Amroha Flood: अमरोहा जिले में लगातार बारिश और जलभराव के चलते दर्जनों गांवों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। गांवों में पानी भरने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सैकड़ों बीघा सब्जी और गन्ने की फसल पानी में डूबकर बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है। जलभराव के कारण पशुओं के लिए चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर चारा उपलब्ध नहीं होने के कारण दूसरे जिलों से पशुओं के लिए चारा मंगाना पड़ रहा है। इससे पशुपालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ा
गांवों में लंबे समय से जमा गंदे पानी के कारण बच्चों और बड़ों में बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कई रास्ते पानी में डूबे हुए हैं, जिससे लोगों को आवागमन में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी जताई है।
जलनिकासी के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए
उनका आरोप है कि बार-बार समस्या से अवगत कराने के बावजूद राहत और जलनिकासी के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल जलनिकासी, स्वास्थ्य शिविर, साफ पानी और पशु चारे की व्यवस्था कराने के साथ ही फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं निकाला गया तो फसलों के साथ-साथ पशुधन और लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
किस तरह की बीमारियों का खतरा
- दूषित स्रोत: सीवेज का गंदा पानी या रसायन पेयजल स्रोतों में मिलने से पानी दूषित हो जाता है।
- हानिकारक जीवाणु: दूषित पानी में हैजा, टाइफाइड और पीलिया फैलाने वाले बैक्टीरिया व वायरस पनपते हैं।
- दूषित पानी का सेवन: ऐसा असुरक्षित पानी पीने या उससे बना खाना खाने से संक्रमण शरीर में प्रवेश कर जाता है।
- मच्छरों का पनपना: गड्ढों में रुके गंदे पानी में मच्छर पैदा होते हैं, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां फैलती हैं।
