumari
Updated Aug 18, 2026, 15:08 IST
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दुनियाभर में समुद्र किनारे बसे शहरों पर बाढ़ का खतरा अब दो दिशाओं से बढ़ रहा है। एक तरफ समुद्र का जलस्तर लगातार ऊपर की ओर उठ रहा है, तो वही दूसरी तरफ कई घनी आबादी वाले इलाकों में जमीन खुद नीचे धंसती जा रही है। जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (TUM) और अमेरिका की ट्यूलेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया है कि जमीन के इस धंसाव की वजह से करोड़ों लोगों पर समुद्री जलस्तर बढ़ने का असर कहीं ज्यादा तेजी से पड़ रहा है।

समस्या कितनी बड़ी है?

दुनिया में 50 करोड़ से ज्यादा लोग निचले तटीय इलाकों में रहते हैं, यानी वे जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े खतरे के सीधे सामने हैं। जर्नल Nature Communications में छपी इस रिसर्च के मुताबिक, घनी आबादी वाले तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को हर साल औसतन करीब 6 मिलीमीटर समुद्री जलस्तर वृद्धि झेलनी पड़ रही है। यह आंकड़ा दुनियाभर के तटों के औसत 2.1 मिलीमीटर प्रति वर्ष से करीब तीन गुना ज्यादा है। अगर सिर्फ जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ने वाले समुद्री स्तर (करीब 3.15 मिलीमीटर प्रति वर्ष) से तुलना की जाए, तो यह लगभग दोगुना है। इतने बड़े फर्क की मुख्य वजह है जमीन का धंसना (land subsidence) यानी तटीय शहरों के नीचे की जमीन धीरे-धीरे नीचे बैठती जा रही है।

जमीन धंसती क्यों है?

शोधकर्ताओं के अनुसार, जमीन धंसने के पीछे मानव निर्मित और प्राकृतिक दोनों तरह के कारण काम कर रहे हैं:

  • भूजल का बेतहाशा दोहन - तेजी से बढ़ती आबादी के लिए जमीन से अंधाधुंध पानी निकालना जमीन धंसने का सबसे बड़ा कारण है।
  • तेल और गैस निकालने का काम - जमीन के अंदर से प्राकृतिक संसाधनों को निकालने से मिट्टी की निचली परतें कमजोर हो जाती हैं।
  • नदी डेल्टा की नई-नई मिट्टी का दबना - नदियों के डेल्टा वाले इलाकों में जमा नई और नरम मिट्टी समय के साथ खुद भी दबती रहती है।
  • शहरों का भारी वजन - तटीय क्षेत्रों में तेजी से हो रहे शहरीकरण, ऊंची इमारतों और भारी बुनियादी ढांचे के भार से जमीन दब रही है।
  • प्राकृतिक वजहें - धरती की परतों की हलचल (टेक्टॉनिक मूवमेंट) और पुराने जमाने की बर्फ की चादरें पिघलने के बाद धरती की सतह में आ रहा बदलाव।

शोधकर्ताओं के अनुसार, अगर हमें समुद्री जलस्तर की सही तस्वीर समझनी है, तो सिर्फ समुद्र को नहीं, बल्कि जमीन को भी उतनी ही बारीकी से देखना होगा। उनके मुताबिक, घनी आबादी वाले इलाकों में इंसानी गतिविधियां जैसे ज्यादा पानी और संसाधनों का दोहन होने से जमीन कमजोर हो रही है और यह तेजी से धंस रही हैं। यही वजह जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहे समुद्री स्तर को और भी खतरनाक बना देता है।

कौन से शहर सबसे तेज धंस रहे हैं?

स्टडी के अनुसार, थाईलैंड, बांग्लादेश, नाइजीरिया, मिस्र, चीन और इंडोनेशिया में तटीय इलाकों का जलस्तर 7 से 10 मिमी प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है। वहीं अमेरिका, नीदरलैंड और इटली में यह दर 4 से 5 मिमी प्रति वर्ष है।

शहरों के धंसने की रफ्तार?

  • जकार्ता (इंडोनेशिया) - 13.7 मिमी
  • तियानजिन (चीन) - 13.5 मिमी
  • बैंकॉक (थाईलैंड) - 8.5 मिमी
  • लागोस (नाइजीरिया) - 6.7 मिमी
  • अलेक्जेंड्रिया (मिस्र) - 4 मिमी

हैरानी की बात यह है कि एक ही शहर के अलग-अलग हिस्सों में भी हालात बहुत अलग हो सकते हैं। जकार्ता में कुछ जगहों पर जमीन हर साल 42 मिलीमीटर तक धंस रही हैं, जबकि उसी शहर के कुछ हिस्सों में जमीन ऊपर भी उठ रही है, यानी पूरे शहर को एक ही दर से डूबता हुआ मानना सही नहीं होगा।

हर तटीय इलाका नहीं डूब रहा

दिलचस्प बात यह भी है कि सभी तटीय इलाकों की कहानी एक जैसी नहीं है। दुनिया में कुछ ऐसे तटीय इलाके भी हैं जहां जमीन नीचे जाने के बजाय ऊपर उठ रही है। स्वीडन और फिनलैंड के कुछ हिस्सों में ऐसा ही देखने को मिल रहा है। इसकी वजह आखिरी हिमयुग के बाद भूगर्भीय प्रक्रियाओं के कारण धरती की सतह का धीरे-धीरे ऊपर उठना है।

क्या इस धंसाव को रोका जा सकता है?

जमीन धंसने की कुछ वजहें प्राकृतिक हैं, जिन्हें रोकना संभव नहीं है। जैसे टेक्टोनिक गतिविधि या प्राकृतिक भूगर्भीय बदलाव को नियंत्रित करना इंसान के बस में नहीं है। लेकिन भूजल का दोहन एक ऐसी वजह है, जिस पर सरकारें और स्थानीय कार्रवाई कर सकते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, कई बड़े तटीय शहरों में जमीन धंसने की मुख्य वजह भूजल निकालना ही है। इसका मतलब यह है कि जल-प्रबंधन से जुड़े फैसले वाकई बड़ा फर्क ला सकते हैं। भूजल निकालने पर सख्त नियम, पानी के वैकल्पिक स्रोतों का इस्तेमाल और जमीन के नीचे पानी वापस भरने यानी एक्विफर रिचार्ज जैसे कदमों से जमीन के धंसने की रफ्तार कम की जा सकती है। कुछ मामलों में इसे काफी हद तक रोका भी जा सकता है।

टोक्यो और टेक्सास में जमीन धंसने की रफ्तार कैसे हुई कम?

टोक्यो इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कभी यह शहर हर साल 10 सेंटीमीटर से भी ज्यादा धंस रहा था। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में जमीन धंसने की रफ्तार करीब 24 सेंटीमीटर प्रति वर्ष तक पहुंच गई थी। लेकिन सरकार की सख्ती और पानी के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने से यह दर काफी हद तक कम हो गई। अमेरिका के टेक्सास राज्य में भी ऐसा ही हुआ। ह्यूस्टन-गैल्वेस्टन इलाके में भूजल के बेतहाशा इस्तेमाल करने की वजह से जमीन तेजी से धंस रही थी। इसे रोकने के लिए 1975 में "हैरिस-गैल्वेस्टन सबसिडेंस डिस्ट्रिक्ट" नाम की संस्था बनाई गई। इस संस्था का काम भूजल के इस्तेमाल को नियंत्रित करना, वैकल्पिक जल स्रोतों को बढ़ावा देना और पानी बचाने की नीतियां लागू करना था।

असली खतरा क्या है?

तटीय शहरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ समुद्र का बढ़ता जलस्तर नहीं है, बल्कि असली समस्या तब बढ़ती है जब समुद्र ऊपर उठे और उसी समय जमीन नीचे धंसती जाए। ऐसे में बाढ़, समुद्री पानी के अंदर आने, तटीय ढांचे को नुकसान और जलभराव का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए भविष्य की योजना बनाते समय सिर्फ समुद्र के स्तर की निगरानी काफी नहीं होगी। यह देखना भी जरूरी है कि जमीन कितनी तेजी से नीचे जा रही है।

इस रिसर्च से साफ पता चलता है कि समुद्री जलस्तर बढ़ने की कहानी सिर्फ जलवायु परिवर्तन तक सीमित नहीं है। जिन शहरों में इंसान जमीन के नीचे से बेतहाशा पानी और संसाधन निकाल रहे हैं, वे खुद अपने पैरों के नीचे से जमीन खिसका रहे हैं। अच्छी खबर यह है कि टोक्यो और टेक्सास जैसे उदाहरण दिखाते हैं कि सही नीतियों और समय पर उठाए गए कदमों से इस खतरे को काफी हद तक काबू में किया जा सकता है।

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