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कौन है TMC का शेख शाहजहां? ममता का करीबी, जिसके गुर्गों पर है ED अफसरों पर हमले का आरोप

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 6, 2024, 03:22 PM IST

who is Sheikh Shahjahan: आइए जानते हैं कौन है शेख शाहजहां? टीएमसी और ममता बनर्जी से उसका लेनादेना क्या है? राशन घोटाले में उसका नाम कैसे आया? हमले के बाद ईडी अधिकारियों ने क्या एक्शन लिया है?

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कौन है शेख शाहजहां?

Photo : Times Now Digital

Who is Sheikh Shahjahan: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम शुक्रवार को राशन घोटाले की जांच करने पश्चिम बंगाल के 24 परगना पहुंची थी। जैसे ही अधिकारियों की टीम यहां के संदेशखाली पहुंची तो बड़ी संख्या में टीएमसी समर्थकों ने उन्हें घेर लिया। नारेबाजी हुई और इसके बाद अधिकारियों पर हमला कर दिया गया। इसमें तीन अधिकारी घायल हो गए। इतना ही नहीं ईडी अधिकारियों की गाड़ी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

अब इस हमले के पीछे तृणमूल कांग्रेस के नेता शेख शाहजहां का नाम सामने आ रहा है। दरअसल, ईडी की टीम शाहजहां के यहां ही रेड डालने पहुंची थी, लेकिन उससे पहले ही शाहजहां के गुर्गों ने ईडी अधिकारियों पर हमला कर दिया। ईडी अधिकारियों का आरोप है कि कथित राशन घोटलो में शेख शाहजहां भी संलिप्त है। आइए जानते हैं कौन है शेख शाहजहां? टीएमसी और ममता बनर्जी से उसका लेनादेना क्या है? राशन घोटाले में उसका नाम कैसे आया? हमले के बाद ईडी अधिकारियों ने क्या एक्शन लिया है?

पहले जानिए हुआ क्या था?

जानकारी के मुताबिक, ईडी के अधिकारी शेख शाहजहां के यहां छापेमारी के लिए उसके आवास पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने दरवाजा खुलवाने का कई बार प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद अधिकारियों ने दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। इसी दौरान कथित तौर पर शेख शाहजहां के समर्थक वहां पहुंच गए और अधिकारियों और सुरक्षा बलों को घेरकर उन पर हमला कर दिया। आरोप है कि हमले के बाद ईडी अधिकारियों ने पुलिस अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी।

2013 में सीपीआई(एम) से टीएमसी में हुआ शामिल

शेख शाहजहां ने साल 2006 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। तब पश्चिम बंगाल में वामपंथी शासन था। तभी शाहजहां सीपीआई(एम) नेता मोस्लेम शेख के करीब आया और धीरे-धीरे आगे बढ़ता चला गया। उसने पैसे की उगाही शुरू की इसके बाद शाहजहां ने मछली पालन और रियल एस्टेट कारोबार में भी कदम रखा। 2011 में जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार आई तो वामपंथी पार्टी से उसका मोह भंग होने लगा। 2013 में वह टीएमसी में शामिल हो गया।

ज्योतिप्रिय मलिक और ममता का करीबी

शाहजहां शेख को पश्चिम बंगाल के राज्य मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक का काफी करीबी माना जाता है। मलिक को पहले ही राशन वितरण के करोड़ों के घोटाले में गिरफ्तार किया जा चुका है। ईडी को शक है कि शाहजहां शेख की भी इसमें संलिप्पता हो सकती है। इसको लेकर ईडी अधिकारियों ने एक रिपोर्ट दिल्ली भेज दी है। उधर, भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी का आरोप है कि शाहजहां शेख टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का भी बेहद खास है। उसने अवैध व्यापार से करोड़ों की प्रॉपर्टी बनाई है। कई ईंट भट्टे, मछली फॉर्म और शॉपिंग कॉम्ल्पेक्स शाहजहां शेख के नाम हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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